Homeराजस्थानमाउंट आबूआबू रोड: तकनीक के साथ पत्रकारिता के मूल सिद्धांत जरूरी: मधुकर द्विवेदी

आबू रोड: तकनीक के साथ पत्रकारिता के मूल सिद्धांत जरूरी: मधुकर द्विवेदी

सत्य, विश्वास एवं पारदर्शिता: मीडिया उत्तरदायित्व की पुनर्परिभाषा विषय पर प्रथम सत्र आयोजित

– मान सरोवर में चार दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन जारी

आबू रोड,राजस्थान। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के मानसरोवर परिसर में आयोजित राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन-2026 का प्रथम पूर्ण सत्र सत्य, विश्वास एवं पारदर्शिता: मीडिया उत्तरदायित्व की पुनर्परिभाषा विषय पर आयोजित किया गया। सम्मेलन का मुख्य विषय है- श्रेष्ठ विश्व के निर्माण हेतु सशक्त मीडिया।

इसमें सत्र की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार मधुकर द्विवेदी ने कहा कि पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत उसकी विश्वसनीयता है। मीडिया को जनहित, निष्पक्षता और सत्य को केंद्र में रखते हुए अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते तकनीकी परिवेश के बावजूद पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। सम्मेलन में देशभर से 1500 से अधिक मीडिया क्षेत्र से जुड़े पत्रकार, संपादक, शिक्षाविद और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

जयपुर के वरिष्ठ पत्रकार राजेश असनानी ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान सामाजिक उत्थान के साथ मीडिया के उत्थान के लिए जो कार्य कर रही है, वह सराहनीय है। आज हम ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं जहां मीडिया की कोई परिधि नहीं रही है।

भोपाल से आए वरिष्ठ संपादक कौशल किशोर चतुर्वेदी ने कहा कि आज मीडिया के सामने प्रसार संख्या, दर्शक संख्या और सबसे पहले खबर देने की प्रतिस्पर्धा है। इस प्रतिस्पर्धा के बीच पत्रकारिता के मूल मूल्यों को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। यदि मीडिया सत्य और नैतिकता से समझौता करता है तो जनता का विश्वास कमजोर होता है। इसके विपरीत पारदर्शी, निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता समाज में विश्वास को मजबूत करती है।

समाज को सही दिशा देना होना –

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर की एसजेएमसी विभागाध्यक्ष डॉ. सोनाली नारगुंडे ने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल सनसनी पैदा करना नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देना होना चाहिए। मीडिया को सामाजिक समस्याओं को सामने लाने के साथ-साथ उनके समाधान की दिशा में भी सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। पत्रकार के शब्दों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है, इसलिए प्रत्येक शब्द का उपयोग जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए।

नॉर्थ महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी जलगांव के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सोमनाथ बड़नेरे ने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में मीडिया केवल सूचना पहुंचाने का माध्यम नहीं, बल्कि जनमत निर्माण और सामाजिक चेतना जागृत करने की महत्वपूर्ण शक्ति है। इसलिए पत्रकारिता में सत्य, विश्वास और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है।

इन्होंने भी व्यक्त किए विचार-

दिल्ली की वरिष्ठ संपादक सरजना शर्मा ने समाचारों में सत्यता और निष्पक्षता के महत्व पर विचार व्यक्त किए। भारतीय जनसंचार संस्थान, दिल्ली के राजभाषा सहायक निदेशक अंकुर विजयवर्गीय ने भाषा, पत्रकारिता और जनसंचार के बदलते स्वरूप पर अपने विचार साझा किए। डॉ. बीआरए विश्वविद्यालय, आगरा के सहायक प्रोफेसर डॉ. संदीप कुमार ने मीडिया की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला। चंडीगढ़ के समाचार संपादक केवल तिवारी ने भी पत्रकारिता की वर्तमान चुनौतियों और जिम्मेदारियों पर अपने विचार रखे।

राजयोग से कराई शांति की अनुभूति-

गुजरात की क्षेत्रीय मीडिया समन्वयक बीके रंजन दीदी ने प्रतिभागियों को राजयोग मेडिटेशन का अनुभव कराया। उन्होंने राजयोग के माध्यम से मन को शांत, स्थिर और सकारात्मक बनाने की प्रक्रिया से परिचित कराया। मेडिटेशन के दौरान प्रतिभागियों ने आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया। कार्यक्रम के दौरान सम्मानित वक्ताओं को ईश्वरीय सौगात भेंट कर सम्मानित किया गया। संचालन अजमेर की उप-क्षेत्रीय समन्वयक बीके योगिनी बहन ने किया। सम्मेलन में कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान कलाकारों ने श्रीकृष्ण से लेकर शिव तांडव की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया।

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