मुख पृष्ठराज्यमहाराष्ट्रपुणे: राष्ट्रीय किसान दिवस एवं विश्व ध्यान दिवस निमित्त विशेष कार्यक्रम

पुणे: राष्ट्रीय किसान दिवस एवं विश्व ध्यान दिवस निमित्त विशेष कार्यक्रम

पुणे,महाराष्ट्र: -जगदंबा भवन में राष्ट्रीय किसान दिवस एवं विश्व ध्यान दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों का सम्मान करना, उन्हें योगिक खेती, राजयोग ध्यान एवं सकारात्मक जीवन शैली के प्रति जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम में बी.के. बालासाहेब रुगे ने योगिक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज विज्ञान ने प्रगति की है, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है की खेती पर विज्ञानं से भी ज्यादा विचारों और भावनाओं का गहरा प्रभाव पड़ता है। बीज बोते समय उनसे सकारात्मक संवाद करने पर भी अच्छे परिणाम मिलते हैं। किसानों से उन्होंने प्रतिदिन कम से कम 5 मिनट शांति और शुभ भावनाओं का योगदान खेती को देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग अहिंसा के सिद्धांत के विपरीत है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में ब्रह्माकुमारीज के संपर्क में आने के बाद उन्होंने खेती में राजयोग ध्यान का प्रयोग शुरू किया और उससे बहोत अच्छे परिणाम आने लगे। उन्होंने अपने खेत में विभिन्न वृक्ष लगाकर ऑक्सीजन पार्क का निर्माण किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर पधारे पुणे कृषि विद्यापीठ के असोसिएट डीन डॉ. महानंद शिवाजीराव माने ने कहा कि डॉक्टर यह तो बताते हैं कि क्या खाना चाहिए, लेकिन किस सोच के साथ खाना चाहिए, यह नहीं बताते। उन्होंने बताया कि यदि चंचल मन पर बुद्धि का नियंत्रण हो जाए तो मनुष्य असाधारण कार्य कर सकता है। ब्रह्माकुमारीज द्वारा सिखाए जाने वाले राजयोग ध्यान को अपनाने से व्यक्ति, परिवार, समाज और देश समृद्ध बन सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि जैसे फैमिली डॉक्टर होता है, वैसे ही हर समाज में फैमिली फार्मर होना चाहिए।

कार्यक्रम में पधारे महाराष्ट्र वारकरी संप्रदाय के अध्यक्ष हरी भक्त पारायण रांजने महाराज ने कहा कि इस संस्था का उद्देश्य मनुष्य का सर्वांगीण उत्थान है। यह संस्था केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में उन्नति का मार्ग दिखाती है। उन्होंने बताया कि रासायनिक खादों के कारण फसलों की जीवन शक्ति नष्ट हो रही है। किसानों में बढ़ रही आत्महत्याओं का कारण सही नियोजन का अभाव है। उन्होंने सभी को निर्व्यसनी और संतुलित जीवन जीने का संदेश दिया।

कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग के महाराष्ट्र संयोजक बी.के. दशरथ भाई ने अपने शुभ प्रेरणादायक संदेश में कहा कि कृषि हमारी प्राचीन संस्कृति है। उन्होंने महात्मा गांधी जी के “चलो गाँव की ओर” संदेश को स्मरण करते हुए कहा कि देश की वास्तविक उन्नति गाँवों में है। उन्होंने कहा कि यदि किसान को राजा बनना है, तो उसे राजयोग का अभ्यास करना होगा। परमात्मा की स्मृति में किया गया हर कार्य सफलता प्रदान करता है। उन्होंने कृषि क्षेत्र में राजऋषि तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।

विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर बी.के. शीतल बहन (नारायणगांव, पुणे) ने ध्यान के महत्व को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि निरंतर आनंदित और मुस्कुराता जीवन जीने के लिए ध्यान आवश्यक है। जीवन में जब भी समस्या आए, तो उसे ईश्वर को सौंप देने से मन हल्का होता है और व्यक्ति आनंद में रह सकता है। इस अवसर पर उन्होंने किसानों के लिए राजयोग ध्यान सत्र का सफलतापूर्वक संचालन किया, जिससे सभी ने गहरी शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया।

कार्यक्रम का सूत्रसंचालन बी.के. दत्ता भाई ने किया। जगदम्बा भवन के दिव्य वाणी ग्रुप ने अपने मधुर गीत से सभी अथितियों का स्वागत किया तथा जगदम्बा भवन के सांस्कृतिक कला मंच ने नृत्य द्वारा सभी का मन जीत लिया।  कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों को सम्मानित किया गया, जिससे उनके आत्मसम्मान एवं मनोबल में वृद्धि हुई। वातावरण अत्यंत शांत, सकारात्मक एवं उत्साहवर्धक रहा। इस कार्यक्रम में 200 से अधिक किसानों की गरिमामयी उपस्थिति रही। यह कार्यक्रम किसानों के लिए आध्यात्मिक सशक्तिकरण, मानसिक शांति एवं जीवन में संतुलन का सशक्त माध्यम बना। उपस्थित किसानों ने कार्यक्रम को अत्यंत प्रेरणादायक एवं लाभकारी बताया।

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