तेली मांगली (मौदा) , महाराष्ट्र। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, मौदा और जनरस टेक्नॉलॉजी Pvt Ltd के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय किसान दिवस का आयोजन तेली मांगली गांव के सरपंच निशाताई फटिंग और रविंदरजी फटिंग के खेत में किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत: दीप प्रज्वलन के साथ परमात्मा की याद में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। ब्रह्माकुमारी अर्चना दीदी (मौदा सेवाकेंद्र संचालिका) ने कहा: “किसान देश की शान है। आज हमें अपनी जमीन, अपनी मिट्टी और अपने अन्न को बचाने की जरूरत है। जैसा अन्न, वैसा मन — इसलिए शुद्ध खेती = शुद्ध विचार।”

राजयोगिनी प्रेमलता दीदी (कामठी सेवाकेंद्र) ने कहा “उत्तम खेती, मध्यम व्यापार, कनिष्ठ नौकरी — किसान अपने खेत का मालिक है। बस उसे जागृत होने की जरूरत है। चारित्रवान किसान ही श्रेष्ठ अन्न उगा सकता है, और वही अन्न लोगों के मन को भी शुद्ध करता है।
भ्राता रोहन राऊत (जनरस टेक्नॉलॉजी Pvt Ltd) ने कहा “मैंने रासायनिक खाद का नुकसान देखा — तो अपने परिवार के लिए पारंपरिक खेती अपनाई। गौमाता और प्रकृति की रक्षा के लिए पुरानी पद्धतियों को वापस लाया। आज मेरा खेत, मेरा परिवार, मेरा जीवन — सब कुछ स्वस्थ है।
कृष्णाजी हटवार (विस्तार अधिकारी) ने कहा “थोड़ी सी जगह पर भी जैविक खेती का प्रयोग करें। शाश्वत योगिक खेती से मिट्टी की ‘तबियत’ सुधरेगी। एक बार अनुभव करें — फिर आप भी बदल जाएंगे।”
सम्मान समारोह:
- जैविक खेती करने वाले किसानों को दुपट्टा और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
- उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में:
- कोराड से लटारूजी ठाकरे (माजी सभापति)
- बोरकर सर (प्राध्यापक, तिडके कॉलेज)
- रविंदरजी फटिंग (माजी सरपंच)
- निशाताई फटिंग (सरपंच, तेली मांगली)
- बड़ी संख्या में किसान भाई-बहन
अंत में:
- सभी ने प्रतिज्ञा ली— “हम शुद्ध खेती करेंगे, जमीन की रक्षा करेंगे, अन्न का सम्मान करेंगे।”
मंच संचालन: शिलू बहन
स्वागत: विमल बहन
महाप्रसाद: सभी अन्नदाता किसानों ने मिलकर ग्रहण किया
“जैसा अन्न, वैसा मन — जैसा मन, वैसा जीवन।”
इस दिन ने किसानों को सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि जागृति, आत्मविश्वास और प्रेरणा दी।
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