दुर्ग(छतीसगढ़) इस अवसर पर दुर्ग संसदीय क्षेत्र के लोकप्रिय सांसद विजय बघेल,दुर्ग नगर निगम के महापौर श्रीमती अलका बाघमार,संजय बोहरा,सुनीता बोहरा एवं अनेक गणमान्य नागरिकगण इस आयोजन में सम्मिलित हुए। आगंतुक अतिथियों का पारंपरिक गीतों एवं मनमोहक नृत्य के द्वारा चयन,विवेक और तरुण भाई ने स्वागत किया । अतिथियो का ब्रह्मकुमारी बहनों ने पुष्प गुच्छ से स्वागत किया तत्पश्चात ब्रह्माकुमारीज दुर्ग की संचालिका रीटा दीदी ने छेरछेरा पुन्नी पर्व के विषय में अपने उद्बोधन में बताया छत्तीसगढ़ के लोकपर्व छेरछेरा पुन्नी पर्व दानशीलता का प्रतीक है इसलिए इस दिन को फसल उत्सव और दान के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। लोग खुशी-खुशी एक-दूसरे को और जरूरतमंदों को अन्न दान करते हैं।
दुर्ग सांसद विजय बघेल ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक और ऐतिहासिक पर्व पर उपस्थित सभी सभाजनों को अपनी ढेर सारी शुभकामनाएं दी साथ ही कहा कि वर्तमान समय ब्रह्मकुमारी बहनों द्वारा लुप्त होते इस पर्व को बहुत ही सुंदर ढंग से मना रहे हैं । जिसके लिएसभी को ढेर सारी बधाई एवं शुभकामनाएं ।
दुर्ग नगर निगम के महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने छत्तीसगढ़ी में बोलते हुए कहा कि “आनंद सरोवर” के इस प्रांगण में कदम रखते हुए शांति की अविरल प्रकंपन की अनुभूति होती है । छत्तीसगढ़ के बहुत सारे पारंपरिक पर्व को आज की पीढ़ी भूलते जा रही है । ब्रह्मकुमारी बहनों का हृदय से धन्यवाद जिन्होंने इस पर्व को सुंदर ढंग से मनाने की शुरुआत की है । जैसे हर राज्य में फसल की कटाई के पश्चात त्यौहार मनाते हैं जैसे पंजाब में फसल कटाई के पश्चात त्यौहार मनाते हैं उसी प्रकार छत्तीसगढ़ में भी धान कटाई के पश्चात यह छेरछेरा पुन्नी पर्व मनाया जाता है । यह पर्व दान देने से भंडार भरने का याद दिलाता है ।
श्रीमती सुनीता बोहरा (उपाध्यक्ष स्काउट गाइड छत्तीसगढ़ राज्य) ने सभी अतिथियों के प्रति आभार जताया एवं कहा कि छत्तीसगढ़ का पारंपरिक पर्व छेरछेरा पुन्नी हमें दान देने के परंपरा का याद दिलाता है । ब्रह्माकुमारीज में भी कहा जाता है कलयुग बदल सतयुग अभी निकट भविष्य में आने वाला है जहां सब धन-धान्य से भरपूर एवं संपन्न होंगे । यह पर्व हमें लेने के बजाय देना सिखाता है । जितना हम औरों को देते हैं उतना ही स्वयं संपन्नता का अनुभव करते हैं ।
मंच संचालन करते हुए ब्रह्माकुमारी चैतन्य प्रभा ने छेरछेरा पुन्नी पर्व की बहुत सुंदर कविता सभी को सुनायी ।






