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हरिद्वार: ब्रह्मा बाबा के 57 वें पुण्य स्मृति दिवस का कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, एवं दिव्य आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया

ब्रह्माकुमारी संस्था एक श्रेष्ठ संस्कारशाला- महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद गिरि जी महाराज

हरिद्वार , उत्तराखंड। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के हरिद्वार सेवाकेंद्र पर “ विश्व शांति दिवस” का कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, एवं दिव्य आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया ।

कार्यक्रम में हरि सेवा आश्रम ट्रस्ट के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद गिरि महाराज जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि ब्रह्मा बाबा का शरीर दिव्य, तेजोमय एवं असामान्य था, इसी कारण परमात्मा ने उनमें प्रवेश किया। उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा की जा रही सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि यह विश्व की एकमात्र संस्था है जो धर्म के साथ-साथ मोक्ष की शिक्षा भी देती है। यह एक संस्कारशाला है, जहाँ से शांति एवं श्रेष्ठ संस्कार सीखकर उन्हें विश्व में फैलाने की प्रेरणा मिलती है।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव महामंडलेश्वर रविंद्र पुरी जी महाराज ने कहा कि 140 देशों में किसी संस्था का विस्तार होना किसी साधारण मानव के लिए संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि भले ही ब्रह्मा बाबा का पंचभौतिक शरीर आज हमारे बीच नहीं है, परंतु उनके द्वारा अर्जित दिव्य ऊर्जा का अनुभव आज भी सभी सेवाकेंद्रों पर किया जाता है। बाबा के कर्म, साधना और आराधना को जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

हरिद्वार के संतोषी माँ मंदिर की परमाध्यक्षा महामहामंडलेश्वरी संतोषी माँ जी महाराज ने कहा कि जब तक जीवन में नित्य, नैतिक अधिनियम एवं नियम नहीं होंगे, तब तक आध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं है। ब्रह्मा बाबा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि अवतारों की श्रृंखला में दादा भी हैं, जिनमें साक्षात् भगवान शिव का प्रकटिकरण हुआ। उन्होंने संस्था की विशेषताओं की सराहना करते हुए कहा कि शुद्ध आचरण, शुद्ध विचार एवं ब्रह्मचर्य जीवन पर दिया गया बल अत्यंत प्रेरणादायक है।

देहरादून सबज़ोन एवं सर्किल की मुख्य संचालिका बी.के. मंजू दीदी जी ने ब्रह्मा बाबा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाबा कभी कर्तव्यों से हटकर तपस्या नहीं करते थे। उनका जीवन कर्मयोगी, चलता-फिरता तपस्वी का था। उन्होंने सभी को प्रेरित किया कि हम भी बाबा के पदचिन्हों पर चलते हुए कर्मयोगी जीवन अपनाएँ।

हरिद्वार सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मीना दीदी जी ने ब्रह्मा बाबा की विशेषताओं का वर्णन करते हुए कहा कि बाबा का जीवन एक खुली पुस्तक की तरह था, जिसे पढ़कर कोई भी प्रेरणा ले सकता है। उन्होंने अपने प्रारंभिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि बाबा की जीवनकथा पढ़कर उन्होंने संकल्प किया कि जीवन जीना है तो बाबा जैसा।

भ्राता बी.के. सुशील जी ने यज्ञ इतिहास पर प्रकाश डालते हुए ब्रह्मा बाबा के महान चरित्रों को स्मरण किया।

सभी अतिथियों ने ब्रह्मा बाबा को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके पश्चात कुमारी आराध्या ने बाबा की स्मृति में एक भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया। बी.के. स्वाति एवं बी.के. अक्षिता द्वारा ब्रह्मा बाबा की विशेषताओं पर आधारित एक प्रेरणादायक संभाषण प्रस्तुत किया गया।

अंत में सभी अतिथियों को ईश्वरीय सौगात प्रदान की गईं। मंच का कुशल एवं प्रभावी संचालन भ्राता बी.के. सुशील जी द्वारा किया गया।

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