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वड़ोदरा-अटलादरा : 18 जनवरी स्मृति दिवस पर ब्रह्मा बाबा को श्रद्धा सुमन अर्पित

वडोदरा बीजेपी प्रेसिडेंट डॉ जयप्रकाश सोनी जी ने अपने राजयोग कोर्स के अनुभव शेयर किए

वड़ोदरा-अटलादरा , गुजरात। 18 जनवरी रविवार के दिन प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की स्थापना के ईश्वरीय निमित्त दादा लेखराज, जिन्हें संस्था के भाई बहन ब्रह्मा बाबा कहकर संबोधित करते हैं, उसकी 57वीं पुण्य स्मृति दिवस के अवसर पर अटलादरा सेवाकेंद्र पर श्रद्धा सुमन अर्पण एवं विशेष योग सत्र कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ब्रह्मा बाबा के जीवन चरित्रों को याद करते हुए उन्हें जीवन में अपनाने का संकल्प सभी भाई बहनों ने किया और सेवाकेंद्र में मधुबन के चार धाम के प्रतिरूप स्थान बने हुए हैं वहां जाकर सभी भाई बहनों ने अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

इस कार्यक्रम में
1) वडोदरा के बीजेपी प्रेसिडेंट डॉ जयप्रकाश सोनी
2) केयर ग्रुप कंपनी के सीईओ डॉ पारुल बेन दवे
3) जायडस कंपनी के ओनर डॉ अजय भाई रांका
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और ब्रह्मा बाबा को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

विगत 10 दिनों में डॉ जयप्रकाश सोनी जी ने सेवाकेंद्र पर आके राजयोग कोर्स भी पूरा किया। इस उपलक्ष्य में नियमित ज्ञान मुरली क्लास के पश्चात सेवाकेंद्र संचालिका बीके डॉ अरुणा बहन जी ने डॉ जयप्रकाश जी को सम्मानित किया और उनकी आध्यात्मिक यात्रा के नवारंभ के लिए सब की ओर से शुभकामनाएं प्रदान कीं।

इस बीच अपने राजयोग कोर्स के अनुभव साझा करते हुए डॉ जयप्रकाश जी ने कहा कि राजयोग कोर्स से मुझे विशेष रूप से हमारे अंदर निहित आध्यात्मिक शक्तियों एवं परमात्मा का स्पष्ट परिचय मिला जिससे मैं यह समझा कि मैं एक आत्मा हूं और परमात्मा सारे गुण और शक्तियों के सागर हैं। आध्यात्मिकता के क्षेत्र में कई लोग अच्छा कार्य कर रहे हैं लेकिन आत्मा का मिलन परमात्मा से कैसे हो वह महीन रूप से वैज्ञानिक तथ्यों के साथ केवल ब्रह्माकुमारीज़ में ही सिखाया जाता है। योग में मैंने समझा कि अब मुझे स्वयं को आत्मा समझते हुए परमात्मा को याद करना है जो करना एकदम सहज नहीं होता है इसीलिए ज्ञान मुरली के माध्यम से परमात्मा हमें रोज बताते हैं की कैसे हमें बुद्धि से उनके पास परमधाम जाना है और स्वयं में उनके गुण एवं शक्तियों को धारण करके अपने जीवन और कर्मों में लाना है और वही वाइब्रेशन सभी को देते हुए उन शक्तियों को बांटना है यही सच्ची आध्यात्मिकता है। क्योंकि जब हम खुद खुश और शक्तिशाली होंगे तभी दूसरों को खुशी और शक्ति बांट सकेंगे। इन्हीं बातों को समझते हुए राजयोग से मैंने गहरी शांति का अनुभव किया है। मुझे स्पष्ट हुआ कि हमारे जीवन में सामाजिक पारिवारिक और व्यक्तिगत कार्यक्षेत्र की जिम्मेदारियां उठाते हुए जो सबसे महत्वपूर्ण कड़ी आध्यात्मिकता होती है वह कहीं छूट जाती है और राजयोग में वही महत्वपूर्ण कड़ियां पुनः जुड़ गई हैं। मैं पिछले कई वर्षों से RSS का नियमित सदस्य हूं जहां सेवा, अनुशासन एवं राष्ट्र हित के विषय में हर प्रकार से चिंतनशील रहते हुए हम भारत को पहले जैसा वैभवशाली बनाने हेतु प्रयासरत रहते हैं, इस विषय में यहां आकर मुझे पता चला कि अभी वही संगमयुग चल रहा है जब स्वयं और संगठन में आध्यात्मिकता का समावेश करने से हमारी सेवाओं और कार्यशैली में अभूतपूर्व विकास हो सकता है क्योंकि जब हम शांत और शक्तिशाली होते हैं तो संगठन भी शक्तिशाली होता है और मजबूत संगठन से ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण हो सकता है। इसलिए संस्था में मिली परमात्मा की इन्हीं प्रेरणाओं के साथ अब आगे चलना है और देश को स्वर्णिम वैभवशाली बनाना है।

डॉ अजय रांका जी ने अपने विचारों में कहा कि हम यहां तीन बातों के लिए आते हैं जिस कसौटी पर हम स्वयं को देख सकते हैं और वह हैं ग्रहण करना धारण करना और स्मरण में रखना, जिसका अभिप्राय है कि हम यहां ज्ञान को ग्रहण करते हैं फिर उसे प्रयोग करके जीवन में धारण कर लेते हैं लेकिन इसके बाद सतत जागरूकता के साथ जब वे धारणाएं स्मरण में बनी रहती हैं तो वो हमारे जीवन का हिस्सा बन जाती हैं और हमारा आध्यात्मिक ज्ञान लेना सार्थक हो जाता है। तो इन तीन बिंदुओं पर हमें स्वयं को जांचते रहना है।

डॉ पारूल दवे ने भी बाबा को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए और सेवाओं के लिए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

बीके सागर और बीके कुनिका ने ब्रह्मा बाबा के जीवन चरित्र को सुंदर सुंदर गीत के माध्यम से सभी भाई बहनों को उनकी स्मृति दिलाके सभी का मनभावन कर दिया |

इसके बाद ब्रह्मा बाबा को श्रद्धा सुमन अर्पित करके भाई बहनों ने ईश्वरीय प्रसाद ग्रहण किया और 12:00 बजे तक गहन ज्ञान योग भट्टी का अनुभव किया।

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