खरियार,ओडिशा: उप कारागृह में 60 कैदी भाइयों के लिए नशा मुक्त भारत अभियान श्री महेश्वर खुजूर जी (जेल अधीक्षक) महोदय की देखरेख में संपन्न हुआ। https://drive.google.com/drive/folders/17DFw1udy4b7heCLSEqu9jDAqyzMNVM-q?usp=sharing
बी के राजीव (मेडिकल विंग वक्ता) ने सभी को नशे से होने वाले शारीरिक एवं मानसिक नुकसान की वीडियो दिखाकर जागरूक किया एवं सभी को तंबाकू की वास्तविकता से रूबरू कराते हुए बताया कि
1 सक्रिय धूम्रपान से प्रति वर्ष 12 लाख और निष्क्रिय धूम्रपान से 8 लाख भारत में मौतें होती हैं।
2 प्रति दिन भारत में 5500 नए युवा पहली बार तम्बाकू का सेवन शुरू करते हैं।3. तम्बाकू एक धीमा जहर है जिसमे 4000 रासायनिक द्रव्य होते हैं, जिनमें से 40 खतरनाक द्रव्यों से कैंसर रोग होते हैं जैसे निकोटिन, कीटनाशक, कार्बन मोनोऑक्साइड, कैडमियम, आर्सेनिक, मीथेन गैस, मेथेनॉल, एसीटोन आदि।
4. इसमें पाया जाने वाला निकोटीन एक ऐसा खतरनाक द्रव्य है जिसकी मात्रा यदि कम हो तो व्यक्ति को आराम का एहसास कराता है और यदि एक साधारण मनुष्य को इसका इंट्रावेनस इंजेक्शन लगाया जाए तो उसकी मृत्यु 1 घंटे के अंतराल में हो सकती है और यही वह द्रव्य है जो धीरे-धीरे हमारे दिमाग को नियंत्रित करता है इसी कारण से मनुष्य तंबाकू छोड़ने में असहाय महसूस करता।
5. जहां तंबाकू की खेती होती है उस क्षेत्र में कोई भी जानवर प्रवेश नहीं करता क्योंकि उसमें से जो गैसेस निकलती हैं वह उन्हें दूर से ही जान लेते हैं। केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जो इसका सेवन करता है क्योंकि जब वह बचपन में इसकी शुरुआत करता है तो वह इसके भयानक रूप से अनजान रहता है और यदि एक बार उसे इससे होने वाली खतरनाक बीमारियों के बारे में जागरूक कर दिया जाए तो वह कभी भी अपने जीवन में इसे हाथ नहीं लगाएगा।
तत्पश्चात जीवन को सुखी बनाने हेतु सभी को आध्यात्मिक सिद्धांतों से भी रूबरू कराया गया जैसे – (1) जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है वह भी अच्छा हो रहा है और जो होगा वह अच्छे से अच्छा ही होगा। (2) हर अकल्याण में भी कुछ कल्याण समाया हुआ होता है यह स्वीकार कर लेने से जीवन की यात्रा सहज जाती है। (3) कर्म का सिद्धांत हमें वही देता है जो हमने बीते हुए समय में किया होता है अर्थात जैसी करनी वैसी भरनी।
वर्तमान में ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्त भारत अभियान के माध्यम से समस्त भारत वासियों को नशीले पदार्थों से मुक्ति दिलाने की आश रखते हुए युवाओं को जागरूक करने के नूतन कार्य में दिन रात लगा हुआ। इस कार्यक्रम में सभी को सुन्दर रचनात्मक और रुचिदायक क्रीड़ाओं के माध्यम से स्वप्रेरणा का प्रशिक्षण सिखाकर रोज़ाना उसका अभ्यास करने से अपने जीवन में एक सकारात्मक नशे को अवश्य धारण करने की राय दी ताकि हमारे कैदी भाइयों का जीवन खुशियों से भरपूर हो जाए और अपने जीवन से अनेकों की बुझी हुई ज्योत जगा सकें। अंत में सभी को सहज राजयोग का अभ्यास करवाते हुए मेडिटेशन सीखकर अपनी दिनचर्या को स्वस्थ और सुदृढ़ बनाने का मार्ग प्रदर्शित किया गया तथा इन बुराइयों से बचने की शपथ भी दिलाई गई। इस कार्यक्रम को सभी ने ब्रह्माकुमारीज़ का समाज गठन करने हेतु इस कदम को अग्रिम बताते हुए आगे भी जारी रखने का निवेदन किया।इस कार्यक्रम को सफल बनाने में राज खरियार (सर्टिफिकेट नंबर 2172) क्षेत्र की राजयोगिनी सूर्यकांति बहन, बी के रीता और बी के संतोष भाई सहित सभी भाई बहनों का अथक सहयोग रहा।





