शोभाताई सोपल महिला बहुउद्देशीय विकास संस्था की तरफ से स्त्री भूषण पुरस्कार से संगीता दीदी को सम्मानित करते हुए उज्वलाताई सोपल
बार्शी, महाराष्ट्र : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर स्वर्गीय सौ. शोभाताई सोपल महिला बहुउद्देशीय विकास संस्था के तत्वावधान में “सम्मान कर्तृत्व का – महिला पुरस्कार वितरण समारोह” उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम की मुख्य नियोजक एवं मार्गदर्शक उज्ज्वलाताई सोपल थीं। विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं का इस कार्यक्रम में सम्मान किया गया।
इस अवसर पर अमृता शाह, वीर पत्नी रोहिणी काकड़े, ब्रह्माकुमारी संगीता दीदी और खिलाड़ी सान्वी गोरे को “सम्मान कर्तृत्व का” महिला पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में ब्रह्माकुमारी संगीता दीदी ने “ओम शांति” का घोष करते हुए आध्यात्मिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं में गुणों और शक्तियों का अपार भंडार भरा हुआ है। यदि प्रत्येक नारी अपने श्रेष्ठ स्वरूप को स्मरण रखे तो उसके भीतर छिपी शक्तियाँ जागृत होंगी और वह अपने घर तथा समाज को स्वर्ग समान बना सकती है। यदि हर घर स्वर्ग बन जाए तो पूरा विश्व भी स्वर्ग बन सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय ईश्वर द्वारा स्थापित और महिलाओं द्वारा संचालित आध्यात्मिक संस्था है तथा सभी को बार्शी में नव निर्मित राजयोग भवन का अवश्य दर्शन करने का निमंत्रण दिया।
इस कार्यक्रम में बार्शी के विधायक दिलीपराव सोपल मुख्य रूप से उपस्थित थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अमृता शाह छोटे बच्चों को संस्कार देने का महत्वपूर्ण कार्य करने वाली आदर्श शिक्षिका हैं। बुद्धिबल (चेस) प्रतियोगिता में प्रावीण्य प्राप्त करने वाली सान्वी गोरे भी प्रशंसा की पात्र हैं। साथ ही शहीद की पत्नी रोहिणी काकड़े का सम्मान करना अत्यंत गौरव की बात है। उन्होंने ब्रह्माकुमारी संगीता दीदी के मार्गदर्शन को बहुमूल्य बताते हुए संस्था को हर वर्ष ऐसे प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित करने की शुभकामनाएँ दीं।
इस समारोह में सरिता किचन की प्रमुख सरिता पद्मण की भी प्रमुख उपस्थिति रही। उन्होंने कहा कि बदलते समय में महिलाओं को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक और सजग रहना आवश्यक है।
कार्यक्रम में शहर के अनेक मान्यवर, महिलाएँ और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। इस प्रेरणादायी आयोजन से महिला सशक्तिकरण का संदेश समाज में और अधिक मजबूत हुआ।



