इंदौर, मध्य प्रदेश। वर्तमान समय मनुष्य की इच्छा अत्यधिक बढ़ गई है वर्तमान प्राप्त साधनों से वह कभी भी संतुष्ट नहीं रहता हैऔर अधिक की चाह में लोग, उसका आनंद लेना भूल जाते हैं, जो पहले से ही उपलब्ध है।
मनुष्य का स्वभाव अक्सर ऐसा हो जाता है कि वह जो उसके पास है उससे संतुष्ट होने के बजाय लगातार “और अधिक” पाने की इच्छा में लगा रहता है। धन, पद, प्रतिष्ठा, सुविधाएँ—इन सबको पाने की दौड़ में वह इतना व्यस्त हो जाता है कि जीवन में पहले से मौजूद छोटी-छोटी खुशियों और आशीर्वाद को देख ही नहीं पाता।
जब मन हमेशा भविष्य की चाह में उलझा रहता है, तब वर्तमान का आनंद खो जाता है। परिवार का प्रेम, स्वास्थ्य, प्रकृति की सुंदरता, मन की शांति—ये सब हमारे जीवन में पहले से मौजूद होते हैं, लेकिन “और अधिक” की चाह हमें इनका मूल्य महसूस नहीं करने देती।
वास्तविक सुख तब मिलता है जब मनुष्य कृतज्ञता और संतोष का भाव विकसित करता है। जब हम यह अनुभव करते हैं कि जो कुछ मिला है वह भी एक वरदान है, तब मन शांत और प्रसन्न रहने लगता है। यह विचार धार्मिक प्रभाग के जोनल कोऑर्डिनेटर ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के सभागृह में सुखी और शांत जीवन के विषय में सुरक्षा कर्मियों को बताया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी दुर्गा बहन ने बताया कि जीवन का संतुलन यही है कि हम प्रगति की इच्छा तो रखें, लेकिन वर्तमान में जो मिला है उसका आनंद और आभार भी महसूस करें। यही संतोष मन को स्थिर, हल्का और सच्चे आनंद से भर देता है। सदैव यह बात याद रखना कि यह संसार एक नाटक शाला है। इसमें हमें अपने लिए ही कर्म का बीज बोना है और कोई हमारे भविष्यफल का कर्म का बीज बो नहीं सकता है। आज जो भी हम कर्म करेंगे वह भविष्यफल बनता है। हमारे जितने सुंदर विचार, श्रेष्ठ भावनाएं, कल्याण के विचार और सब के प्रति पवित्र भावनाएं यही भविष्य को श्रेष्ठ बनाने का आधार बनता है। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अजय प्रताप सिंह ने बताया कि पहले हम अच्छे साहित्य पढ़ते थे जिससे मन शांत हो जाता था ।शांत मन से एक अच्छी निर्णय शक्ति विकसित होती है। आज हम अच्छे साहित्य ,अच्छे विचार अपने जीवन में नहीं डालने से बीमारियां, समस्याएं बढ़ती जा रही है।हर विचारों का हमारे शरीर में केमिकल बनता है। नकारात्मक विचार डालने से हमारे शरीर में कॉर्टिसोल हारमोंस बनने से जीवन का आनंद खत्म होता जा रहा है।







