बीके लता दीदी ने बताया— शिव परमात्मा का सत्य स्वरूप जानकर जीवन में आती है सुख, शांति और नशा-मुक्ति
देवतालाब,मध्य प्रदेश। ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा प्रेम, शांति एवं सद्भावना अभियान के अंतर्गत दिनांक 08 जून 2026 को देवतालाब मंदिर परिसर में विशाल आध्यात्मिक संगोष्ठी एवं जनजागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रातःकाल से सायंकाल तक चले इस कार्यक्रम में लगभग 1500 श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों ने सहभागिता कर पुरुषोत्तम मास का आध्यात्मिक महत्व, नशा-मुक्त जीवन का संकल्प तथा शिव परमात्मा के सत्य स्वरूप का गहन ज्ञान प्राप्त किया।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता बीके लता दीदी ने कहा कि पुरुषोत्तम मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि आत्मपरिवर्तन, आत्मचिंतन और परमात्म चिंतन का विशेष अवसर है। इस पवित्र मास में मनुष्य अपने जीवन को श्रेष्ठ संस्कारों, श्रेष्ठ विचारों और श्रेष्ठ कर्मों से पुरुषोत्तम बना सकता है। उन्होंने शिव परमात्मा के यथार्थ स्वरूप का वर्णन करते हुए बताया कि परमात्मा एक निराकार ज्योतिर्बिंदु, शांति और प्रेम के सागर हैं, जिनकी स्मृति से आत्मा को शक्ति, शांति और आनंद की प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि राजयोग मेडिटेशन व्यक्ति को न केवल मानसिक तनाव और नकारात्मकता से मुक्त करता है, बल्कि नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से भी दूर रहने की शक्ति प्रदान करता है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने नशा-मुक्त एवं मूल्यनिष्ठ जीवन जीने का संकल्प लिया।
इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में क्षेत्र के वरिष्ठ समाजसेवी पुरुषोत्तम भाई विशेष रूप से उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम की व्यवस्थाओं एवं सेवाओं में सक्रिय योगदान दिया। उनके सहयोग एवं प्रेरणा से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
देवतालाब सहित आसपास के अनेक गांवों, कस्बों एवं दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में पहुंचे। दिनभर मंदिर परिसर में आध्यात्मिक उत्साह, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बना रहा। राजयोग मेडिटेशन के अभ्यास, आध्यात्मिक प्रवचनों एवं जीवन मूल्यों पर आधारित संदेशों ने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि पुरुषोत्तम मास का वास्तविक उद्देश्य केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति, चरित्र निर्माण और समाज में प्रेम, शांति तथा सद्भावना का प्रसार करना है। इस अवसर पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने अपने जीवन में आध्यात्मिकता को अपनाकर एक श्रेष्ठ, नशा-मुक्त और संस्कारवान समाज के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।







