योग भारत की अमूल्य धरोहर, इसे जन-जन तक पहुँचाना हमारा दायित्व – वासुदेव देवनानी
भारत की संस्कृती अमिट है तथा भारत की विरासत का उन्नत हिस्सा योग है– डॉ. सतीश पूनियां
स्वस्थ शरीर और सशक्त मन ही विकसित राष्ट्र की नींव हैं – राज्यवर्धन सिंह राठौड़
योग केवल रोगमुक्ति नहीं, उत्कृष्ट जीवन जीने की कला है – गोपाल शर्मा
हर घर में योग और ध्यान पहुंचे, तभी बनेगा स्वस्थ समाज – सौम्या गुर्जर
विश्व शांति का मार्ग व्यक्ति की आंतरिक शांति से होकर जाता है – बीके सुषमा दीदी
जयपुर, राजस्थान। “आध्यात्मिक जागृति द्वारा विश्व नवसृजन” विषय पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, वैशाली नगर, जयपुर द्वारा चित्रकूट स्टेडियम में विशाल योग एवं राजयोग ध्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के प्रबुद्ध जनो ने बड़ी संख्या में नागरिकों, युवाओं, महिलाओं एवं वरिष्ठजनों के साथ भाग लेकर योग, ध्यान एवं आध्यात्मिकता को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

प्रातः 6 बजे चित्रकूट स्टेडियम में आयोजित हुए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि भारत की प्राचीन योग परंपरा आज संपूर्ण विश्व को स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखा रही है। योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है और प्रत्येक नागरिक को इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति को अनुशासन, संयम और सकारात्मक सोच प्रदान करता है।
राज्यसभा सांसद एवं पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने अपने उद्बोधन में कहा कि योग भारत की वह आध्यात्मिक देन है जिसने विश्व को स्वास्थ्य और शांति का संदेश दिया है। भारत की शक्ति, उर्जा और विरासत को दुनिया ने योग के रूप में स्वीकार किया है। आज योग केवल भारत तक सीमित नहीं है बल्कि वैश्विक जनआंदोलन बन चुका है। उन्होंने युवाओं से नियमित योग और ध्यान अपनाने का आह्वान किया।
सांसद एवं राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि स्वस्थ शरीर और मजबूत मन ही राष्ट्र निर्माण का आधार हैं। योग व्यक्ति की कार्यक्षमता, आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता को बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि योग जीवन को संतुलित और सफल बनाने का सबसे सरल एवं प्रभावी माध्यम है।
सिविल लाइंस विधायक श्री गोपाल शर्मा ने कहा कि योग भारतीय जीवन दर्शन का अभिन्न अंग है। योग केवल रोगों से बचाने का उपाय नहीं, बल्कि जीवन को उत्कृष्ट बनाने की कला है। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारीज द्वारा समाज में आध्यात्मिक जागरण एवं नैतिक मूल्यों के लिए किया जा रहा कार्य अत्यंत सराहनीय है।
पूर्व महापौर श्रीमती सौम्या गुर्जर ने कहा कि महिलाओं, युवाओं और बच्चों में योग एवं ध्यान के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। योग से परिवार, समाज और राष्ट्र तीनों को शक्ति मिलती है तथा सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है।
यादव महासभा के अध्यक्ष श्री महेंद्र यादव ने भी सभा को संबोधित किया |
कार्यक्रम में उपस्थित राजयोगिनी बीके सुषमा दीदी, क्षेत्रीय संचालिका, ब्रह्माकुमारीज राजस्थान ने कहा कि योग का वास्तविक स्वरूप आत्मा और परमात्मा के मिलन में निहित है। राजयोग ध्यान व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्तियों का अनुभव कराता है तथा जीवन में शांति, प्रेम, आनंद और आत्मविश्वास का संचार करता है। उन्होंने कहा कि विश्व शांति का मार्ग व्यक्ति की आंतरिक शांति से होकर जाता है।
वक्ताओं ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया, जिसके बाद योग विश्वव्यापी जनआंदोलन बन गया। साथ ही योगगुरु स्वामी रामदेव के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उन्होंने योग को घर-घर तक पहुंचाकर करोड़ों लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में दिल्ली से पधारे योगाचार्य श्री दिनेश भाई जी ने उपस्थित जनसमूह को विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं सूक्ष्म व्यायामों का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक रूप से सशक्त बनाता है। योग केवल रोगों से मुक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक जीवन जीने की कला है।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी राजयोगिनी बीके चंद्रकला दीदी ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज संस्था पिछले कई दशकों से योग, राजयोग ध्यान, नैतिक मूल्यों एवं आध्यात्मिक जीवनशैली के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन का कार्य कर रही है। आज विश्व में तनाव, अवसाद और अशांति की बढ़ती चुनौतियों के बीच राजयोग ध्यान आत्मिक शक्ति और आंतरिक शांति प्राप्त करने का सर्वोत्तम माध्यम बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ बनाने का साधन नहीं, बल्कि तन, मन और आत्मा के समग्र विकास की जीवन पद्धति है। योग के माध्यम से व्यक्ति स्वयं को स्वस्थ, संतुलित एवं ऊर्जावान बना सकता है।
कार्यक्रम में योग प्रशिक्षकों द्वारा विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया गया तथा अष्टांग योग के सिद्धांतों—यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान एवं समाधि—के महत्व पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि अष्टांग योग व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास का संपूर्ण विज्ञान है।
राजयोग ध्यान सत्र के दौरान उपस्थित जनसमूह ने गहन शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि नियमित योग, प्राणायाम एवं ध्यान के अभ्यास से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि मन शांत, बुद्धि एकाग्र और आत्मा शक्तिशाली बनती है।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों का सम्मान किया गया तथा स्वस्थ, नशामुक्त, तनावमुक्त एवं मूल्यनिष्ठ समाज के निर्माण का संकल्प दिलाया गया।
कार्यक्रम में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी, राज्यसभा सांसद डॉ. सतीश पूनियां, सांसद एवं कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, सिविल लाइंस विधायक श्री गोपाल शर्मा, पूर्व महापौर श्रीमती सौम्या गुर्जर, यादव महासभा के अध्यक्ष श्री महेंद्र यादव तथा ब्रह्माकुमारीज राजस्थान की क्षेत्रीय संचालिका राजयोगिनी बीके सुषमा दीदी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।












