शिवशक्ति लीडरशिप अप्रोच SSLA – भारत क्षेत्र का अनुभवात्मक रचनात्मक कार्यशाला –
शहादा महाराष्ट्र। ब्रह्माकुमारी शहादा सेवाकेंद्र की संचालिका राजयोगिनी विद्या दीदीजी ने सभी का पुष्पों द्वारा स्वागत किया और ब्रह्मा कुमारीज़ मुख्यालय, की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका डॉ. सुनीता दीदी (फोकल प्वाइंट मेम्बर भारत एवं नेपाल SSLA ) तथा उपरोक्त गणमान्य महिलाओं द्वारा अनोखा दीप प्रज्वलन किया गया।
जिसमें उपस्थित थे निम्नलिखित प्रतिष्ठित महिलायें : माधवी ताई मकरंद पाटील- उपनगराध्यक्ष ,कांताबेन काशीनाथ पाटील-पूर्व नगराध्यक्ष ,वर्षा ताई जाधव – महिला सोनामई शिक्षण संस्था महाविद्यालय सचिव, शहादा ,संगिता पाटील- मा,अध्यक्षा जायन्टस फेडरेशन 2A,पूजा सोनार- कवयित्री , भावना ताई-नगर सेविका , लता ताई-नगर सेविका ,संगीता मैडम पटेल- जायंट के चीफ, एडवोकेट, सोशल वर्कर , मेघा खारकर- तालुका सुपरवाइजर और उनके अन्य मेंबर्स ।
आदरणीय राजयोगिनी बी. के. सुदेश दीदी जी के विडीओ द्वारा सभी विषय की गहरायी से लाभान्वित हुए। दीदी जी ने शह और मोह में अंतर बताते हुए, स्नेह की शक्ति का महत्व बताया। उन्होंने जल का उद्धारण देते हुए कहा कि जहां स्वच्छ जल मैले कपड़े धुलाई करते हैं वहाँ कीचड़ स्वच्छ कपड़ों को मैला कर देता है । स्नेह स्वच्छ जल की तरह है और मोह कीचड़ की तरह है जिसमें धँस जाते हैं , पर्वश हो जाते हैं ।

बी.के. डॉ. सुनीता दीदी ने “सदा स्नेही शिव शक्ति बनकर रहेगे चाहे कुछ भी हो जाए” के विषय पर सभी उपस्थित महिलाओं को प्रत्येक के व्यक्तिगत घटना की स्मृति दिलाते हुए, उसमें सभी को निस्वार्थ मातृ स्नेह से आपसी प्रेम और विश्वास को विकसित करते हुए स्वयं को सशक्त करने का एहसास कराते हुए, उस पर गहन ध्यान के माध्यम से अनुभूति कराई।

माधवी ताई मकरंद पाटील – उपनगराध्यक्ष ने अपना अनुभव सुनाते हुए कहा कि इस कार्यशाला में जो प्रयोग किया गया उसका परिणाम उन्हें तुरंत मिल गया। उनकी माताजी जो उनसे बात नहीं कर रहे थे काफ़ी समय से, उन्होंने उन पर स्नेही शिवशक्ति होने का प्रयोग किया था और उन्ही का कॉल उस वक़्त उनको आया। ऐसे अनुभवात्मक कार्यक्रम बारम्बार होने चाहिए और पूरे दिन का रखा जाए- यह सभी के दिल की आवाज़ थी।
कार्यशाला में रोप एक्टिविटी के माध्यम से इन्हीं अनुभूतियों का आपसी आदान-प्रदान हुआ, जिससे कार्यशाला अत्यंत प्रभावशाली रही।
सभी उपस्थित महिलाओं ने गोलाकार में बैठकर अपने जीवन की सच्ची घटनाओं को साझा किया — कि कैसे विपरीत परिस्थिति में उन्हें ग़ुस्सा आया था, खुद को सही मानते थे और बदला लेने की भावना आती थी, लेकिन जब कार्यशाला के दौरान वो स्नेही शिवशक्ति का स्वरूप बने तब उनके भीतर सामने वाले को माफ़ करने की शक्ति, दूसरे के विचारों को भी उनके अनुसार सही समझ कर उसे स्वीकार करने की शक्ति और शांति ही शक्ति है, उसकी सुंदेर अनुभूति हुई।
अंत में, सभी महिलाओं को राजयोगिनी बी.के. डॉ. सुनीता दीदीजी, विद्या दीदी द्वारा परमात्मा का शिवशक्ति के स्वमान की पुस्तिका, गाड्ली गिफ़्ट और प्रसाद दिया गया। गणेश भाई प्रोफेसर एवं ग्रुप ने डॉ. सुनीता दीदी का सम्मान किया। ब्रह्मा कुमारी मोना दीदी ने सुचारू रूप से मंच संचालन किया ।
फ़ोटोज़ विडीओ की लिंक*: https://drive.google.com/drive/folders/1QHiqUFEyTOlXMYyyviA9qW_DbkdQ1RVb?usp=sharing







