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माउंट आबू:  ब्रह्माकुमारीज़ के समाज सेवा प्रभाग का ‘विश्व बंधुत्व रक्तदान महाभियान’ बना जनसेवा की प्रेरक मिसाल

रक्त की एक बूंद, मानवता की एक पहचान

ब्रह्माकुमारीज़ के समाज सेवा प्रभाग का ‘विश्व बंधुत्व रक्तदान महाभियान’ बना जनसेवा की प्रेरक मिसाल

भारत एवं नेपाल में 1,100 से अधिक रक्तदान शिविर, 65,000 से अधिक यूनिट रक्त संग्रह; नेपाल में 8,694 यूनिट रक्तदान

माउंट आबू,राजस्थान। मानवता की सेवा, विश्व बंधुत्व और निःस्वार्थ सहयोग की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के समाज सेवा प्रभाग द्वारा आयोजित ‘विश्व बंधुत्व रक्तदान महाभियान 2026’ ने देशभर में सेवा और सामाजिक सहभागिता की एक प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है।

21 से 25 अगस्त 2026 तक चले इस राष्ट्रव्यापी महाअभियान के अंतर्गत भारत और नेपाल में 1,100 से अधिक रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक 65,000 से अधिक यूनिट रक्त एकत्रित किया जा चुका है। नेपाल में ही 8,694 यूनिट रक्त का संग्रह हुआ है। वहीं, अनेक शिविरों की अंतिम रिपोर्ट अभी प्राप्त होना शेष है, इसलिए अभियान का अंतिम आंकड़ा इससे और अधिक होने की संभावना है।

यह महाभियान विश्व बंधुत्व, मानवता और निःस्वार्थ सेवा की भावना को समर्पित रहा। अभियान का संदेश रहा—

“एक रक्त • एक मानवता • एक विश्व परिवार”

दादी प्रकाशमणि जी की पुण्य स्मृति को समर्पित सेवा

यह महाभियान राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी की पुण्य स्मृति को समर्पित है। दादी प्रकाशमणि जी ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका थीं और उन्होंने अपने जीवन में विश्व बंधुत्व, प्रेम, करुणा, निःस्वार्थ सेवा तथा आध्यात्मिक जागृति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन इस भावना का प्रतीक रहा कि मानव मात्र एक परिवार है और समाज के प्रत्येक व्यक्ति के सुख-दुःख में सहभागी बनना ही सच्ची सेवा है। दादी प्रकाशमणि जी के इसी मानवतावादी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए समाज सेवा प्रभाग द्वारा रक्तदान जैसे जीवनदायी सेवा कार्य को व्यापक जन-अभियान का स्वरूप दिया गया।

रक्तदान महाभियान के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि रक्त का संबंध किसी जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र से नहीं होता—रक्त केवल जीवन बचाता है और मानवता को जोड़ता है।

2025 में बना था 88,378 यूनिट रक्तदान का उल्लेखनीय रिकॉर्ड

समाज सेवा प्रभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान की सफलता की यात्रा पिछले वर्ष भी उल्लेखनीय रही थी। 21 से 25 अगस्त 2025 तक आयोजित विश्व बंधुत्व रक्तदान महाभियान में भारत एवं नेपाल में कुल 88,378 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया था। इस व्यापक जनसेवा अभियान को उसके उल्लेखनीय रक्तदान योगदान के लिए OMG Book of Records द्वारा भी मान्यता प्रदान की गई थी। पिछले वर्ष की इस उपलब्धि ने इस वर्ष के अभियान के लिए और अधिक उत्साह एवं प्रेरणा प्रदान की। 2025 की सफलता के बाद 2026 में भी समाज सेवा प्रभाग ने रक्तदान को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाते हुए देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ नेपाल में भी बड़े स्तर पर शिविर आयोजित किए।

देशभर में व्यापक जनभागीदारी

महाअभियान के दौरान देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ब्रह्माकुमारीज़ के भाई-बहनें, युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, चिकित्सा संस्थानों, ब्लड बैंकों, स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने सक्रिय सहभागिता की। अनेक स्थानों पर युवाओं ने पहली बार रक्तदान करते हुए अभियान में भाग लिया। खासकर बहनों ने भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, तथा कई लोगों की इस भ्रान्ति को दूर किया कि महिलाएं रक्तदान नहीं कर सकती। इससे न केवल रक्त की उपलब्धता बढ़ाने में सहयोग मिला, बल्कि युवा पीढ़ी में सामाजिक उत्तरदायित्व और निःस्वार्थ सेवा की भावना को भी प्रोत्साहन मिला। कई शिविरों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने उपस्थित होकर रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया और ब्रह्माकुमारीज़ के इस सेवा प्रयास की सराहना की।

भारत में सर्वाधिक रक्त संग्रह करने वाले प्रमुख 10 राज्य

अब तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत में रक्त संग्रह के आधार पर प्रमुख राज्यों का योगदान इस प्रकार रहा—

क्रमराज्यएकत्रित रक्त
1महाराष्ट्र5,850 यूनिट
2राजस्थान4,458 यूनिट
3हरियाणा3,974 यूनिट
4कर्नाटक2,957 यूनिट
5गुजरात2,929 यूनिट
6छत्तीसगढ़2,809 यूनिट
7मध्य प्रदेश2,691 यूनिट
8दिल्ली2,492 यूनिट
9उत्तर प्रदेश1,929 यूनिट
10पंजाब1,742 यूनिट

इनके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, झारखंड, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, केरल, सिक्किम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, नागालैंड सहित अनेक क्षेत्रों से भी रक्तदाताओं ने अभियान में सहभागिता की।

महत्वपूर्ण: ये आंकड़े अभी तक प्राप्त रिपोर्टों पर आधारित हैं। कई रक्तदान शिविरों की अंतिम रिपोर्ट एवं रक्त संग्रह के आंकड़े अभी प्राप्त होना बाकी हैं, इसलिए अंतिम राष्ट्रीय आंकड़े में वृद्धि होने की संभावना है।

नेपाल में भी सेवा का व्यापक विस्तार

विश्व बंधुत्व की भावना को सीमाओं से परे ले जाते हुए नेपाल में भी इस महाभियान को व्यापक जनसहयोग मिला। नेपाल में आयोजित रक्तदान शिविरों के माध्यम से अब तक 8,694 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया है। भारत और नेपाल में एक साथ आयोजित इन रक्तदान शिविरों ने यह संदेश दिया कि मानवता की सेवा किसी सीमा में बंधी नहीं है। दोनों देशों के रक्तदाताओं ने अपने रक्त के माध्यम से विश्व बंधुत्व और मानवीय एकता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया।

गूगल मैप के माध्यम से रक्तदान शिविरों की मॉनिटरिंग

इस वर्ष अभियान के संचालन एवं निगरानी में आधुनिक तकनीक का भी प्रभावी उपयोग किया गया। देशभर में आयोजित रक्तदान शिविरों की Google Maps आधारित लोकेशन मॉनिटरिंग की गई, जिससे विभिन्न स्थानों पर आयोजित शिविरों की स्थिति और भौगोलिक पहुंच को व्यवस्थित रूप से देखा जा सका। इस तकनीकी व्यवस्था ने राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे अभियान के समन्वय, शिविरों की लोकेशन की निगरानी तथा विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त जानकारी को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

इस प्रकार आध्यात्मिक सेवा भावना और आधुनिक तकनीक का समन्वय इस वर्ष के महाभियान की एक विशेष उपलब्धि रहा।

“ज्ञान पान • योग ध्यान • रक्तदान” से जुड़ा सेवा संदेश

समाज सेवा प्रभाग द्वारा रक्तदान को केवल एक चिकित्सा आवश्यकता के रूप में नहीं, बल्कि निःस्वार्थ सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत किया गया।

अभियान के दौरान—

ज्ञान पान • योग ध्यान • रक्तदान

के संदेश के माध्यम से लोगों को सकारात्मक जीवनशैली, आध्यात्मिक जागरूकता, राजयोग ध्यान तथा समाज के लिए उपयोगी सेवा कार्यों से जुड़ने की प्रेरणा दी गई।

ब्रह्माकुमारीज़ का मानना है कि आंतरिक शांति और आध्यात्मिक जागृति के साथ जब व्यक्ति समाज के लिए कुछ करने का संकल्प लेता है, तो सेवा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

एक अभियान, हजारों जीवनों से जुड़ी उम्मीद

रक्तदान महाभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल एकत्रित की गई रक्त इकाइयों की संख्या नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से पैदा हुई मानवता और सहयोग की भावना है। एक रक्तदाता का दिया हुआ रक्त किसी दुर्घटना के शिकार व्यक्ति, किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज, किसी गर्भवती महिला अथवा किसी अन्य जरूरतमंद के जीवन को बचाने में सहायक हो सकता है। इसी भावना को केंद्र में रखते हुए अभियान ने लोगों से आह्वान किया कि स्वस्थ व्यक्ति नियमित रूप से रक्तदान को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा बनाए।

सेवा की यह यात्रा आगे भी जारी रहेगी

समाज सेवा प्रभाग का यह प्रयास रक्तदान तक सीमित नहीं है। संस्था द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों के लिए स्वास्थ्य कैंप, वरिष्ठ नागरिकों के लिए संगम- गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन, स्वर्णिम समाज के लिए ईश्वरीय योजना, डिजिटल डी-एडिक्शन, मानसिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक जागरूकता से जुड़े अनेक सेवा कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। विश्व बंधुत्व रक्तदान महाभियान 2026 ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि जब समाज के विभिन्न वर्ग एक उद्देश्य के लिए एकजुट होते हैं, तो सेवा एक अभियान से बढ़कर जन-आंदोलन का रूप ले सकती है।

65,000 से अधिक यूनिट रक्त, 1,100 से अधिक शिविर, भारत और नेपाल में हजारों रक्तदाता तथा अभी भी प्राप्त होना बाकी रिपोर्टें—यह महाभियान मानवता की उस शक्ति का प्रतीक है, जो सीमाओं से ऊपर उठकर केवल एक पहचान को स्वीकार करती है: “हम सब एक विश्व परिवार हैं।”

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