मुख पृष्ठआजादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओरमहान संत, साधक और राजयोगियों का हुआ सम्मान

महान संत, साधक और राजयोगियों का हुआ सम्मान

महाशिवरात्रि पर सात दिवसीय आयोजन के प्रथम दिन ‘दिव्य सम्मेलन

सीतापुर-उ.प्र.। महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित दिव्य सम्मेलन में विश्व पिता परमात्मा शिव के ध्वज के नीचे एकत्रित हुए नैमिषारण्य के साथ माउण्ट आबू और काशी जैसी तपोस्थली से आए हुए महान संत, साधक और राजयोगी।
इस मौके पर वाराणसी से आईं ब्रह्माकुमारीज़ की क्षेत्रीय निदेशिका राजयोगिनी ब्र.कु. सुरेन्द्र दीदी ने कहा कि महाशिवरात्रि पर्व परमात्मा शिव के दिव्य अवतरण का यादगार है। वर्तमान समय परमात्मा शिव मानव मात्र के कल्याणार्थ अवतरित होकर जग परिवर्तन का दिव्य कर्तव्य कर रहे हैं। हमें धरती पर आए परमात्मा को यथार्थ पहचानकर उनसे अपना दैवी स्वराज्य प्राप्त करना है।
नैमिषारण्य स्थित नारदानंद मठ के महंत जगदाचार्य स्वामी देवेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों की कमी वश दुनिया दिग्भ्रमित है। ऐसे में ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा आध्यात्मिक चेतना जगाने के लिए वैश्विक रूप में किया जा रहा प्रयास अति सराहनीय है।
माउण्ट आबू से आए वरिष्ठ राजयोगी ब्र.कु. रामनाथ भाई ने परमात्मा शिव को सर्व का आराध्य बताते हुए कहा कि उनका सानिध्य मानव को आंतरिक दिव्य ऊर्जा और मूल्यों से परिपूर्ण कर देता है। ब्रह्माकुमारीज़ वाराणसी के क्षेत्रीय प्रबंधक राजयोगी ब्र.कु. दीपेन्द्र भाई ने उपस्थित संतों से स्वर्णिम विश्व की स्थापना में साथ मिलकर कदम बढ़ाने की अपील की। राजयोग शिक्षिका ब्र.कु. तापोषी बहन ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
स्थानीय सेवाकेन्द्र संचालिका ब्र.कु. योगेश्वरी दीदी ने कहा कि वर्तमान समय परमात्मा का दिव्य कर्तव्य चल रहा है जिसमें सहभागी बनकर हम जन्म-जन्मांतर के लिए पुण्य के भागी बन सकते हैं। समारोह में चौरासी कोसी परिक्रमा के सचिव संतोष दास जी महाराज, पहला आश्रम नैमिषारण्य के श्री श्री 108 रामचरन त्यागी जी महाराज, महंत अंजनी दास, मुल्लाभीरी आश्रम के श्री विमल मिश्र, प्रांत प्रमुख,आरएसएस आदि ने एक मंच पर उपस्थित होकर आध्यात्मिक एकता और सद्भाव का संदेश दिया।

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