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इंदौर: अध्यात्म द्वारा सनातन संस्कृति की स्थापना विषय पर  संत सम्मेलन का आयोजन किया गया

प्रेम के उदय होते ही क्रोध गायब हो जाता है                  

अध्यात्म द्वारा सनातन संस्कृति की स्थापना

इंदौर, मध्य प्रदेश। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विद्यालय के क्षेत्रीय कार्यालय ,ओम शांति भवन, न्यू पलासिया में अध्यात्म द्वारा सनातन संस्कृति की स्थापना विषय पर  संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। माननीय संत अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया इसके पश्चात संतो का स्वागत  अतिरिक्त जिला न्यायाधीश विनोद शर्मा ने किया । ब्रह्माकुमारीज धार्मिक विभाग के जोनल कोऑर्डिनेटर ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने कहा कि संस्कृति मतलब  जो देवी सभ्यता भारत की पुरानी थी उसको वापस पुनर्स्थापना करना आज संत सम्मेलन की बहुत आवश्यकता है जब सूर्योदय होता है तो प्रकाश होता है और धूप से विषाणु नष्ट होते हैं उसी प्रकार जब आध्यात्मिक चेतना का सूर्य उदय होता हे तो  जीवन की बुराई नष्ट होती है और  माननीय मूल्य स्थापित होते हैं जो समाज में बहुत जरूरी है , एक दूसरे को सहयोग देने से ,स्नेह ,प्यार बढ़ता हे । जैसे हमारे  संकल्प होते हैं वैसी सृष्टि होती है , वर्तमान में  विकृतियों के कारण मनुष्य का आत्मा विवेक शून्य हो चुका हैं  इन विकृतियों को दूर करने के लिए  हमें अध्यात्म की ज्योत जगाना बहुत जरूरी है।दिव्य शक्ति अखाड़ा सहारनपुर के महामंडलेश्वर कमल किशोर महाराज जी ने कहा कि प्रेम के उदय होते ही क्रोध गायब हो जाता है दुख का कारण क्रोध है क्रोध के कारण पूरी दुनिया अशांत है राजयोग के द्वारा मन के विचारों पर नियंत्रण कर सकते हैं तो हम अपनी इंद्रियों के ऊपर कंट्रोल कर सकते हैं जिस प्रकार एक कमरे में अंधेरा होता है उसे हम लाठी या डंडे से बाहर नहीं कर सकते हैं केवल एक दिया जलाएंगे उसके प्रकाश से ही  अंधेरे को बाहर करते हैं,  उसी प्रकार क्रोध को जीतना है तो हम आपस में प्रेम भाईचारा और मानवीय मूल्य का अपने अंदर सृजन करें ।  आगे आपने कहा कि केलिफोर्निया के वैज्ञानिक  ने 1978 में एक प्रयोग किया था भारत की राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी जानकी दादी जी पर इसमें उनके ऊपर विभिन्न प्रकार की मशीन लगाई गई थी ताकि उनके मन की स्थिति एवं विचारों की संख्या जान सके  उनके ऊपर यह टेस्ट किए थे और उसके बाद उनकी मन स्थिति के लिए वैज्ञानिक ने यह कहा था कि वह दुनिया की सबसे मोस्ट स्टेबल माईडं वाली महिला हैं, जिसके  मन में एक भी विचार नहीं चल रहे थे, और यह सब उन्होंने राजयोग के अभ्यास से प्राप्त किया था । इंदौर जोन की जोनल इंचार्ज ब्रह्माकुमारी आरती दीदी ने अध्यक्षीय संबोधन में बोला कि  तपस्वी मूर्त आत्मा ही संत कहलाती है और उनके प्रयासों से संसार खुशनुमा हो जाता है । विश्व का परिवर्तन निश्चित रूप से  प्राकृतिक आपदाओं एटॉमिक एनर्जी के द्वारा होने वाला हे  लेकिन यह विनाश नहीं परिवर्तन है , आने वाली आदि सनातन देवी देवता धर्म की संस्कृति जहां भारत सोने की चिड़िया कहलाता था जिसे हम स्वर्ग कहते हैं । जहां हर व्यक्ति सुखी था। आपने कहा कि परमात्मा का इस सृष्टि पर अवतरण हो चुका है और वह हमें  आध्यात्मिक शिक्षा के द्वारा नैतिक मूल्यों की धारणा हमारे जीवन में करा के श्रेष्ठ जीवन बना रहे हैं । जस्टिस  बी डी राठी जी ने कहा कि जिस घर में वार्तालाप नहीं होता है वहां गलतफहमी पैदा होती है और गलतफहमी के कारण हमारे बीच झगड़ा उत्पन्न होता हैं । भारत की प्राचीन संस्कृति में सुख: शांति थी वह देवी सभ्यता कहलाती थी । जिस प्रकार रेडियो आकाशवाणी में हम फ्रीक्वेंसी सेट करते हैं तो विविध भारती आता है यदि ठीक से सेट नहीं होगा तो कर्कश की आवाज आती है, ठीक इस प्रकार जब हमारे मन की फ्रिक्वेंसी ठीक रहती हे श्रेष्ठ विचार होते हे तो हम  परमात्मा से बातें कर सकते हे  जब आत्मा के ऊपर जो विकारों की धूल जमी है  हम उसे अलग करेंगे ध्यान योग के माध्यम से तो परमपिता परमात्मा की शक्ति सें संबंध जोड़कर  हमारी आत्मा की आंतरिक शक्ति जागृत होगी ।भारत की प्राचीन सभ्यता सिंधु घाटी की सभ्यता मोहनजोदड़ो की सभ्यता प्रसिद्ध है लेकिन आदि सनातन देवी  देवता धर्म की सत्यता की सभ्यता  सबसे पुरानी है जो आदि और अविनाशी है। एक तू ही जय गुरुदेव आश्रम के स्वामी श्री अरूणानंद जी महाराज ने कहा कि जब से सृष्टि का निर्माण हुआ है तब से सनातन धर्म है हम सब सनातनी हैं और एक पिता के बच्चे हैं । हम वृक्ष से पत्ती तोड़ते हैं तो हम वृक्ष से कोई अनुमति नहीं लेते हैं हम पत्थर को भी उठाते हैं तो शिव का रूप बन जाता है क्योंकि हमारे  विश्वास के कारण  उस पत्थर में भी हमें ईश्वर दिखाई देता हे ,परमात्मा दिखता नहीं है लेकिन उसे महसूस किया जा सकता , सत्य को समझना जरूरी है दया और प्रेम भारत की संस्कृति का मूल मंत्र है।  सनातन धर्म यह सिखलाता है कि हम पशु पक्षी से भी प्रेम करें गाय को माता कहते हैं वृक्षों में भी ईश्वर का निवास समझकर हम पूजते हैं ।कबीर आश्रम ,उज्जैन की  महामंडलेश्वर माया देवी जी ने कहा कि अंतर्मुख हो जाना ,धार्मिकता  दिखाना एक अलग बात है,  लेकिन दया ही धर्म का मूल है इसे स्वीकार करना है दूसरों का दुख: देख हमारे मन में दया उत्पन्न होना चाहिए  वही सच्चा सनातनी कहलाता है और भारत की यही प्राचीन संस्कृति है। ओम के उच्चारण से आध्यात्म का उदय होता है ।आदरणीय राम शंकर जी महाराज ने कहा कि आत्मा अमर है इसकी मृत्यु नहीं होती शरीर का विनाश होता है। आत्मा परमात्मा का अंश है  इसलिए हम किसी को कष्ट ना पहुंचाएं अच्छे कर्म करें किसी का भला कर सकते तो जरूर करें लेकिन किसी का भला नहीं कर सकते तो बुरा भी मत करो, सनातन धर्म यही सिखलाता है। महामंडलेश्वर साध्वी निर्मला जी ने कहा कि आध्यात्म और सनातन के बिना कुछ नहीं हो सकता । हम सभी डॉक्टर के बाद भगवान पर ही भरोसा करते हैं डॉक्टर भी कहता है कि अब आगे तो ऊपर वाला चाहे उसकी दुआओं से ही रोगी ठीक हो सकता है। 

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