अबोहर,पंजाब: ब्रह्माकुमारीज सेवा केंद्र के राजयोग भवन में आज प्रात: नववर्ष के शुभागमन पर अध्यात्मिकता से परिपूर्ण कार्यक्रम में लोग बड़ी संख्या में उमड़ पड़े। कार्यक्रम की शुरूआत ब्रह्माकुमारीज सेवा केंद्र की प्रभारी पुष्पलता बहन ने मुरली से की।
वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका सुनीता बहन ने नववर्ष के महत्व और राजयोग भवन के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बहुत बड़ा स्वपन आज इस भवन के 42वें स्थापना दिवस पर साकार हुआ है।
मुख्यातिथि नगर निगम के मेयर विमल ठठई ने कहा कि लोग भौतिक खुशियां प्राप्त करने के लिए नववर्ष की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम आयोजित करने पर लाखों रूपये खर्च कर देते हैं लेकिन आज राजयोग भवन में आयोजित नववर्ष अभिनंदन कार्यक्रम की साख ही निराली है। हमें यहां से संदेश मिलता है कि हर प्रकार के विकार, कलह, द्वेष त्याग कर स्व: परिवर्तन से विश्व परिवर्तन का यूएनओ द्वारा दिया गया लक्ष्य प्राप्त करने में जुट जाएं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लेखक परिषद प्रधान राज सदोष ने ब्रह्माकुमारीज के संस्थापक दादा लेखराज अर्थात ब्रह्मा बाबा का संदेश सुनाते हुए कहा कि कारण को विकारण और समस्या को समाधान में बदलना है यह तभी संभव है यदि हम हमारी सभ्यता संस्कृति के परिवेश में रहते हुए सकारात्मक विचारधारा को विकसित करें।
कार्यक्रम की शुरूआत गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलित करके और केक काटकर की गई।इसमें उपकेंद्र संचालिका दर्शना बहन व शालू बहन तथा बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान रमेश कुमार शर्मा व डॉ. संजय गुप्ता भी शामिल हुए।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरूआत महक ने संगीतमय व्यायाम से करवाई। सायरा ने -शिव बाबा की हो गई मैं नृत्य प्रस्तुत किया। गुरूण ने जब – खुशियां दा हाल वेखो चारों पासे छा गया- पर नृत्य प्रस्तुत किया तो पूरा हाल तालियों से गंूज उठा। पीहू ने नृत्य गीत द्वारा कामना की कि सब एक हों सब नेक हो। दृष्टि ने बीती बातें छोड़कर नया अध्याय शुरू करने की प्रेरणा दी। छवि ने -आज आनंद का दिन आ गया- और महक ने भोले बाबा तेरी क्या बात है गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी अतिथियों को उपहार व प्रसाद वितरित किया गया।





