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अलीराजपुर: 18 जनवरी ब्रह्माकुमारी में विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया गया

अलीराजपुर, मध्य प्रदेश। इस संसार रूपी नाटक में समय प्रति समय ऐसी शक्तियां अवतरित होती है जो इतिहास बदल देती है ।वर्तमान कलियुग का समय चल रहा है इसके बाद सतयुग आता है लेकिन इसके निमित्त ऐसी आत्मा बनती है जिसे हम पिताश्री ब्रह्मा बाबा कहते हैं। जिसका शास्त्रों में भी भागीरथ के रूप में गायन है। पिता श्री ब्रह्मा बाबा के पूर्व का नाम दादा लेखराज था ।सन 1936 में परमात्मा शिव ने ऐसा अद्भुत, विश्वसनीय उनके तन का आधार लेकर ब्रह्माकुमारी संस्था की नींव रखी। उस समय 380 के करीब भाई बहन थे। उस समय का समाज कई कुप्रथाएं प्रचलित थी, नारी नरक का द्वार,नारी को अबला समझा जाता था। नारी शक्ति को आगे बढ़ाने के लिए परमात्मा ने विश्व कल्याण का कार्य इनके जिम्मे रखा। तब से यह संस्था 90 वर्षों में एक विशाल वट वृक्ष की भाती पूरे पांचो महा खंड में 8000 सेवा केंद्र के माध्यम से विश्व शांति, विश्व एकता और विश्व भाईचारे का संदेश दे रही है। 18 जनवरी पिताश्री ब्रह्मा बाबा ने भौतिक शरीर का त्याग किया ।यह दिन विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के विशेषज्ञ ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने पिता श्री ब्रह्मा बाबा की 57वीं पुण्यतिथि के अवसर दीपा की चौकी पर स्थित ब्रह्माकुमारी सभागृह में नगर वासियों को संबोधित करते हुए बताया। इस अवसर पर माननीय नागर सिंह चौहान, कैबिनेट मंत्री आदिवासी जनजाति कल्याण मंत्री, मध्य प्रदेश ने बताया की ब्रह्मा बाबा का जीवन त्याग तपस्या से भरपूर था। उन्होंने अपनी कठिन तपस्या करके मानव मात्र को एक सही दिशा दिखाने का ऐतिहासिक कार्य किया जिसे आज संपूर्ण विश्व शांति दिवस के रूप में मना रहा है। आज विज्ञान ने प्रगति कर ली है लेकिन इलेक्ट्रॉनिक साधनों का दुरुपयोग करने के कारण आज का मानव अनेक व्यसन ,कुरीतियां व गंदगी का शिकार हो रहा है। आज की युवा पीढ़ी में नैतिकता खत्म होती जा रही है।ऐसे में यह संस्थान भागीरथ का कार्य कर रही है। अपना जीवन पवित्र बनाकर औरों को भी श्रेष्ठ जीवन बनाने की प्रेरणा दे रही है। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी माधुरी बहन सेवा केंद्र संचालिका ने बताया की 18 जनवरी आज के दिन पिताश्री ब्रह्मा बाबा ने भौतिक देह का त्याग कर अपनी संपूर्णता को प्राप्त किया ।वर्तमान समय अभी भी सूक्ष्म रूप से मनुष्य आत्माओं को परमात्मा प्राप्ति की राह बता रहे हैं। वर्तमान समय 60,000 से भी अधिक समर्पित ब्रह्मकुमारी बहनों के द्वारा विश्व शांति का कार्य सतत रूप से चल रहा है जो आजीवन ब्रह्मचर्य , सात्विक भोजन , मेडिटेशन के अभ्यास द्वारा अपने जीवन को संपूर्ण पवित्र बनाकर अनेक नर नारियों को घर परिवार में रहते हुए उनको पवित्र बनाने का संदेश दे रही है। आज प्रातः 2:00 बजे से ही ब्रह्मा वत्स अमृतवेला उठकर गहन साधना का कार्यक्रम प्रारंभ हुआ, दोपहर 12:00 बजे समापन हुआ ।प्रातः 8:00 बजे पिता श्री ब्रह्मा बाबा के मधुर महावाक्य सभी को सुनाए गए, इसके पश्चात भोग लगाया गया एवं पिता श्री ब्रह्मा बाबा को सभी ने अपनी पुष्पांजलि अर्पित की। फिर सभी ब्रह्मा बाबा के ध्यान कक्ष में दोपहर 12:00 बजे तक गहन साधना में बैठे रहे और उनके महा वाक्यों का गहन मनन चिंतन करके अपने जीवन को उनके समान बनाने की प्रेरणा ली।

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