ब्रह्मा बाबा ने योग की सर्वोच्च अवस्था से पढ़ाया शांति का पाठ – शशि दीदी
माउंट आबू , राजस्थान। ब्रह्माकुमारी संगठन की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके शशिप्रभा ने कहा कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी प्रजापिता ब्रह्मा बाबा ने न केवल वचनों से बल्कि अपने आचरण से संपूर्ण पवित्रता व योग की सर्वोच्च अवस्था को प्राप्त कर सबको शांतिपूर्वक सेवा का पाठ पढ़ाया। विश्व शान्ति के कार्य में संपूर्ण समर्पणता के साथ विकटतम परिस्थितियां आने के बावजूद भी निस्वार्थ सेवा की मशाल जलाये रखी। जिनकी तपस्या की बदौलत आज विश्व नवनिर्माण के विशाल कार्य को समूचे विश्व में मूर्तरूप देने के लिए लाखों की तादाद में भाई-बहनें तत्पर है। यह बात उन्होंने रविवार को संगठन के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय पांडव भवन में प्रजापिता ब्रह्माबाबा के 57वीं पुण्य तिथि कार्यक्रम को संबोधित करते कही।
संयुक्त मुख्य प्रशासिका, जर्मनी सेवाकेंद्रों की प्रभारी राजयोगिनी बीके सुदेश दीदी ने कहा कि ब्रह्मा बाबा की दूरदृष्टि से संगठन की सेवाएं समाज के विभिन्न वर्गों को जोडऩे की महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। ब्रह्माबाबा ने मन के अंदर जड़ें जमाकर बैठे सूक्ष्म विकारों से मुक्त होने के लिए साधना के सरल सूत्र बताते हुए अनेकों के जीवन को संवारकर विश्व सेवा के लिए तैयार किया है।
वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षिका राजयोगिनी बीके शीलू दीदी ने कहा कि ब्रह्मा बाबा ने अपने कर्मों से चरित्र को श्रेष्ठ बनाने की शिक्षा देकर परमात्म कार्य में प्रवृत होने को प्रेरित किया है। आत्मिक भाव की साधना सर्वश्रेष्ठ साधना है। इसी साधना से परमात्म अनुभूति होती है। आत्मिक स्वरूप की अनुभूति करने के बाद परमात्मा संबंध जोडऩा सरल हो जाता है।
इन्होंने भी किए विचार व्यक्त
संगठन के सचिव, मल्टीमीडिया प्रमुख बीके करुणा, अतिरिक्त सचिव बीके मृत्युंजय, वरिष्ठ राजयोगी बीके आत्मप्रकाश, बीके सूरज तोमर, ग्लोबल अस्पताल निदेशक डॉ. प्रताप मिढ्ढा, चिकित्सा प्रभाग सचिव डॉ. बनारसी लाल साह, विज्ञान व तकनीकी विभाग अध्यक्ष बीके मोहन सिंघल आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
दिन भर चले साधना के कार्यक्रम
राजयोगी श्रद्धालूगणों ने अलसुबह दो बजे से ही प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के समाधि स्थल शान्ति स्तम्भ पर सामूहिक रूप से राजयोग का अभ्यास कर विश्वशांति, मानवीय एकता, देश की सुख समृद्धि के लिए शान्ति के शक्तिशाली प्रकम्पन प्रवाहित किए। दिन भर ब्रह्मा बाबा की तपस्या स्थली कुटिया, समाधि स्थल शांति स्तंभ, मेडिटेशन हाल, ज्ञान सरोवर, ग्लोबल अस्पताल, आध्यात्मिक संग्रहालय आदि स्थानों पर राजयोग, ध्यान के कार्यक्रम हुए।







