– मनमोहिनीवन परिसर में आईटी विंग की चार दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ
– देशभर से चार सौ से अधिक आईटी प्रोफेशनल्स ले रहे हैं भाग
आबूरोड,राजस्थान। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के मनमोहिनीवन स्थित ग्लोबल ऑडिटोरियम में आईटी विंग द्वारा चार दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है। इम्पॉवरिंग द सेल्फ (खुद को सशक्त बनाएं) विषय पर आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में देशभर से इंजीनियर, एआई एक्सपर्ट और टेली कम्युनिकेशन से जुड़े चार सौ से अधिक आईटी प्रोफेशनल्स भाग ले रहे हैं। इसका उद्देश्य आईटी फील्ड में वर्कलोड और स्ट्रैस से गुजर रहे प्रोफेशनल्स का जीवन आनंदमय बनाना है। इसमें राजयोग विशेषज्ञ जीवन जीने की कला, समय प्रबंधन, मन प्रबंधन, तनावमुक्त जीवन आदि विषयों पर अपने विचार व्यक्त करेंगे।

कॉन्फ्रेंस के शुभारंभ पर संस्थान के महासचिव राजयोगी बीके करुणा भाई ने कहा कि आज पूरी दुनिया तकनीक के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन तकनीक को दिशा देने वाला मनुष्य स्वयं कितना सशक्त है, यह अधिक महत्वपूर्ण है। कंप्यूटर की क्षमता बढ़ाने के लिए हम लगातार नए सॉफ्टवेयर और अपडेट करते हैं, लेकिन अपने मन को सकारात्मक विचारों और श्रेष्ठ संस्कारों से अपडेट करना भी उतना ही आवश्यक है। व्यक्ति के भीतर शांति, आत्मविश्वास, धैर्य और निर्णय लेने की शक्ति होगी तो वह किसी भी चुनौती का सामना सहजता से कर सकता है।
प्रत्येक आत्मा में हैं दिव्य गुण-
आेआरसी की निदेशिका राजयोगिनी बीके आशा दीदी ने कहा कि प्रत्येक आत्मा के भीतर शांति, प्रेम, शक्ति, ज्ञान, पवित्रता और आनंद जैसे गुण मौजूद हैं। परिस्थितियों और नकारात्मक संस्कारों के कारण ये गुण दब जाते हैं। राजयोग का अभ्यास हमें इन मूल शक्तियों से पुनः जोड़ता है। जब व्यक्ति स्वयं को सशक्त करता है तो वह परिस्थितियों का शिकार नहीं बनता, बल्कि परिस्थितियों को सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बना लेता है। यही सच्ची सफलता और वास्तविक इम्पॉवरिंग द सेल्फ है।
मन को सही प्रकार की ऊर्जा देना जरूरी-
वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके वर्षा दीदी ने कहा कि राजयोग ध्यान के माध्यम से कुछ समय स्वयं को बाहरी गतिविधियों से अलग कर परमात्म स्मृति में स्थित करना मन को नई ऊर्जा प्रदान करता है। आईटी विंग के मुख्यालय संयोजक बीके यशवंत ने स्वागत भाषण दिया।
आेआरसी की मोटिवेशनल ट्रेनर बीके विधात्री बहन ने कहा कि आईटी क्षेत्र में काम करने वाले प्रोफेशनल्स लंबे समय तक स्क्रीन, ईमेल, मीटिंग और लगातार बदलती सूचनाओं से जुड़े रहते हैं। इससे शरीर के साथ-साथ मन भी थकान महसूस करता है। मानसिक थकान का समाधान केवल आराम करना नहीं है, बल्कि मन को सही प्रकार की ऊर्जा देना भी है।
मनुष्य के संस्कार और विवेक महत्वपूर्ण-
आईविंग के वरिष्ठ सदस्य बीके दिलीप भाई ने कहा कि टेक्नोलॉजी ने मानव जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक आने वाले समय को और अधिक प्रभावित करेंगी, लेकिन तकनीक जितनी शक्तिशाली होगी, उसे इस्तेमाल करने वाले मनुष्य के संस्कार और विवेक उतने ही महत्वपूर्ण होंगे।



