Homeदादी जीदादी प्रकाशमणि जीसच्चाई-सफाई की गुह्य परिभाषा

सच्चाई-सफाई की गुह्य परिभाषा

सच्चाई और सफाई इन दोनों शब्दों का बहुत गुह्य अर्थ है। एक तो मैं सत्य परमात्मा पिता के सत्य ज्ञान के पथ पर हूँ इसलिए मैं सत्य हूँ। एक है सत माना अविनाशी, दूसरा सत्य माना सच्ची हूँ। फिर है सफाई-सफाई, जैसे घर में कोई किचड़ा न हो तो कहते हैं बहुत सफाई है। दूसरा है मेरे दिल में कोई भी व्यर्थ किचड़ा नहीं हो। माना न मेरे में इम्प्युरिटी का किचड़ा हो, न झूठ-चोरी या ठगी का किचड़ा हो। ऐसे स्वभाव, संस्कारों का भी मेरे में कोई गंद न हो। किसी प्रकार की झरमुई-झगमुई, व्यर्थ व परचिंतन का भी मेरे में किचड़ा न हो। दूसरों के प्रति दोष दृष्टि रख देखना, दोष दृष्टि रख दोष से व्यवहार करना, खुद को निर्दोषी और दूसरों को दोषी बनाना – यह भी सफाई नहीं है। जिसमें खुद का देह अहंकार होगा वह कभी भी दिल का साफ नहीं होगा। उसके अन्दर अभिमान का नशा होगा। और सच्चाई वाला सदा निर्मान होगा। जिसमें निर्मानता नहीं है, अन्डरस्टूड है कि उसके अन्दर देह अभिमान है, देह अभिमान है माना वह साफ नहीं है, उसके अन्दर दूसरों के प्रति दोष दृष्टि रहती। साफ दिल वाला अपनी गलतियों की करेक्शन करेगा, रियलाइज़ करेगा। कई बार कइयों को रॉन्ग राइट की भी रियलाइज़ेशन नहीं होती। समझाओ तो भी समझेंगे नहीं। रियलाइज़ नहीं करेंगे कि मैं किस बात में रॉन्ग हूँ या किस बात में राइट हूँ। तो यह रियलाइज़ेशन की शक्ति भी दिल की सफाई से आती है। जो एक सेकण्ड में रियलाइज़ कर लेते हैं उसे करेक्शन करना भी सहज हो जाता है। दूसरे के कहने से पहले वह खुद को रियलाइज़ कर परिवर्तन कर लेते हैं।
सच्चाई वाला, साफ दिल वाला कभी किसके संगदोष में नहीं आता। संग का दोष लगता ही उसे है जो साफ दिल नहीं है। जहाँ साफ दिल नहीं है वहाँ ज़रूर कोई खोट है, झूठ है। तो वह संगदोष में जल्दी आ जायेगा। जैसे सोना है वह साफ है, सच्चा है तो उसकी वैल्यू है और जब उसमें झूठ अर्थात् अलाएं पड़ जाती हैं तो उसकी वैल्यू चली जाती। उसको कहेंगे मिक्स सोना। तो यह संगदोष भी हमारी स्थिति को बहुत खराब करता है। एक-दूसरे की सच्ची लगन को तोड़ता है। बाबा से लगन तभी टूटती है जब लाइन क्लीयर नहीं है। फिर संग का दोष लग जाता है और जहाँ संग का दोष लगा वहाँ निश्चय बुद्धि के बदले संशय ज़रूर पैदा होगा। संशय भी अनेक प्रकार का है। एक संशय है जो मैं मानती ही नहीं कि बाबा कौन है। एक सूक्ष्म संशय है जो श्रीमत का उल्लघंन करते। मर्यादा उल्लंघन करता ही वह है जिसकी दिल में सच्चाई-सफाई नहीं है। जिसे बाबा के साथ का अनुभव नहीं है। बाबा साथ है तो कोई कैसी भी कठिन बात भी आये उसे वह सहज पार कर लेता है, जिसके लिए कहा जाता सच की नांव हिले बहुत पर डूबे नहीं। सच्ची दिल वाला परमात्मा को ही साथी बना लेता और उनके साथ ही रहता है। उनके लिए कितनी भी कोई कठिनाई आवे, वह सहज पार कर लेता है। वह कभी दूसरे के संग में नहीं आता। तो पहले चाहिए बुद्धि की सच्चाई और सफाई, तब ही कनेक्शन राइट होगा।

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