मानव मस्तिष्क अनंत शक्तियों का भंडार है । मैडिटेशन से जागृत कर अच्छी सफलता को प्राप्त कर सकते हैं।
मुंगेली ,छत्तीसगढ़: प्रत्येक शिक्षक व विद्यार्थी प्रतिभाशाली है, और अदभुत प्रतिभा का भंडार उसी प्रकार उस के पास सुरक्षित रखा हुआ है, जिस तरह पृथ्वी बहुमूल्य रत्नों को अपने हृदय में सुरक्षित रखे हुए है। पृथ्वी इन रत्नों का उपहार ऐसे व्यक्तियों को सहर्ष भेंट करती है जो इन्हें पाने की अदभुत लालसा रखते हैं और उत्साह से प्रयास करते हैं। विद्यार्थी का मस्तिष्क अमूल्य रत्नों की विशाल खान है। पहचानिये रत्न के इस अनन्त स्रोत को, मेडिटेशन के माध्यम से। इन अमूल्य रत्नों को पाने के लिए उत्साहपूर्वक प्रयत्न कीजिए। आप निश्चित ही अपने अवचेतन मस्तिष्क के विशाल रत्न क्षेत्र से दुर्लभ रत्नों का उपहार पाएंगे।

यह विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के विशेषज्ञ ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने जवाहर नवोदय विद्यालय मुंगेली में विद्यार्थियों के लिए आयोजित याददाश्त शक्ति को कैसे बढ़ाएं इस विषय पर संबोधित करते हुए बताया कि हनुमान को जामवंत जी ने याद दिलाया कि तुम पवन पुत्र हो तो उनके अंदर सोई हुई आंतरिक शक्तियां जागृत हो गई।ऐसे ही हमारे मन में अनंत शक्तियां छिपी हुई है उन शक्तियों को मेडिटेशन के द्वारा जागृत करके एक अच्छी याददाश्त शक्ति को प्राप्त कर सकते हैं और अच्छी सफलता अर्जित की जा सकती है।
आपका मन असीम प्रतिभा और योग्यता का भंडार है। अगर हम मन को शांत करना सिखा दे तो आप को सर्वोत्तम शिखर पर पहूँचा देगी। हमारे मानव मस्तिष्क से निकलने वाली तरंगे समाज व प्रकृति को शुद्ध व पवित्र बना देती है, जिससे पढ़ने के कार्य में रुचि पैदा होने लगती है। याददाश्त शक्ति तीव्र और विषय को ग्रहण करने की शक्ति बढ़ने लगती है। विद्यार्थीयो को बस इतना ही प्रयास करना है कि आप को केवल अपने मन की इस प्रतिभा को पहचान कर उसे नई दिशा प्रदान करनी है। उन लोगो से बचना है जो आप को डांटते है, फटकारते हैं, मनोबल तोड़ते हैं। सदा परमात्मा की संगति व श्रेष्ठ आत्माओं की संगति में रहना है।

ब्रह्माकुमारी सीमा बहन ने बताया कि मैं एक चैतन्य आत्मा हूं मैं कौन ,शरीर नहीं।इसका ज्ञान अगर हो जाए तो हमारी सोई हुई अनंत शक्तियां जाग्रत होने लगती है गीता में यही बताया गया कि आप देह नहीं इस देह को चलाने वाली चैतन्य शक्ति आत्मा है। आज हमारी अनंत शक्तियां देह अभिमान के कारण खर्च हो गई है जिसके कारण आंतरिक शक्तियों खत्म हो गई ।मन कमजोर हो गया जिससे अनेक विसंगतियां समाज में पैदा हो गई ।अब आवश्यकता है अपने को पहचाने। मेडिटेशन स्वयं की पहचान देता है और शैक्षणिक कार्य को सरल बनाता है। नशा मुक्त रहने के लिए सभी विद्यार्थियों से प्रतिज्ञा कराई कि हमें स्वयं को नशे से मुक्त रहकर समाज को भी नशे से मुक्त करना है।कार्यक्रम का शुभारंभ व अंत में आभार प्रकट करते हुए वरिष्ठ अध्यापक जगन्नाथ वैष्णव ने बताया की एक अच्छे शैक्षणिक कार्यक्रम में मन का शांत होना आवश्यक है और शांति मेडिटेशन से प्राप्त हो सकती है। हम प्रतिदिन अगर जीवन में मेडिटेशन को शामिल करते हैं तो स्वत हमारी एकाग्रता की शक्ति बढ़ने लगती है, यह एक वैज्ञानिक पद्धति है जो सभी को अनुसरण करना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रिंसिपल भ्राता डी के साहू को ईश्वरीय सौगात दी गई।






