अलीराजपुर,मध्य प्रदेश। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, क्रांतिकारी शहीद छितुसिंह किराड़ शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अलीराजपुर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में महिलाओं के सम्मान, अधिकारों और उनके सर्वांगीण विकास के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर मीना सोलंकी मैडम ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने महिलाओं के प्रति सम्मान, सहयोग और समान अवसर प्रदान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव उच्च स्थान दिया गया है। शास्त्रों में भी कहा गया है— “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता”, अर्थात जहाँ नारी का सम्मान और आदर होता है, वहाँ देवताओं का वास होता है। उन्होंने कहा कि समाज के समग्र विकास के लिए महिलाओं का सशक्त और सम्मानित होना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में डॉ. लाल सिंह निंगवाल ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पृष्ठभूमि और महत्व पर प्रकाश डालते हुए महिलाओं के अधिकार, समानता और उन्हें प्राप्त संवैधानिक अधिकारों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
विशेष अतिथि के रूप में ब्रह्माकुमारी संस्था से पधारी माधुरी दीदी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अधिकारों के साथ-साथ चरित्रधन, भावनाओं की शुद्धता तथा मन और विचारों में पवित्रता भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने आंतरिक शक्ति और नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित इंदौर से पधारे ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने व्यक्तित्व निर्माण में सकारात्मक विचारों की शक्ति, संकल्प की शक्ति तथा आत्म-सुधार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने आत्मशक्ति के विकास तथा आत्मा और परमात्मा के गहरे संबंध को भी स्पष्ट किया और कहा कि आध्यात्मिकता के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है।
इस अवसर पर डॉ. कलम चौहान एवं बी.के. ज्योति बहन ने सभी को नशा मुक्त रहने के लिए प्रतिज्ञा कराई और कहा कि कोई भी नशा बुद्धि को नाश कर देता है हमारी निर्णय शक्ति खत्म तो सब कुछ गलत होने लगता है। अपनी विवेक शक्ति को जागृत रखने के लिए नारायणी नशा सदा कायम रखें कि मैं कौन हूं ,किसकी संतान हूं यह नशा अनेक नशे को खत्म कर देता है। कार्यक्रम के दौरान ईश्वरीय ब्रह्माकुमारी संस्था की ओर से महाविद्यालय की सभी महिला प्राध्यापकों का स्मृति-चिन्ह देकर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. सीताराम गोले द्वारा किया गया तथा अंत में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के प्रभारी सुरेंद्र सिंह सस्तिया ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।








