कला आत्मा का मंच है-अभिनय से बढ़ता है आत्मिक विकास और मन की शांति : बीके डॉ. रीना दीदी
भोपाल,मध्य प्रदेश। विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ ब्लेसिंग हाउस सेवाकेंद्र में बहुत ही सुंदर,भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से धुरंधर फिल्म में अब्दुल भुट्टावी जैसे अहम किरदार में नजर आए श्री संजय मेहता (अभिनेता,लेखक प्रोडक्शन ग्रांट और फेस्टिवल ग्रांट कमेटी के सदस्य संस्कृति विभाग, भारत सरकार), सुश्री मधु चौधरी (निदेशिका, रवींद्र भवन भोपाल, मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग में पदस्थ हैं, एक सफल आंत्रप्रेन्योर हैं), श्रीमती शोभा चटर्जी जी वरिष्ठ थिएटर आर्टिस्ट उपस्थित रहे ।

ब्रह्माकुमारीज़ ब्लेसिंग हाउस सेवाकेंद्र प्रभारी बीके डॉ. रीना दीदी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज को जागरूक करने, मानवीय मूल्यों को जीवित रखने और आत्मचिंतन की प्रेरणा देने का सशक्त साधन है।कला आत्मा का मंच है, जीवन के अभिनय से आत्मिक विकास और मन की शांति बढ़ती है। आध्यात्म और कला के संगम से इस संसार समाज को सुख,शांति, प्रेम, आनन्द, ज्ञान एवं सद्भाव से नई सकारात्मक दिशा देकर एक स्वर्णिम समाज का निर्माण किया जा सकता है। दीदी ने कहा कि आज समाज को रोल कॉन्शियस होने की बजाय सोल कॉन्शियस होकर जीवन में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

श्री संजय मेहता ने कहा कि अध्यात्म से जुड़ाव अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे विकसित हुआ। उनके जीवन में आध्यात्मिकता का पहला गहरा प्रभाव संत कबीर के विचारों से आया। उनके अनुसार रंगमंच (थिएटर) केवल अभिनय नहीं है, बल्कि यह आत्म-खोज और भीतर की यात्रा से भी जुड़ा हुआ माध्यम है। उन्होंने ने यह संदेश दिया कि रंगमंच और आध्यात्मिकता एक-दूसरे से जुड़े हैं, थिएटर व्यक्ति को अपने भीतर झाँकने और गहरी समझ विकसित करने का अवसर देता है, जीवन में आध्यात्मिक विचारों से इस रंगमंच में हमें अपने किरदार को व्यवस्थित तरीके से निभाने में मदद मिलती है।
सुश्री मधु चौधरी ने इस अवसर पर रंगमंच के महत्व, कलाकारों की भूमिका और थिएटर के सांस्कृतिक योगदान पर बात की, रंगमंच की कला को संरक्षित और लोकप्रिय बनाने के लिए विचार साझा किए। कलाकारों और थिएटर समुदाय की सराहना करते हुए युवा पीढ़ी को रंगमंच की ओर आकर्षित करने और इसकी शिक्षा पर ध्यान देने पर विचार व्यक्त किए।
श्रीमती शोभा चटर्जी वरिष्ठ थिएटर आर्टिस्ट ने विश्व रंगमंच दिवस पर थिएटर के महत्व और इसकी सामाजिक भूमिका के बारे में अपने विचार साझा किए। उन्होंने रंगमंच को सिर्फ एक कला के रूप में नहीं बल्कि एक सशक्त माध्यम के रूप में देखा, जिसके जरिए समाज में जागरूकता और बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रंगमंच समाज की सोच और विचारधारा को प्रभावित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह न केवल मनोरंजन का स्रोत है, बल्कि यह समाज के मुद्दों, मानवीय भावनाओं, और जीवन के गहरे पहलुओं को उजागर करने का एक सशक्त तरीका है। रंगमंच हर किसी को अपनी पहचान बनाने, अपनी आवाज़ उठाने और दूसरों के अनुभवों को समझने का एक मौका देता है। विश्व रंगमंच दिवस पर, उन्होंने कलाकारों को इस कला के प्रति अपने समर्पण और जुनून को बरकरार रखने की प्रेरणा दी।
बीके डॉ. रावेंद्र ने उपस्थित सभी अतिथियों एवं दर्शकों का शुभ शब्दों के द्वारा स्वागत,अभिनंदन किया।
कुमारी श्री, कुमारी राधा, कुमारी खुशी ने बहुत ही सुंदर दिव्य गीतों पर नृत्य की प्रस्तुति देकर सेवा करने का भाव जीवन में जागृत कर कार्यक्रम में शमां बांध दिया।
कार्यक्रम की समाप्ति पर बीके डॉ. रीना दीदी ने संपूर्ण संसार में शांति का वातावरण लाने हेतु आध्यात्मिक विचारों के माध्यम से सभी को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया।
कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन बी.के.राहुल भाई ने किया। कार्यक्रम के पश्चात अतिथियों को संस्थान के द्वारा ईश्वरीय सौगात देकर ब्रह्माभोजन कराया गया।












