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पनवेल: गौरवपूर्ण वृद्धावस्था की ओर ‘संगम’ कार्यक्रम उत्साहपूर्वक संपन्न

पनवेल,महाराष्ट्र : प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज माउंट आबू तथा समाज सेवा प्रभाग (RERF) के सहयोग से पनवेल ब्रह्माकुमारीज द्वारा ‘संगम – गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सन्मानित जीवन’ यह विशेष कार्यक्रम पनवेल स्थित ज्येष्ठ नागरिक सभागृह में उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ।

इस कार्यक्रम में ज्येष्ठ नागरिक सभा की उपाध्यक्ष श्रीमती माधुरी गोसावी, सचिव श्री सुनील खेडेकर तथा पनवेल ब्रह्माकुमारीज की मुख्य संचालिका राजयोगिनी बीके तारा दीदी उपस्थित थीं। प्रमुख अतिथि के रूप में बीके डॉ. सचिन परब उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से किया गया। इसके पश्चात बीके डॉ. सचिन परब का ज्येष्ठ नागरिक सभा एवं पनवेल ब्रह्माकुमारीज की ओर से पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया तथा उन्हें मोमेंटो भी प्रदान किया गया।

अपने मार्गदर्शन में डॉ. सचिन परब ने ज्येष्ठ नागरिकों को अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश दिए। उन्होंने “उबुन्टु” की संकल्पना को समझाते हुए कहा कि “हम सभी को मिलकर एक साथ रहना चाहिए।” आज के समय में अनेक वृद्धों को वृद्धाश्रम में रहना पड़ता है, इस पर उन्होंने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एकाकीपन से बचने के लिए सभी को अपने मन की भावनाएँ व्यक्त करनी चाहिए, बातचीत करनी चाहिए और मन को हल्का रखना चाहिए।

उन्होंने ज्येष्ठ नागरिक सभा के 1000 से अधिक सदस्यों का अभिनंदन करते हुए कहा कि इससे अकेलेपन की भावना कम होती है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस आयु में भावनात्मक रूप से अत्यधिक जुड़ाव कम रखना चाहिए, जिससे अपेक्षाभंग का दुःख कम हो सके।

उन्होंने यह भी कहा कि मन में किसी भी प्रकार की “गाँठ” नहीं रखनी चाहिए। इस दौरान उन्होंने उपस्थित सभी को हाथ ऊपर करके मुट्ठी बंद करने और फिर धीरे-धीरे खोलने का अभ्यास करवाया तथा मुट्ठी खोलने पर हल्कापन महसूस होता है, यह उन्होंने समझाया।

विज्ञान भी यह स्वीकार करता है कि मानसिक तनाव का प्रभाव शरीर पर पड़ता है। इस संदर्भ में उन्होंने हृदय रोग एवं कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव के लिए सकारात्मक सोच और मन की अभिव्यक्ति को आवश्यक बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र में खुलकर हँसना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। स्मरणशक्ति में कमी की समस्या के संदर्भ में उन्होंने नियमित राजयोग मेडिटेशन करने का सुझाव दिया।

मृत्यु के भय को कम करने के लिए उन्होंने आत्मा के विषय में मार्गदर्शन दिया और कहा कि “हम शरीर नहीं, आत्मा हैं।” आत्मा अमर है और एक शरीर छोड़कर दूसरा शरीर धारण करती है, यह आत्मा की यात्रा है, ऐसा उन्होंने समझाया। इसके पश्चात उन्होंने ध्यान (Meditation) करवाया, जिसके बाद सभी उपस्थितों ने स्वयं को शांत, हल्का और आनंदित महसूस किया।

इसके पश्चात पनवेल सेवा केंद्र की मुख्य संचालिका राजयोगिनी बीके तारा दीदी ने कहा कि अकेलेपन को दूर करने का एकमात्र आधार परमपिता परमात्मा है। उनसे माता, पिता, भाई, मित्र जैसे विभिन्न संबंधों के माध्यम से जुड़कर जीवन में सच्चा सुख, शांति और आनंद प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने राजयोग मेडिटेशन कोर्स करने का भी आवाहन किया।

कार्यक्रम का संचालन राजयोगिनी बीके शकुंतला दीदी ने प्रभावी रूप से किया। अंत में उपाध्यक्ष श्रीमती माधुरी गोसावी तथा सचिव श्री सुनील खेडेकर ने अतिथियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

पनवेल ब्रह्माकुमारीज की ओर से सभी ज्येष्ठ नागरिकों का तिलक लगाकर सम्मान किया गया तथा ब्लेसिंग कार्ड प्रदान किए गए। कार्यक्रम के अंत में सभी को चाय एवं बिस्कुट वितरित किए गए।

यह कार्यक्रम ज्येष्ठ नागरिकों के लिए केवल सम्मान का नहीं, बल्कि मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाने वाला साबित हुआ। इसने सभी उपस्थितों में नई ऊर्जा, सकारात्मकता और आनंदपूर्ण जीवन जीने का संदेश दिया।

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