ईर्ष्या प्रसन्नता को चुरा कर हमें उत्साह हीन बना देती है – बीके शैलजा
मन रूपी मंदिर में शुद्ध संकल्पों की खुशबू ही घर को मंदिर बन सकती है- ब्रह्माकुमारीज़
जो सत्संग को जीवन में उतारता है वही व्यक्ति श्रेष्ठ होता है- पं. शिव शरण करवरिया जी
छतरपुर म.प्र : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा सीएम राईज स्कूल के पीछे एवं नई तहसील के समीप स्थित मन मोहिनी मैरिज गार्डन के उद्घाटन के अवसर पर घर बने मंदिर एवं नशा मुक्त भारत अभियान विषय को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
उक्त कार्यक्रम की शुरुआत छतरपुर सेवाकेंद्र प्रभारी बीके शैलजा द्वारा परमात्म महावाक्यों से की गई जिसमें कहा गया कि अप्रसन्नता का कारण ईर्ष्या है और ईर्ष्या वाला व्यक्ति न तो प्रसन्न रह सकता है और ना ही आगे बढ़ सकता है क्योंकि ईर्ष्या हमें दिलशिकस्त कर देती है। ईर्ष्या हमारी प्रसन्नता को चुराकर हमें उत्साह हीन बना देती है इसलिए हमें प्रसन्न रहने के लिए ईर्ष्या की वृत्ति का त्याग करना होगा।
बीके कल्पना ने कार्यक्रम को आगे बढा़ते हुए कहा कि हमारा शरीर मंदिर है और इस शरीर रूपी मंदिर में आत्मा रूपी मूर्ति विराजमान है और इस मूर्ति को श्रृंगारित करने के लिए खूबसूरत बनाने के लिए हमें दिव्य गुणों की आवश्यकता है। हमारी आत्मा के मन रूपी मंदिर में अशुद्ध संकल्पों का वास नहीं होना चाहिए बल्कि दिव्य गुणों की खुशबू आनी चाहिए तभी हमारा घर भी मंदिर बन सकता है क्योंकि मकान ईंट गारे से बनता है लेकिन उस मकान को घर बनाने के लिए भावनाओं की आवश्यकता होती है हमारी श्रेष्ठ भावनाएं, हमारे विचार, प्रेम, धैर्यता, सहनशीलता एवं सामंजस्य कला जैसे गुणों से हमारा घर मंदिर बन जाता है।
इस मौके पर उपस्थित भाई बहनों को बीके मोहिनी ने नशा मुक्ति की शपथ दिलाते हुए कहा कि घर को मंदिर बनाने के लिए नशे को ना कहना चाहिए क्योंकि नशे की आदतें हमारे घर को तोड़ने का कार्य करती हैं।इस अवसर पर वृंदावन से पधारे आचार्य पं. शिव शरण करवरिया जी ने कहा कि सत्संग को श्रद्धा से सुनना बहुत आवश्यक है जो सत्संग को जीवन में उतारता है वही व्यक्ति श्रेष्ठ होता है इसलिए मैं सभी से कहता हूं जो हमारी बहनों ने बताया है उसको अपने जीवन में उतारना है और अपनी सनातन संस्कृति की रक्षा करना है।
इस मौके पर मनमोहिनी मैरिज गार्डन संचालक एवं उनके परिवार को ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा बधाई दी गई एवं महाराज जी को ईश्वरीय सौगात देकर सम्मानित किया गया। तत्पश्चात परमात्म ध्यान के साथ विधिवत् पूजन प्रारंभ किया गया।








