राजयोग का योगाभ्यास

योगाभ्यास वास्तव में वह शक्ति है जो हमारी संभावनाओं को वास्तविकता में बदल देता है। मनुष्य के भीतर परमात्मा ने सभी शक्तियां समान रूप से प्रदान की हैं। ऐसा नहीं है कि किसी को अधिक और किसी को कम मिला है – हर मानव को यह दिव्य सामथ्र्य प्राप्त है। लेकिन अंतर यहाँ आता है कि कौन उस शक्ति का सही लालन-पालन करना जानता है, कौन उसे विकसित करने का प्रयास करता है। परमात्मा ने हर जीवन के भीतर एक सहज प्रेरणा, एक ऊंचा उठने की इच्छा शक्ति रखी है। यही इच्छा हमें आगे बढऩे के लिए प्रेरित करती है।

योग उस वातावरण को तैयार करने का माध्यम है, जिसमें हमारी यह सुप्त शक्तियां जागृत होती हैं। जिनके पास ज्ञान और अनुभव का अभाव है, उन्हें यह संदेह हो सकता है कि क्या योग के माध्यम से इतना परिवर्तन संभव है? लेकिन जो बीज से वृक्ष बनने की प्रक्रिया को समझता है, उसके लिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है। जब एक छोटा-सा बीज विशाल वटवृक्ष बन सकता है, तो मनुष्य भी अपने साधारण स्वरूप से उठकर ”नर से नारायण” की अवस्था को प्राप्त कर सकता है।

राजयोग इसी अनंत संभावनाओं का द्वार खोलता है। राजयोग का अर्थ है- अपने भीतर उस श्रेेष्ठ बीज को पहचानना, जो हमारे जीवन रूपी वृक्ष को महान बना सकता है। इसका अर्थ यह भी है कि मेरे भीतर सृजन करने की, अपने जीवन को अपनी इच्छानुसार दिशा देने की पूर्ण योग्यता है।

इन अनंत संभावनाओं को पहचानने और उन्हें साकार करने के लिए हमें अपने भीतर छिपी हुई सुषुप्त शक्तियों को जागृत करना होगा। योगाभ्यास हमें यही सिखाता है अपने आप को जानना, अपनी शक्ति को पहचानना और उसे सही दिशा में प्रयोग करना।

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