मुख पृष्ठअंतर्राष्ट्रीय योग दिवसयोगा और राजयोगा का संतुलन स्वस्थ जीवन का आधार

योगा और राजयोगा का संतुलन स्वस्थ जीवन का आधार

आज के समय में लोग अनेक प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हैं जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन आदि। इन बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए लोग लगातार उपाय खोजते रहते हैं, लेकिन उपचार के बजाए ये बीमारियां धीरे-धीरे लाइलाज रूप लेती जा रही हैं। इसका एक प्रमुख कारण बढ़ता हुआ तनाव है, जिसे आज की युवा पीढ़ी सही तरीके से संभाल नहीं पा रही। परिणामस्वरूप वे शराब और ड्रग्स जैसे हानिकारक साधनों का सहारा लेने लगते हैं।

ऐसी स्थिति में एक ही सशक्त उपाय सामने आता है – योगाभ्यास। योग ही हमारी मानसिक स्थिति को संतुलित बनाए रखने में सक्षम है। यदि हम शरीर को मन और बुद्धि का मंदिर मानें, तो योग उस मंदिर को सुंदर, सशक्त और पवित्र बनाता है। योग तभी पूर्ण रूप से लाभकारी होता है जब उसे सही विधि और अनुशासन के साथ किया जाए। यह न केवल हमारी शारीरिक और मानसिक क्षमता को बढ़ाता है बल्कि हमारी आंतरिक विशेषताओं का विकास करता है और हमें तनावमुक्त जीवन जीने की दिशा में अग्रसर करता है।

योग को समझने के लिए क्रसाधनञ्ज और क्रसाध्यञ्ज के अंतर को जानना आवश्यक है। हमारा शरीर साधन है, जबकि मन और बुद्धि साध्य हैं। मन और बुद्धि के बीच जो द्वंद्व चलता है – मन कुछ और चाहता है और बुद्धि कुछ और निर्णय लेती है – यही असंतुलन हमारे जीवन में अनेक समस्याओं का कारण बनता है। इस असंतुलन के कारण शरीर में रासायनिक प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं जिससे बीपी, डायबिटीज और अन्य विकृतियां उत्पन्न होती हैं।

वास्तव में, यह अंसतुलन मन और बुद्धि के बीच तालमेल के अभाव और परिस्थितियों के प्रभाव में लंबे समय तक जीने की आदत के कारण उत्पन्न होता है। हम अपनी वास्तविक पहचान से दूर हो जाते हैं और बाहरी वातावरण के प्रभाव में आकर अपने जीवन का संतुलन खो देते हैं।

इसलिए योग का महत्त्व अत्यंत बढ़ जाता है। यह हमें शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर सशक्त बनाता है। यदि हम स्वस्थ, संतुलित और सम्पूर्ण जीवन जीना चाहते हैं, तो योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना ही होगा। यही हमें वास्तविक स्वास्थ्य और आत्मिक संतुलन की ओर ले जाता है।

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