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वलसाड-अब्रामा: ब्रह्माकुमारीज़ सेवाकेंद्र पर मातृ दिवस के निमित्त “माँ – सुखी परिवार की आधारशिला” का कार्यक्रम

वलसाड-अब्रामा, गुजरात: ब्रह्माकुमारीज़ सेवाकेंद्र पर आज मातृ दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष के कार्यक्रम का मुख्य विषय “माँ – सुखी परिवार की आधारशिला” रखी गई, जिसके माध्यम से समाज में माता के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत शांति के सागर परमपिता परमात्मा की याद के साथ हुई। सेवाकेंद्र प्रभारी बी.के. संगीता दीदी ने सभी माताओं का तिलक लगाकर और पुष्पों से स्वागत किया तथा चुन्नी पहनाकर सम्मानित किया। माताओं के सम्मान में दीदी ने कहा कि यह चुन्नी केवल वस्त्र नहीं, बल्कि उनके त्याग और ममता के प्रति संस्थान का सम्मान है।”

परिवार का केंद्र है माँ

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता बी.के. संगीता दीदी ने विषय की व्याख्या करते हुए कहा कि एक माँ केवल घर नहीं चलाती, बल्कि वह पूरे परिवार की भावनात्मक और आध्यात्मिक नींव होती है। यदि घर की आधारशिला यानी माँ सशक्त और शांत है, तो उस परिवार का हर सदस्य सुखी और सुरक्षित महसूस करता है। उन्होंने माताओं को राजयोग अपनाकर स्वयं को आंतरिक रूप से शक्तिशाली बनाने का आह्वान किया।

खेलों के जरिए झलका उत्साह
आध्यात्मिक चर्चा के उपरांत मनोरंजन सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें माताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस सत्र में आयोजित विभिन्न खेलों ने माताओं को उनके बचपन की याद दिला दी:

रोचक खेल: माताओं की सजगता और टीम भावना को परखने के लिए कई ‘वन मिनट गेम्स’ और रचनात्मक गतिविधियाँ करवाई गईं।

म्यूजिकल चेयर और सरप्राइज गेम्स: माताओं के लिए म्यूजिकल चेयर और एकाग्रता पर आधारित खेल खिलाए गए।

भावपूर्ण समापन
समारोह के अंत में सभी माताओं ने विश्व शांति के लिए सामूहिक मेडीटेशन (राजयोग) किया। सेवाकेंद्र की बहनों ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए तिलक लगाकर अभिनंदन किया और ईश्वरीय प्रसाद वितरित किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने माना कि माँ के बिना एक सुखी और संस्कारवान समाज की कल्पना करना असंभव है।

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