अंबिकापुर, छत्तीसगढ़। प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रकृति परिवर्तन विषय पर कार्यक्रम रखा गया। कार्यक्रम की शुरुआत आर्ट ऑफ़ लिविंग के संचालक अजय तिवारी, सिंचाई विभाग के पूर्व एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सुरेंद्र दुबे, जयप्रकाश पाण्डेय पूर्व रेंजर वन विभाग, एवं सेवा केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी एवं ब्रह्माकुमारी बहनों ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर बीके विद्या दीदी ने सभी भाई- बहनों को पर्यावरण दिवस की बधाई देते हुए कहा कि हम सदियों से प्रकृति की गोद में पलते आ रहे हैं।प्रकृति के सानिध्य में ऋषि मुनियों ने भी आध्यात्मिक चेतना प्राप्त की और प्रकृति के सौंदर्य से आकर्षित होकर न जाने कितने कवियों की आत्मा से कविताएं फूट पड़ी। लेकिन आज मनुष्य आत्माओं का प्रकृति से दूरी हो गई है ।वह अपने सुख सुविधाओं के लिए प्रकृति का दोहन कर रहे हैं। उन्होंने कहा प्रकृति प्रदूषण के दो कारण हैं एक मानसिक प्रदूषण दूसरा लाइफस्टाइल में परिवर्तन। हम अपने स्वार्थ के लिए वृक्षों की कटाई कर रहे हैं। इंडस्ट्रीज थर्मल पावर हम जो गाड़ियां चलाते हैं । रेफ्रिजरेटर आदि का प्रयोग करते हैं ।इससे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रहा है।हमारे विचारों का प्रकृति के ऊपर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। हम अपने विचारों को सकारात्मक बनाकर मानसिक प्रदूषण को रोक सकते हैं ।हम रोज प्रकृति का धन्यवाद करें। पशु पक्षी जानवर प्रकृति के सानिध्य में रहते हैं ।इसलिए उन्हें प्रकृति द्वारा होने वाले हलचल का पहले से ही पता पड़ जाता है ।जबकि मनुष्य इस हलचल से प्रभावित हो जाते हैं। उन्होंने बताया दुनिया में तीन सत्ता काम करती है पुरुष, परम पुरुष और प्रकृति। पुरुष अर्थात् आत्मा जब तमो प्रधान हो जाती है तब प्रकृति भी तमो प्रधान हो जाती है और प्राकृतिक प्रकोप होता है प्राकृतिक प्रकोप में परमात्मा का कोई हाथ नहीं है जब प्रकृति तमो प्रधान बन जाती है तब परमात्मा प्रकृति को शुद्ध करने के लिए हमें विधि बताते हैं। पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए हम अधिक से अधिक पेड़ लगाए एवं राजयोग मेडिटेशन से प्रकृति में शुद्ध वाइब्रेशन फैलाएं उन्होंने पांच तत्वों को शुद्ध बनाने के लिए कामेंट्री द्वारा मेडिटेशन का अभ्यास कराया।
अजय तिवारी ने भी अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज मनुष्य जिस्मानी खूबसूरती कीऔर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और रूहानी खूबसूरती से दूर जा रहे हैं अर्थात रूहानी खूबसूरती के बिगड़ जाने पर यह देश शरीर का कोई अस्तित्व रहना संभव नहीं है। मानव जीवन तभी सफल है जब प्रकृति हमें जन्म से जैसे मिला है उससे भी बेहतर करके छोड़ें। आज हम पूरी सृष्टि के रचयिता परमपिता परमात्मा शिव के नाम पर पौधा लगाकर उनका धन्यवाद करें। रेंजर वन विभाग के जयप्रकाश पाण्डेय ने भी अपना अनुभव शेयर करते हुए पर्यावरण को सुरक्षित रखने की विधि को बताया जंगल को आग तथा मवेशियों से बचाया जाए। अंत में सभी ने प्रकृति को धन्यवाद देते हुए वृक्षारोपण किया एवं पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए सब मिलकर नारे लगाए। पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में विकास गर्ग के फार्म हाउस बगिया अंबिकापुर में ब्रह्मकुमारी बहनों द्वारा वृक्षारोपण कर प्रकृति को संरक्षित किया गया।










