बोंगईगांव,असम : जिला कारागार, अभयापुरी में नशा मुक्त भारत अभियान विषय की जानकारी 205 कैदी भाइयों के लिए श्री अर्नब कुमार सूत्रधार जी (जेलर) की देखरेख में प्रस्तुत की गई।
बी के राजीव (मेडिकल विंग वक्ता) ने सभी को नशे की जीवन में शुरुआत के कारणों तथा उससे होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और नैतिक नुकसान से जागरूक करते हुए तनाव मुक्ति हेतु राजयोगी सकारात्मक जीवन शैली को अपनाने के लिए कुछ रोचक अथवा प्रेरणादायक प्रसंग प्रस्तुत करते हुए सभी से पूछा कि क्या हम खाने के बिना जीवित रह सकते हैं ? लेकिन तंबाकू के बिना रह सकते हैं और इस ज़हर का उत्पादन तब तक होता रहेगा जब तक इसके खरीददार होंगे और यदि हमारे युवाओं को इस भयावह दानव के शिकंजे से मुक्त होना है तो इन नशीले पदार्थों को छोड़कर अपने जीवन में एक सुंदर अथवा अपनी विशेषताओं का नशा धारण करके जीवन को सुंदर बनाना होगा जिससे जीवन की सार्थकता सिद्ध होगी और भारत का विश्व गुरु बनने का सपना साकार हो सकेगा। उन्होंने आगे सभी को यह भी स्पष्ट किया की बंधन किसी को भी अच्छा नहीं लगता लेकिन आज का मनुष्य जो खुद को आजाद समझता है वह भी क्रोध रूपी बुराई अथवा शैतान का गुलाम बन खुद को विवश समझते हुए ऐसी दुख की जंजीरों में जकड़ा हुआ है जिससे खुद को मुक्त करना असंभव समझता है व क्रोध को ही अपनी शक्ति समझ कर सारा जीवन खुद भी दुखी होता है और अनेकों के दुखों का कारण बनता है। यदि कोई भी मनुष्य सुखी रहना चाहता है तो इस शैतान रूपी दुश्मन को पहचान कर परमात्मा शक्ति द्वारा इस बुराई से मुक्त हो अपने जीवन को खुशनुमा करते हुए समाज में बदलाव ला सकता है। तत्पश्चात जीवन में दृढ़ता का महत्व बताया और यह स्पष्ट किया कि यदि कोई मानव दृढ़ता पूर्वक अपना लक्ष्य साध ले तो अवश्य ही महान बन सकता है जिसको महान विभूतियों के जीवन्त दृष्टांतों से प्रकाशित करते हुए सभी को राजयोग का अभ्यास करा कर इसे निरंतर अपनी जीवन दिनचर्या में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया। अंत में सभी ने इन बुराइयों से मुक्त रहने के लिए ईश्वर के सम्मुख शपथ ग्रहण करते हुए अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाने का दृढ़ता पूर्वक वादा किया। https://drive.google.com/drive/folders/1r_AxYSpq52MVxuMSaRMT1wZNXddC1O2T?usp=sharing
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में बोंगईगांव क्षेत्र की राजयोगिनी गंगा बहन (सर्टिफिकेट नंबर 990), बी. के. सुब्रत और सभी भाई-बहनों का अथक सहयोग रहा।




