– त्याग, तपस्या, सादगी, सरलता, मातृत्व की भावना, सेवा भाव की प्रतिमूर्ति थी मातेश्वरी जगदम्बा (मम्मा)
– मम्मा हां जी का पाठ पढ़ाकर नंबर वन में चली गई – बीके शैलजा
छतरपुर,मध्य प्रदेश। स्थानीय किशोर सागर स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में 24 जून को संस्थान की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61 वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया गया। जिसमें लगभग 500 भाई बहनों ने सम्मिलित होकर श्रद्धा, सम्मान एवं आध्यात्मिक उमंग के साथ मम्मा की दिव्य जीवन, उनकी त्याग, तपस्या, सादगी तथा सेवा भाव को स्मरण करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर छतरपुर सेवा केन्द्र प्रभारी बी के शैलजा बहन जी ने सर्व प्रथम परमपिता शिव परमात्मा के ईश्वरीय महावाक्य मुरली को उपस्थित नियमित विद्यार्थीयों को सुनाया। तत्पश्चात मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि किस तरह से मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती पहले दिन से बाबा की हर बात में हां जी का पार्ट बजाती रहीं । और इसी हां जी के पार्ट के कारण वह औरों से बहुत न्यारी और सर्व स्नेही बनी । इसे बहन जी ने कई उदाहरण देकर स्पष्ट किया। बहन जी ने बताया कि उनके जीवन में ईश्वर के प्रति अद्भुत समर्पण भाव, संपूर्ण पवित्रता, नम्रता, सरलता, सहनशीलता, मथुरा वाणी, मातृत्व की भावना, योगयुक्त जीवन, सर्वे के प्रति सेवा भाव, श्रेष्ठ संस्कारों की मूर्ति स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी।
इस अवसर पर कुमारी गुनगुन, कुमारी रेशू एवं कुमारी मोहनी के द्वारा मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती के जीवन पर आधारित विशेष नृत्य प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रुप में वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र अग्रवाल एवं पूर्व प्राचार्य एस के उपाध्याय जी की गरिमामय उपस्थिति रही । कार्यक्रम अंत में उपस्थित जन समूह ने मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती को श्रद्धांजलि दी एवं ब्रह्मा भोजन ग्रहण किया।










