पतरातू,झारखण्ड: ब्रह्माकुमारीज राजयोग मेडिटेशन सेवाकेंद्र द्वारा मंगलवार को संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती की 61वीं पुण्य स्मृति दिवस आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में मनाया गया।
पतरातू सेवाकेंद्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी रौशनी बहन ने कहा कि मातेश्वरी जगदम्बा जी का जन्म 1919 में अमृतसर में एक सामान्य परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम ‘ओम राधे’ था। जब मातेश्वरी जी ‘ओम’ की ध्वनि का उच्चारण करती थीं, तो पूरे वातावरण में गहरा शांति छा जाती थी। इसलिए वे ‘ओम राधे’ के नाम से लोकप्रिय हुईं।
मातेश्वरी जी ने 24 जून, 1965 को अपने नश्वर देह का त्याग करके सम्पूर्णता को प्राप्त किया था। इस दिवस को ब्रह्माकुमारी संस्थान के देश-विदेश के भाई-बहन ‘आध्यात्मिक ज्ञान दिवस’ के रूप में मनाते हैं। यह मातेश्वरी जी का 61वां पुण्य स्मृति दिवस है।
मातेश्वरी जगदम्बा जी का जन्म अविभाजित भारत के सिंध, हैदराबाद में हुआ था। मातेश्वरी जगदम्बा जी का व्यक्तित्व समस्त नारी जाति के लिए गौरव और प्रेरणा का स्रोत है। मातेश्वरी जी ने आध्यात्मिक शक्ति के द्वारा मानवता की सेवा के पथ को उस समय चुना, जब नारियों को घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती थी। ऐसी भारतीय संस्कृति के उत्थान के लिए मातेश्वरी जी का यह त्याग, समर्पण और सेवा समस्त भारत तथा विश्व के लिए अत्यन्त गौरव का विषय है।
आगे उन्होंने कहा मातेश्वरी जी ने अपने त्याग, तपस्या और सेवा से समस्त मानव समुदाय को जीवनमुक्ति की राह दिखाई तथा नारियों को अध्यात्म के पथ पर चलते हुए समाज की सेवा करने के लिए प्रेरणा प्रदान की। मनमोहिनी दादी जी, दादी प्रकाशमणि जी, दादी जानकी जी, दादी हृदय मोहिनी जी इत्यादि बहनों ने मातेश्वरी जगदम्बा जी के सान्निध्य में रहकर मानवता की सेवा का पाठ सीखा। इन महान आत्माओं ने भारतीय संस्कृति, सभ्यता एवं मानवीय मूल्यों के आध्यात्मिक शिक्षा को विश्व के 140 देशों में पहुँचाया।
मातेश्वरी जगदम्बा जी आधुनिक युग की वैदिक देवी थीं। उन्हें ईश्वरीय ज्ञान, गुण और शक्तियों को धारण करके लोगों को अनुभव कराने का दिव्य वरदान प्राप्त था। उनके दिखाये गये मार्ग पर चलते हुए ब्रह्माकुमारी संस्था विश्व सेवा का जो महान कार्य कर रही है, यह मातेश्वरी जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
सेवाकेंद्र में आनेवाले भाई बहनें उनके ज्ञान मार्गदर्शन पर चलने का दृढ़ संकल्प लिया।




