आबुराज (माउंट आबू ) राजस्थान। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के राजनीतिक सेवा प्रभाग द्वारा “शांतिपूर्ण समाज के लिए राजनीति में आध्यात्मिकता” विषय पर आयोजित उद्घाटन एवं खुले सत्र में देशभर से आए मुख्यमंत्री, मंत्री, पूर्व मंत्री, जनप्रतिनिधियों तथा ब्रह्माकुमारीज़ की वरिष्ठ राजयोगिनी बहनों ने राजनीति को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़कर विश्वशांति, सुशासन और जनकल्याण का आह्वान किया।

गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज की सेवा है। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि के लिए विश्वास, आत्मविश्वास, कार्यकुशलता, चरित्र और प्रभावी संवाद सफलता की मूल पूंजी हैं। आध्यात्मिकता इन सभी गुणों को विकसित करती है और नेतृत्व को जनहित के प्रति समर्पित बनाती है। उन्होंने कहा कि “देश प्रथम और जनता प्रथम” की भावना से किया गया कार्य ही सच्ची राजनीति है। उन्होंने युवाओं से मूल्यनिष्ठ नेतृत्व अपनाने का आह्वान किया।

तेलंगाना सरकार की पंचायती राज, ग्रामीण विकास, ग्रामीण जलापूर्ति एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती धनसारी अनसूया ‘सीतक्का’ ने अपनी संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा साझा करते हुए कहा कि उन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़कर शिक्षा और आध्यात्मिकता का मार्ग अपनाया। उन्होंने कहा कि “बंदूक नहीं, शिक्षा और आध्यात्मिकता ही समाज और राष्ट्र में स्थायी परिवर्तन ला सकती है।” राजनीति सेवा का माध्यम है, सत्ता का नहीं। उन्होंने कहा कि राजयोग मन को शांत कर निर्णयों को करुणामय और न्यायपूर्ण बनाता है।
ओम शांति रिट्रीट सेंटर, नई दिल्ली की निदेशिका राजयोगिनी बी.के. आशा बहन ने कहा कि भारत की आत्मा उसकी आध्यात्मिकता है। प्राचीन भारत में नेतृत्व का आधार पवित्रता, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना थी। उन्होंने कहा कि आज के नेतृत्व के लिए विश्वास, आत्मविश्वास,कार्यकुशलता, चरित्र तथा संवाद कौशल सफलता के पाँच स्तंभ हैं। सिकंदर और भारतीय संत का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी आध्यात्मिक चेतना रही है। उन्होंने राजयोग को आत्मशक्ति जागृत करने का श्रेष्ठ माध्यम बताया।
ब्रह्माकुमारीज़ के महासचिव बी.के. करुणा भाई जी ने कहा कि राजयोग का अर्थ है आत्मा की सात शक्तियों को जागृत करना। जब व्यक्ति स्वयं में परिवर्तन लाता है, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र में स्थायी परिवर्तन संभव होता है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वे आध्यात्मिक मूल्यों को अपने सार्वजनिक जीवन का आधार बनाएं।
राजनीतिक सेवा प्रभाग कीअध्यक्षा राजयोगिनी बी.के. लक्ष्मी बहन (मैसूर) ने कहा कि राजनीति का वास्तविक स्वरूप लोकमंगल और मानव सेवा है। आध्यात्मिकता जनप्रतिनिधियों में निष्पक्षता, करुणा और सेवा-भाव का विकास करती है, जिससे समाज में विश्वास और सद्भाव बढ़ता है।

बिहार के पूर्व मंत्री श्री विक्रम कुंवर ने कहा कि पहले की राजनीति में आध्यात्मिकता के संस्कार अधिक थे, इसलिए समाज अधिक शांत और मूल्यनिष्ठ था। आज पुनः राजनीति को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राजयोग आत्मा की शक्तियों को जागृत कर व्यक्ति को समाज परिवर्तन का माध्यम बनाता है।

महाराष्ट्र के पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री लक्ष्मण राव डोपले ने कहा कि आज राजनीति अनेक चुनौतियों से घिरी हुई है। ऐसे समय में ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा चरित्र निर्माण, मूल्यनिष्ठ नेतृत्व और आध्यात्मिक जागृति के लिए किए जा रहे प्रयास अत्यंत सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि सेवा, नैतिकता और आध्यात्मिकता ही स्वस्थ लोकतंत्र की आधारशिला हैं।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ उपाध्यक्षा राजनीति सेवा प्रभाग बी.के. ऊषा बहन ने सभी अतिथियों एवं प्रतिनिधियों को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया, जिससे सभागार में गहन शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण निर्मित हुआ।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन राजयोगिनी बी.के. सपना बहन देहली ने किया तथा अंत में मैसूर के श्री रंगनाथ भाई ने सभी अतिथियों, जनप्रतिनिधियों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।




