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धमतरी: दीप प्रज्वलित कर परमात्मा पिता की स्मृति में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ

धमतरी,छत्तीसगढ़: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय धमतरी द्वारा शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में शिक्षकों का श्रीफल , शाल एवं तिलक से सम्मान किया गया l

मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित ब्रह्माकुमारी नवनीता बहन ने कहा हमारे जीवन में 5 प्रकार के गुरु होते हैं l प्रथम गुरु तो माँ ही होती हैं जो एक बच्चे को सांचे में ढालती है l दूसरे गुरु है अध्यापक जो हमे ज्ञानार्जन कर स्वावलंबी बनाते हैं जिससे हमारा भविष्य सैफ होता है l तीसरे गुरु जिनके अंदर अनेक प्रकार की कलाएं होती है और दूसरों को सिखाते हैं l चौथे गुरु वह मनुष्य जो भगवान का मार्ग दिखाते हैं l पांचवे गुरु है स्वयं भगवान जिनके बिना हमारी गति और सद्गति नहीं हो सकती l

  माननीय भ्राता डॉक्टर संदीप सिंह जी प्रोफेसर चीफ ऑफ Supritendent पॉलीटेक्निक महाविद्यालय धमतरी ने कहा शिक्षा एक ऐसा आयाम है जो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है ,अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाता है l मेडिटेशन अगर सीखना चाहते हैं तो गुरु की सख्त आवश्यकता होतो है और सभी स्कूल में इसे विषय वस्तु के रूप में पढाना चाहिए l आज इस मेडिटेशन की विद्यार्थियों को सख्त आवश्यकता है l क्यूंकि विद्यार्थियो की एकाग्रता कम होती जा रही है और तनाव बढ़ता जा रहा है l teacher’s को शिक्षाप्रद कहानी से बहुत सुन्दर शिक्षा दी l

माननीय भ्राता श्री रबीन्द्रनाथ मिश्रा जी जिला शिक्षा अधिकारी जिला धमतरी ने कहा आज अध्यापक शून्य होते जा रहे हैं l सभी शिक्षक अपने अंदर पूछे मेरे अन्दर का शिक्षक जिंदा है? राष्ट्र के निर्माण में शिक्षक की भूमिका है और रहेगी l अपने आपको हमे अध्यापक बनाना पड़ेगा l मिश्रा जी ने कहा मुझे सबकुछ पसंद है लेकिन विद्यार्थियों के साथ पढ़ाई के प्रति अन्याय पसंद नहीं है l हम अध्यापकों की ड्यूटी सिर्फ 10 से 5 नहीं है , हम 24 घंटा ड्यूटी पर है l मेरी एक ही इच्छा है मेरे बच्चों को अच्छी शिक्षा दीजिए l हम कुछ तो करे l हम सबको ही बदलने की आवश्यकता है l

ब्रह्माकुमारीज के धमतरी जिले की मुख्य संचालिका सरिता दीदी जी ने कहा हम सब चाहते हैं कि हमारा भारत विश्व गुरु बने l भारत की संस्कृति में संस्कार है l संवेदनाओं से भरा हुआ हमारा भारत जो नैतिकता और चरित्र से सम्पन्न है l दीदी ने आगे कहा आप सभी अध्यापक आधारमूर्त है, आप जो सिखाएँगे, जो शिक्षा का फाउंडेशन डालेंगे वहीं बच्चे की जीवन रूपी बिल्डिंग खड़ी होगी l शिक्षक एक रोशनी होती है जिसके द्वारा बच्चा सहज ही आगे बढ़ता है l आजकी शिक्षा कहा जा रही हैं केवल डिग्री तक ही बची है व्यवहार तक नहीं रही l आप शिक्षको को एक ऐसा सकारात्मक माहौल तैयार करना पड़ेगा जिससे बच्चों का भविष्य उज्वल बने l

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