तपस्या से संपूर्णता की ओर बढ़ने का आह्वान, सूरज भाई बोले- दुनिया को आज पवित्र आत्माओं की जरूरत**आनंद सरोवर में योग तपस्या भट्टी, 2 हजार से अधिक भाई-बहनों ने लिया भाग; दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ*
दुर्ग (छत्तीसगढ़) – “संसार को आज पवित्र आत्माओं की आवश्यकता है। भटकते हुए मन को शांत कर देना सबसे बड़ा पुण्य कार्य है। संगमयुग का एक-एक क्षण अमूल्य है, इसलिए हर पल यह देखना होगा कि हमारा समय किन बातों में बीत रहा है।” यह संदेश ब्रह्माकुमारीज के वरिष्ठ राजयोगी एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शक सूरज भाई ने बघेरा स्थित आनंद सरोवर में आयोजित एक दिवसीय ‘तपस्या से संपूर्णता की ओर’ योग तपस्या भट्ठी में दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सूरज भाई, गीता दीदी, रुपेश भाई ब्रह्माकुमारी दुर्ग की मुख्य संचालिका रीटा दीदी वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी रूपाली दीदी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। नन्ही कुमारियों ने मनोहारी नृत्य प्रस्तुति से अतिथियों का स्वागत किया, वहीं ब्रह्माकुमारी बहनों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया। इस अवसर पर दुर्ग शहर सहित ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों से 2 हजार से अधिक भाई-बहनों ने योग तपस्या भट्ठी में सहभागिता की।

सूरज भाई ने कहा कि श्रेष्ठ तपस्वी बनने के लिए केवल ज्ञान सुनना पर्याप्त नहीं, बल्कि अटेंशन और अभ्यास को जीवन का हिस्सा बनाना होगा। वर्तमान समय में मनुष्य के स्वभाव और संस्कारों में आई गिरावट का परिणाम समाज में अशांति और दुःख के रूप में दिखाई दे रहा है। ऐसे समय में परमात्मा की छत्रछाया में रहकर अपने विचार, संस्कार और कर्मों को श्रेष्ठ बनाना ही वास्तविक तपस्या है।
उन्होंने कहा कि जीवन की सर्वोच्च स्थिति परमात्मा की स्मृति में स्थित होकर देह का त्याग करना है। आत्मा में सदैव श्रेष्ठ विचार और सकारात्मक भावनाएं भरते हुए संगमयुग के अमूल्य समय का श्रेष्ठ उपयोग करना चाहिए।
*शिक्षा को जीवन में उतारना ही सच्चा पुरुषार्थ : गीता दीदी*
गीता दीदी ने कहा कि परमात्मा की शिक्षाओं को केवल सुनना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन में उतारना ही सच्चा पुरुषार्थ है। मन, वचन और कर्म से सभी को सुख देना ही जीवन का लक्ष्य होना चाहिए। जब हमारे गुण और कर्म परमात्मा की शिक्षाओं के अनुरूप होने लगेंगे, तब जीवन में दिव्यता दिखाई देने लगेगी।
*तोड़ना-मोड़ना-जोड़ना बने जीवन परिवर्तन का मंत्र : रुपेश भाई*
रुपेश भाई ने योग भट्ठी को आत्मिक शक्ति प्राप्त करने और लक्ष्य की स्मृति को मजबूत करने का माध्यम बताया। उन्होंने ‘तोड़ना, मोड़ना और जोड़ना’ को जीवन परिवर्तन का सूत्र बताते हुए कहा कि सर्वे के साथ कर्म बंधन है उसे तोड़ना, पुराने नकारात्मक स्वभाव और संस्कारों है, उन्हें सकारात्मक दिशा में मोड़ना और अपने सभी संबंध परमात्मा से जोड़ना है।
उल्लेखनीय है कि सूरज भाई जी को उनके आध्यात्मिक सेवाओं के लिए *इंटरनेशनल सोशल आइकन अवार्ड 2014, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी लंदन द्वारा नेल्सन मंडेला अवार्ड 2023, गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा स्पिरिचुअल लीडरशिप अवार्ड, विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ द्वारा विद्यावाचस्पति (पी एच डी) मानद अवार्ड आदि द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।* पीस ऑफ़ माइंड चैनल द्वारा प्रसारित समाधान कार्यक्रम के द्वारा आप अनेको लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
ब्रह्माकुमारीज दुर्ग की मुख्य संचालिका रीटा दीदी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए योग तपस्या भट्ठी को आत्मिक शक्ति और श्रेष्ठ संस्कारों की प्राप्ति का अवसर बताया। सावन मास की आध्यात्मिक भावना के अनुरूप आयोजित इस योग भट्ठी में दिन भर राजयोग, आत्मचिंतन और तपस्या का वातावरण बना रहा। उपस्थित भाई-बहनों ने परमात्म स्मृति में योग साधना करते हुए आत्मिक शांति, शक्ति और सकारात्मक जीवन का संकल्प लिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी रूपाली बहन जी ने किया।



