जन्माष्टमी महोत्सव एवं शिक्षक सम्मान समारोह में श्रीकृष्ण के पवित्र, निर्विकार, अहिंसक एवं मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप पर हुआ प्रकाश
रीवा,मध्य प्रदेश। ब्रह्माकुमारीज़ सब ज़ोन, द्वारा शांतिधाम, झिरिया में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव एवं शिक्षक सम्मान समारोह का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप, भारतीय संस्कृति, श्रेष्ठ संस्कारों तथा समाज निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पर विशेष प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन के उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकसभा सांसद श्री जनार्दन मिश्र ने की।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ रीवा सेवाकेंद्र की संचालिका बीके लता दीदी ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन हमें पवित्रता, प्रेम, शांति, सत्य और श्रेष्ठ संस्कारों को अपनाने की प्रेरणा देता है। जन्माष्टमी केवल उत्सव मनाने का पर्व नहीं, बल्कि अपने जीवन में दिव्य गुणों को धारण करने और आत्मिक शक्ति को जागृत करने का अवसर है।
इसके पश्चात उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने वाले और श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण करने वाले राष्ट्र निर्माता हैं। ज्ञान के साथ संस्कार और चरित्र निर्माण भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज समाज को ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है, जो व्यक्ति को ज्ञानवान बनाने के साथ-साथ संस्कारवान, चरित्रवान, अनुशासित और जिम्मेदार नागरिक बनाए।
श्री राजेंद्र शुक्ल ने श्रीकृष्ण के आध्यात्मिक स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में श्रीकृष्ण पवित्रता, प्रेम, शांति, आनंद, साहस, सत्य, ज्ञान और मर्यादा के प्रतीक हैं। ब्रह्माकुमारीज़ की आध्यात्मिक दृष्टि से श्रीकृष्ण केवल एक धार्मिक पात्र नहीं, बल्कि सतयुगी स्वर्णिम संसार के प्रथम राजकुमार तथा सम्पूर्ण गुणों और कलाओं से सम्पन्न दिव्य स्वरूप के प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण को 16 कला सम्पूर्ण, सर्वगुण सम्पन्न, सम्पूर्ण पवित्र, निर्विकार, अहिंसक एवं मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उनका स्वरूप हमें यह प्रेरणा देता है कि मनुष्य अपने जीवन में पवित्रता, श्रेष्ठ विचार, आत्मिक शक्ति, प्रेम और सद्भावना को धारण कर अपने व्यक्तित्व को श्रेष्ठ बना सकता है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को केवल बाहरी उत्सव तक सीमित न रखें, बल्कि अपने अंदर के विकारों पर विजय प्राप्त कर श्रेष्ठ संस्कारों को जन्म दें। काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और नशे जैसी बुराइयों से मुक्त होकर जब मनुष्य अपने जीवन में पवित्रता और आत्मिक शक्ति को धारण करता है, तभी वास्तविक अर्थों में श्रीकृष्ण के आदर्शों को जीवन में उतारना संभव है।
उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ जैसी संस्था आज के समय में समाज के लगभग हर सकारात्मक अभियान में अपनी निस्वार्थ सेवाओं के माध्यम से सहभागी बनकर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। चाहे नशामुक्ति का अभियान हो, स्वच्छता एवं स्वस्थ समाज की दिशा में प्रयास हों, महिला सशक्तिकरण, युवा जागृति, मूल्य शिक्षा, तनावमुक्त जीवन, पर्यावरण संरक्षण, आध्यात्मिक जागृति अथवा रक्तदान महादान जैसे मानव सेवा के अभियान, ब्रह्माकुमारीज़ बहनें सेवा और सहयोग की भावना से निरंतर अपना योगदान दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि संस्था की विशेषता यह है कि वह केवल समस्याओं पर चर्चा नहीं करती, बल्कि मनुष्य के विचारों और संस्कारों में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करती है। जब विचार श्रेष्ठ बनते हैं तो कर्म श्रेष्ठ होते हैं और श्रेष्ठ कर्मों से श्रेष्ठ समाज का निर्माण होता है। ब्रह्माकुमारीज़ का राजयोग एवं आध्यात्मिक ज्ञान व्यक्ति को स्वयं से जुड़ने, परमात्मा से संबंध स्थापित करने और अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि नशामुक्त भारत के लिए चलाए जा रहे 10 करोड़ नशामुक्ति संकल्प महाअभियान जैसे प्रयास समाज में नई जागृति पैदा कर रहे हैं। ऐसे अभियानों में आध्यात्मिक संस्थाओं की सहभागिता समाज को भीतर से मजबूत करने का कार्य करती है। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा समाज में भाईचारा, शांति, प्रेम, सद्भाव और आत्मिक जागृति का संदेश पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तविक सुरक्षा बाहर से नहीं, बल्कि मन की पवित्रता और आत्मिक शक्ति से आती है। जब व्यक्ति स्वयं को आत्मा समझकर परमात्मा से अपना संबंध जोड़ता है, तब उसके विचारों में शांति, व्यवहार में प्रेम और जीवन में श्रेष्ठता आने लगती है। यही आध्यात्मिक शिक्षा आज के तनावपूर्ण और चुनौतीपूर्ण समय में समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने जन्माष्टमी के अवसर पर उपस्थित सभी लोगों से आह्वान किया कि श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर नशामुक्त, संस्कारवान, पवित्र एवं श्रेष्ठ समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।
इस दौरान कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे लोकसभा सांसद श्री जनार्दन मिश्र ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को श्रेष्ठ, चरित्रवान और संस्कारवान नागरिक बनाना है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन हमें पवित्रता, प्रेम, सत्य, शांति और श्रेष्ठ मर्यादाओं को अपनाने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम में बीके लता दीदी ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आध्यात्मिक रहस्य पर भी प्रकाश डालते हुए आत्मा-परमात्मा के संबंध, परमात्मा शिव के निराकार स्वरूप तथा गीता के वास्तविक भगवान परमात्मा शिव के आध्यात्मिक ज्ञान की जानकारी दी। उन्होंने श्रीकृष्ण को सतयुगी स्वर्णिम संसार की पवित्रता एवं सम्पूर्णता का प्रतीक बताते हुए उनके श्रेष्ठ गुणों को जीवन में धारण करने का आह्वान किया।
मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम का मंच संचालन सुप्रसिद्ध गायक नितेश श्रीवास्तव जी ने अपनी काव्यात्मक शैली एवं मनमोहक वाणी के माध्यम से किया। उनके प्रभावी एवं आकर्षक मंच संचालन ने पूरे कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा। उनकी टीम द्वारा गीतों के माध्यम से सुंदर एवं भावपूर्ण सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्हें उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा।
कार्यक्रम में सीमा श्रीवास्तव की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। उनकी टीम तथा अन्य सम्माननीय बहनों द्वारा भी सुंदर गीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रस्तुत की गईं। आध्यात्मिक गीतों और मनमोहक प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय एवं आनंदमय बना दिया।
समारोह में 7 वर्षीय प्रियांशी सिंह ने अपनी अद्भुत कला एवं प्रतिभा के माध्यम से योग की मनमोहक प्रस्तुति दी। नन्हे-मुन्ने बाल कलाकारों की प्रस्तुतियों, सुंदर झांकियों, भजनों, नृत्य, नाटक तथा आध्यात्मिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। विशेष रूप से श्री लक्ष्मी-नारायण की झांकी एवं सुंदर आध्यात्मिक म्यूजियम लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।
शिक्षकों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को सम्मानित करते हुए शिक्षा, संस्कार एवं समाज निर्माण में उनके महत्वपूर्ण योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक समाज के भविष्य के निर्माता हैं और उनके माध्यम से आने वाली पीढ़ी में ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन एवं चरित्र का निर्माण होता है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. स्वतंत्र सिंह, केवीएम स्कूल के डायरेक्टर; डॉ. नागेश त्रिपाठी, विभागाध्यक्ष, संगीत विभाग, टीआरएस कॉलेज रीवा; डॉ. एस.के. पांडेय; श्री नारायण डिगवानी; डॉ. आनंद मिश्रा तथा वरिष्ठ समाजसेवी श्री अवधेश श्रीवास्तव उपस्थित रहे।
यह आयोजन कला एवं संस्कृति प्रभाग की जोनल कोऑर्डिनेटर एवं भोपाल जोन राजयोग भवन की डायरेक्टर राजयोगिनी निर्मला दीदी के निर्देशन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में रीवा सेवाकेंद्र की संचालिका बीके लता दीदी, चाकघाट उपसेवाकेंद्र की संचालिका बीके डॉ. अर्चना, इंदिरानगर उपसेवाकेंद्र की प्रभारी बीके नम्रता, मऊगंज जिला उपसेवाकेंद्र की प्रभारी बीके पूर्णिमा, बैकुंठपुर केंद्र की प्रभारी बीके नीलू, हनुमना केंद्र की प्रभारी बीके खुशबू, बीके शांति, बीके उर्मिला, बीके मीनाक्षी, बीके ज्योति, बीके पूजा, आईटीआई ट्रेनर बीके रितिका, आईटीआई ट्रेनर बीके कृतिका, आईटीआई प्राचार्य बीके दीपक तिवारी, बीके मंजू बहन, बीके ज्ञानवती पांडे, पूर्व मध्यांचल ग्रामीण बैंक मैनेजर बीके आर.वी. पटेल, पूर्व मध्यांचल ग्रामीण बैंक मैनेजर शिखा चिटके सहित बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमारी बहनें, भाई, शिक्षक, कलाकार, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
बीके विजय देव भाई ने दिलाया नशामुक्ति का संकल्प
समारोह के अंत में बीके विजय देव भाई ने उपस्थित जनसमूह, अतिथियों, शिक्षकों एवं बाल कलाकारों को नशामुक्त जीवन का संकल्प दिलाया। सभी ने एक स्वर में नशे से दूर रहने, स्वस्थ एवं संस्कारवान जीवन जीने तथा समाज को नशामुक्त बनाने में अपना योगदान देने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम ने श्रीकृष्ण के दिव्य आदर्शों, शिक्षक के महत्व तथा आध्यात्मिक मूल्यों को समाज जीवन से जोड़ते हुए पवित्रता, संस्कार, भाईचारे, नशामुक्ति और मानव सेवा का प्रभावी संदेश दिया।














