ज्वालामुखी स्वरूप यानी ऐसी पॉवरफुल याद, योग और तपस्या हो। ऐसी स्थिति पॉवरफुल और शीतला स्वरूप के संतुलन वाली हो। इसके लिए धैर्यवत हैं तो शीतल हैं। बहुत अच्छा है, सब ठीक है… ऐसे करते, कहते आगे बढ़ते-बढ़ाते रहो। कोई भी अच्छी फीलिंग व खराब फीलिंग हो तो वो नज़रों से पता चल जाता है। जिसके पास बाबा के लिए सच्ची दिल है और बाबा हमको जो बनाना चाहता है उसके बिगर और कोई तमन्ना नहीं है, और कोई इच्छा नहीं है तो बाबा की नज़रों से निहाल हो जाएंगे। जो बाबा की नज़रों से निहाल होने का अनुभव करता है वो कभी बेहाल नहीं होता है। तो हमारी भी स्थिति ऐसी हो जो हमारे सामने आए वो नज़र से निहाल जो जाए। सबके दिल से शुक्रिया निकले।
जो बात दिल को टच होती है, अच्छी हुई तो भूलेगी नहीं और बुरी हुई तो भूलेंगे नहीं, दिल ऐसी है। इसलिए दिल में कुछ बात रखो ही नहीं, नहीं तो फिर दिल बार-बार उधर जाती रहेगी। भले उसने मेरे साथ क्या भी किया हो, अपना पार्ट बजाया, मेरे लिए एक पेपर आया और उसमें बाबा ने पास होने की शक्ति दे दी है। इसके बजाए अन्दर अगर वैर भाव हुआ तो भय जरूर होगा। पर जिसके अन्दर किसी भी आत्मा के प्रति ज़रा भी ग्लानि नहीं है तो वो अपने लिए सेफ्टी है। कई आत्माएं ऐसी हैं जो थोड़ा वैर भाव का संस्कार होता है, समझो, किसी ने मेरे को किसके लिए भी इशारा दिया कि इनसे सम्भलना। तो फौरन जाके मैं उसी को बताती हूँ कि तेरे लिए फलाने ने मेरे को ऐसे कहा है… अब यह भी कोई बुद्धि है? उन्होंने तो अपनी शुभ भावना से प्यार के कारण सावधानी दी कि उसके संग में नहीं आना। लेकिन मैं जाकर उसको यह सब बातें बताऊं कि उन्होंने आपके लिए यह इशारा दिया… तो कईयों की बुद्धि जो है वो अच्छी बात ग्रहण करने के बजाए ऐसी बातें ग्रहण करती हैं तो दूसरे को भी वही बात सुनाते हैं, यह बहुत ही नुकसानकारक बात है।
जब तक डायरेक्ट ईश्वर की शक्ति मुझ आत्मा में नहीं आई है तब तक मेरे विकर्म विनाश नहीं हुए हैं। तो मेरे किए हुए पाप जो हैं उसे बाबा के प्यार से, ध्यान से, योग से मैंने उसे नाश नहीं किया। दूसरा अभी भी चलते-फिरते ऐसे कर्म होते हैं, ऐसी वाणी निकलती है जो उसको यह पता ही नहीं चलता है कि यह भी कोई विकर्म हो रहे हैं। इसलिए बाबा रोज़ मुरली में समझाता है कि बच्चे कोई ऐसा गलत काम नहीं करो। कुछ भी कारण है, पर गलती तो मैंने की, शक्ल तो मैंने ऐसी बनाई, कम्पलेंट तो मैंने किसकी की…। कभी भी किसकी कम्पलेंट मन में रखना, मुख से बोलना माना यह भी दिखाया कि मैं क्या हूँ और मेरे अन्दर क्या है, वो खुद अपने मुख से बता दिया। जो ज़रा-सा भी औरों की फीलिंग ले करके बाबा को सुनाता तो बाबा क्या करेगा? बाबा तो यही कहता है बच्ची तुम स्व को देख। और जिन भी आत्माओं से कनेक्शन है उसकी अच्छाई को देखो, तो तुम अच्छी बन जाएगी। मैंने अगर उसकी अच्छाई को न देखा तो मैं कभी अच्छी नहीं बनेगी, यह पक्का समझ जाओ।
अन्दर से अपने को समझा करके, सीखा करके सुधार कर लो तो वो भी सब देखेंगे और कहेंगे वंडर है, इसने पुरुषार्थ किया है, मैंने बहुत चेंज देखी है। अब मुझे भी ऐसा होना है। तो किसका कुछ भी छिपता नहीं है।
किसी की कम्प्लेंट न कर कम्प्लीट बनें
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