मुख की भाषा तो कॉमन भाषा है लेकिन नैनों की भाषा, भावना की भाषा, संकल्प की भाषा, यह तीन प्रकार की भाषा रुहानी योगी जीवन की भाषा है। जितना-जितना अंतर्मुखी, स्वीट साइलेन्स स्वरूप में स्थित होते जाएंगे, उतना इन तीन भाषाओं द्वारा सर्व आत्माओं को अनुभव कराएंगे। यह तीन अलौकिक भाषाएं बहुत शक्तिशाली हैं। मुख की भाषा सुनकर और सुनाकर मैजॉरिटी थक गए हैं, इसलिए यह तीन भाषाओं का भाषण कर सुख की गहरी अनुभूति कराके दु:ख के बंधनों से मुक्त कराओ। कितना भी कोई दूर हो, कोई साधन नहीं हो लेकिन संकल्प की भाषा द्वारा किसी को भी मैसेज दे सकते हो। अंत में, यह सारे साधन जब फेल हो जाएंगे, तब यही संकल्प की भाषा काम में आएगी और यह साइलेन्स का साधन काम में आएगा लेकिन कोई भी कनेक्शन जोडऩे के लिए सदा लाइन क्लियर चाहिए। जितना-जितना एक बाप और उन्हीं द्वारा सुनाई हुई नॉलेज में व उसी नॉलेज द्वारा सेवा में सदा बिज़ी रहने के अभ्यासी होंगे उतना श्रेष्ठ संकल्प होने के कारण लाइन क्लियर रहेंगी। तीन मिनट के भाषण का सार सेकंड में संकल्प की भाषा से अनुभव करा सकते हो। सेकंड में जीवनमुक्ति का जो गायन है, वह अनुभव करा सकते हो।

