भारत की गौरवशाली संस्कृति मूलतः कृषि पर ही आधारित है। संस्कृति को अंग्रेजी में ‘कल्चर’ कहते हैं और यह अंग्रेजी का ‘कल्चर’ (Culture) शब्द लैटिन भाषा के ‘Colere’ शब्द से बना है जिसका अर्थ है ‘जोतना’ अथवा ‘भूमि पर हल चलाना’ (To cultivate or to till the soil). Culture शब्द ही Agriculture शब्द का जनक भी है।
संस्कृति का अर्थ: संस्कृति = सम+कृति, दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘सम’ का अर्थ है ‘अच्छा’ तथा ‘कृति’ शब्द का अर्थ है ‘करना’ अर्थात संस्कृतिमाना अच्छा करना। यदि सरल शब्दों में हम संस्कृति को परिभाषित करें, तो हम यह कह सकते हैं कि “मनुष्य ने सामूहिक जीवन को आनन्ददायक और कल्याणकारी बनाने के लिए जिन प्रथाओं को विकसित किया है, उन्हें समग्र रूप से हम संस्कृति कहते हैं।“
कृषि संस्कृति: सभ्यता के विकास के साथ मानव ने खेती करना सीखा, जिसके कारण खेती के साथ ही सभ्यता और संस्कृति का संबंध स्थापित हो गया । कालांतर में “सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्।”, यह भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र बन गया। इस संस्कृति में केवल मानव ही नहीं, सभी के सुखी होने की कामना की गई है, जिसमें प्रकृति, पशु, पक्षी सहित पूरा जीव जगत शामिल है।
सुखमय जीवन के लिए प्रकृति से प्रेम: इस सृष्टि पर प्रकृति और पुरुष का खेल चलता है। यदि ये दोनों अपनी सतोप्रधान अवस्था में हैं, तो खेल सुखमय होगा। इस मूल तत्व को ध्यान रखते हुए भारतीय कृषि संस्कृति को दिशा देने वाले सभी ग्रंथों, श्रृग्वेद, कृषि पराशर, वृक्षायुर्वेद, कृषि गीता इत्यादि ने प्रकृति और पुरुष के प्रेमपूर्ण सम्बन्ध को विशेष महत्व दिया है। होली, दीवाली, लोहड़ी, पोंगल, बिहु आदि जितने भी त्यौहार बने वे भी सभी कृषि और प्रकृति प्रेम पर आधारित हैं। भारतीय कृषि के मूल ग्रन्थ “कृषि पाराशर” में कहा गया है कि “कृषिर्धन्या कृषिर्मेध्या जन्तूनां जीवनं कृषि।” अर्थात् कृषि सम्पत्ति और मेधा प्रदान करती है तथा कृषि ही मानव जीवन का आधार है। कृषि संस्कृति ने भारत को सोने की चिड़िया कैसे बनाया, यह हम अगले अंक में पढ़ेंगे।
क्रमशः…….

बद्री विशाल तिवारी, त्रिपाठी नगर, लखनऊ।
(लेखक कृषि विभाग उत्तर प्रदेश के पूर्व सहायक निदेशक हैं, जिन्हें किसानों के कल्याण
के लिए विशेष योजनाएं तैयार कर क्रियान्वित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा
सम्मानित किया गया है, 37 वर्ष से ईश्वरीय ज्ञान एवं राजयोग का अभ्यास कर रहे हैं,
कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग (RERF) की राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य हैं)


