प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का जनक है भारत – बी के शांता बहन
हाथरस, उत्तर प्रदेश। दैविक दैहिक भौतिक तापा राम राज्य नहीं काहू व्यापा | रामचरित मानस की चोपाई यह ही तो बता रही है कि सतयुग तो छोडिये , त्रेता युग में भी राम राज्य में किसी प्रकार के ताप या बीमारी आदि नहीं होती थी | परमपिता परमात्मा ने तो एक ऐसी दुनिया बनाई थी जहाँ सब सुखी थे, कोई प्रकार का दुःख नहीं था | अब कल्पान्त में फिर से शिव बाबा आदि सनातन देवी देवता धर्म की पुनः स्थापना करा रहे हैं जिसे सतयुग कहा जाता है , जहाँ राजा , प्रजा सब एक सामान होगी | जहाँ ना कोई बीमार होगा ना रोगी |

उन्होंने कहा कि जब इन्सान देवत्व से दूर होकर भोगी बन जाता है तो रोगी बन जाता है| ऐसे में उनके इलाज की जरुरत होती है , तभी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का जनम होता है , जिसका जनक भारत ही होता है| हालत यह हो जाते हैं कि ज्यों ज्यों दवा की मर्ज बढ़ता ही गया | महात्मा गाँधी जी भी रामराज्य चाहते थे| आइये हम सब मिलकर ऐसे सतयुगी भारत के निर्माण में परमपिता परमात्मा के सहयोगी बनें | कुछ इस प्रकार की अभिव्यक्ति प्रजापिता ब्रहमाकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के अलीगढ रोड स्थित आनंदपुरी कॉलोनी केंद्र की राजयोग शिक्षिका बी के शांता बहन ने हाथरस के प्रसिद्ध मेला श्री दाउजी मेला में आयुर्वेद शिविर में आयोजित जनपदीय आयुर्वेद सम्मलेन में व्यक्त किये |
इससे पूर्व सम्मलेन का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर सम्मलेन अध्यछ वैद्य रमेश चन्द्र उपाध्याय, संयोजक वैद्य ठाकुर सिंह सोलंकी, महामंत्री वैद्य प्रेम रावत, डॉक्टर विष्णु , डॉक्टर अवधेश आदि ने किया|
सम्मलेन में पधारे विभिन्न वरिष्ठ वैद्यो ने जनपदीय आयुर्वेद सम्मलेन में भारत की प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा के लाभ गिनाये| आयुर्वेद के जनक भगवन धन्वन्तरी रहे हैं | सभी का मानना था कि और विभिन्न चिकित्सा पद्धति से तुरंत लाभ तो दिखाई देता है लेकिन उसके बाद अनेक अन्य बीमारियों का जन्म हो जाता है | शरीर बीमार ही न हो इसके लिए नियमित योग आसन , ध्यान के साथ शाकाहार का उपयोग जरुरी है |
इस अवसर पर ब्लाक प्रमुख रामेश्वर उपाध्याय ने भी सहभगिता की और भारत की प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को अपनाने का आव्हान किया | इस अवसर पर ब्रहमाकुमारी संगठन की और से बी के पूजा बहिन, गजेन्द्र भाई सहित आयुर्वेद प्रेमी तथा अनेक गणमान्य जन भी उपस्थित थे |




