मुख पृष्ठआजादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओरबासबारी: राष्ट्रीय शांति और स्व उन्नति हेतु राजयोग साधना जरुरी– भगवान भाई

बासबारी: राष्ट्रीय शांति और स्व उन्नति हेतु राजयोग साधना जरुरी– भगवान भाई

बासबारी (विराटनगर) नेपाल: दूसरों की विशेषताएं देखने और धारण करने में ही हमारी आत्मा की उन्नति होती है। दूसरों के अवगुण को देखकर अगर हम उनका चिंतन-मनन करते हैं और उन्हें जगह-जगह फैलाते हैं, तो वे पलट कर हमारे पास ही आ जाते हैं और हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। आत्मचिंतन उन्नति की सीढ़ी है, तो पर चिंतन पतन की जड़ है।| उक्त उदगार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय माउंट आबू राजस्थान से आये हुए बी के भगवान भाई ने कहे | वे  स्थानीय ब्रह्माकुमारी राजयोग सेवाकेंद्र पर राष्ट्रिय शांति और स्व उन्नति हेतु एक दिवसीय राजयोग साधना  विषय पर कार्यक्रममें बोल रहे थे |

उन्होंने कहा कि यदि हम स्वयं आंतरिक रूप से रिक्त होंगे तो अपनी रिक्तता को बाहरी तत्वों से भरने के लिए हमेशा दूसरों से कुछ लेने का प्रयास करेंगे, यदि हमार अंतर्मन प्यार, सौहार्द और मैत्री भाव से भरा रहेगा तो हम जगत में प्यार और मैत्री को बाँटते चलेंगे। उन्होंने कहा कि राजयोग के द्वारा ही हम अपने संस्कारों को सतोप्रधान बना सकते हैं। इंद्रियों पर काबू कर सकते हैं। क्रोध मुक्त और तनाव मुक्त रहने के लिए हमें रोजाना ईश्वर का चिंतन, गुणगान करना चाहिए । सकारात्मक चिन्तन से हम जीवन की विपरीत एवं व्यस्त परिस्थितियों में संयम बनाए रखने की कला है।

बूढीगंगा नगरपालिका के वार्ड न 3 के वार्ड अध्यक्ष तिलक मंडल  जी ने कहा कि वर्तमान में मानव  मानसिक रूप से परेशान है, किंतु उसकी यह मानसिक व्यग्रता धीरे-धीरे उसकी संपूर्ण शारीरिक व्यवस्था को विकृत कर देती है। कितनी ही शारीरिक बीमारियाँ केवल मानसिक तनाव, टेंशन, डिप्रेशन, अवसाद अथवा चिंता के कारण उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसे समय यह आध्यत्मिकता हमें तनाव मुक्ति दिलाईगी| भरत केसी जी ने कहा कि वर्तमान में दिन प्रति दिन अपराध बढ़ते जा तहे है वर्तमान में युवाओ को नैतिक शिक्षा द्वारा अपराधो को रोकने हेतु एसी ब्रह्माकुमारी संस्था जैसे आध्यात्मिकता कि आवश्यकता है । चिंता और परेशानी से भरी यही स्थिति मानसिक बिघद्ती जा रही है |आध्यत्मिकता से दिशा मिल जाएगी |

बी के सत्यभावना बहन जी कहा कि सृष्टि सृजनहार परमात्मा शिव नयी सृष्टि बनाने हेतु वर्ष 1937 में प्रजापिता ब्रह्मा के तन में अवतरित हुये। तब ब्रह्मा बाबा ने अपनी पूरी सम्पत्ति ओम मंडली का ट्रस्ट बनाकर विश्व सेवा हेतु समर्पित कर दिया। यही ओम मंडली आगे चलकर ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के नाम से चर्चित हुआ।

स्थानीय ब्रह्माकुमारीज राजयोग सेवाकेंद्र की बी के महालक्ष्मी जी ने कहा कि प्रजापिता ने अनेक आत्माओं को अपना प्यार देकर उसमें शक्तियां भरी एवं उसे सर्व बंधनों से मुक्त कराया। बाबा ने परचिंतन एवं परदर्शन से मुक्त बन परोपकारी बनने की शिक्षा दी। अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया | कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी बहनों ने अतिथियों का  गुलदस्ता और तिलक लगाकर स्वागत किया |

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