बिलासपुर,छत्तीसगढ़। बच्चों का भविष्य संवारने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। शिक्षक स्वयं सकारात्मक रहेंगे, तभी विद्यार्थियों को बेहतर संस्कार और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकेंगे। इसी उद्देश्य से दयालबंद स्थित नेशनल स्कूल में शिक्षकों के लिए विशेष मोटिवेशनल सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यालय प्रबंधन ने ब्रह्माकुमारीज़ को आमंत्रित किया।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज़ बिलासपुर टिकरापारा प्रभारी बीके मंजू दीदी ने शिक्षकों को सकारात्मक सोच, व्यक्तित्व विकास और बच्चों के संस्कार निर्माण के संबंध में प्रेरणादायी मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर बीके गायत्री, बीके पूर्णिमा एवं बीके ईश्वरी भी शिक्षकों के साथ उपस्थित रहीं।
डांट नहीं, प्यार और प्रोत्साहन से निखरेगी बच्चों की प्रतिभा
बीके मंजू दीदी ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते, बल्कि बच्चों के विचारों, संस्कारों और व्यक्तित्व को भी आकार देते हैं। बच्चों की कमियां गिनाने के बजाय उनकी प्रतिभा को पहचानना और उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए। शिक्षक के सकारात्मक शब्द बच्चों में आत्मविश्वास जगाते हैं और उन्हें बेहतर बनने की प्रेरणा देते हैं।
राजयोग से मन रहेगा शांत, व्यवहार बनेगा मधुर
दीदी ने कहा कि राजयोग मेडिटेशन और परमात्म-स्मृति से मन को शांति तथा जीवन को सकारात्मक दिशा मिलती है। शिक्षकों को अपने जीवन में नैतिक मूल्यों, भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक शक्ति को अपनाना चाहिए। नकारात्मक विचारों और पुरानी कड़वाहट को छोड़कर क्षमा एवं शुभभावना की भावना विकसित करनी चाहिए।
कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यालय के संरक्षक श्री राजेंद्र चावला जी ने बीके मंजू दीदी का स्वागत करते हुए उनकी आध्यात्मिक सेवाओं एवं मार्गदर्शन की सराहना की।
सत्र के समापन पर शिक्षकों ने बच्चों को व्यसनों से दूर रखने, समाज में प्रेम और सकारात्मकता फैलाने तथा बिलासपुर को ‘ब्लिसफुल’ यानी आनंदमय बनाने का संकल्प लिया। अंत में दो मिनट के मौन ध्यान एवं परमात्म-स्मृति के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
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