“कर्म में ही मेरा अधिकार है, फल जो भी मिले क्या चिंता करना तो जीवन आनंद से भर जाएगा -पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान
हम अपने अच्छे कर्मों का खाता बढ़ाते जाएं तो जिंदगी आसान हो जाएगी- बीके अनसूया
भोपाल,मध्य प्रदेश। जैसे-जैसे भौतिकता का विकास हुआ है वैसे जिंदगी तो आसान होती गई है। फिर भी हमें बहुत मुश्किल अनुभव होती है। बाहर से तो हमने बहुत विकास कर लिया लेकिन अंदर से चिंता, गुस्सा, तनाव, डर, असुरक्षा इन भावनाओं की वजह से हमें मुश्किल अनुभव होती है। इसे आसान बनाने के लिए मैं कौन और मेरा कौन यह समझना बहुत आवश्यक है। यह शरीर एक गाड़ी है, इसके अंदर मैं एक आत्मा हूं। राजयोग मेडिटेशन हमें इसका अनुभव कराता है। आत्मा के अंदर तीन चीजें हैं – मन, बुद्धि और संस्कार। जब विचार कृति में आता है तो उसे संस्कार कहा जाता है। जो हम देखते हैं, सुनते हैं, बोलते हैं वह हमारे अंदर रिकॉर्ड हो जाता है और इससे ही हमारे संस्कार बनते हैं। जो मैंने किया उसके फल स्वरुप मेरे जीवन में दो चीजें आ रही हैं- सुख या दुःख। मुझे जिंदगी को आसान बनाना है तो दूसरे क्या कर रहे हैं यह देखने के बजाय खुद के कर्मों पर मुझे ध्यान देना होगा। अगर आम चाहिए तो आम का बीज ही बोना पड़ेगा। और आम का बीज है- स्वयं को आत्मा समझना, औरों को आत्मिक प्रेम की भावना से देखना। गलत रास्ते पर चलकर जिंदगी आसान नहीं हो सकती। जब हम अनकंडीशनली अच्छे कर्म करते जाएंगे तो हमारा अच्छे कर्मों का खाता जमा होता जाएगा। शुरू शुरू में यह मुश्किल लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे यह हमारा संस्कार बनता जाएगा। मैं किसका हूं, यह समझना भी आवश्यक है। मैं पिता परमात्मा की संतान हूं। परमात्मा ज्ञान, शांति, रहम और क्षमा के सागर हैं। यह चार गुण कार्यस्थल पर हमें बहुत काम आएंगे। सच्चाई, सफाई और स्पष्टता यह हमारी जिंदगी को बहुत सरल बना देता है। समय पर सोना, समय पर उठना, सभी प्रकार के व्यसनों से दूर रहना, शुद्ध सात्विक आहार ग्रहण करना यह धारणाएं हमारे जीवन को आसान बना देती हैं।
यह कहना था दिल्ली से पधारी मोटिवेशनल स्पीकर एवं यूथ विंग की जोनल कोऑर्डिनेटर बीके अनसूया दीदी का। अवसर था नीलबड़ स्थित सुख शांति भवन के पांचवें वार्षिक उत्सव का। अनुभूति सभागार में चल रहे इस समारोह में आप मुख्य वक्ता के रूप में अपना उद्बोधन प्रस्तुत कर रही थी।
मध्य प्रदेश के लोकप्रिय पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने विषय पर अपने विचार रखें। उन्होंने कहा, “चिंता, तनाव, डर यह जिंदगी को कठिन बना देता है। आखिर हम इस जग में है कितने समय के लिए। यह दुनिया तो धर्मशाला है। हम जितने समय के लिए आए हैं उतने समय कैसे जिए, यही जीवन जीने की कला है। आपने श्रीमद् भागवत गीता में वर्णित सात्विक कर्ता की व्याख्या समझाते हुए कहा, कर्म में ही मेरा अधिकार है, फल जो भी मिले क्या चिंता करना तो जीवन आनंद से भर जाएगा। आपने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि मैंने बचपन से बहनों के साथ अन्याय होते देखा, इसलिए महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम करना शुरू किया। लाड़ली लक्ष्मी से लाडली बहना योजना तक का मेरा राजनीतिक प्रवास संघर्षपूर्ण रहा। अब लाडली बहना को लखपति बहाना बनाना मेरा लक्ष्य है। लोगों की गरीबी की मानसिकता मिटाने के लिए मैं ब्रह्मकुमारी बहनों का जरूर सहयोग लेना चाहूंगा। इन बहनों के अंदर जो उत्साह है उसी के बल से यह सारे समाज को पावन बनाने की सेवा कर रही है।
कार्यक्रम में विधानसभा के मुख्य सचिव श्री अवधेश प्रताप सिंह जी, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति श्री सुनील कुमार गुप्ता, आर्यावर्त विश्वविद्यालय के कुलपति श्री एन के तिवारी एवं भोपाल शहर के गणमान्य प्रबुद्ध जन आदि भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। सभी का शब्द सुमनों द्वारा स्वागत सुख शांति भवन की डायरेक्टर बीके नीता दीदी ने किया। सूत्रसंचालन वरिष्ठ राजयोगी बीके रामकुमार ने किया । कार्यक्रम के अंत में “सुख शांति भवन कुछ कहता है”इस सुंदर नृत्य नाटिका का मंचन किया गया।










