प्रश्न : मेरा नाम प्रियंका है। मैं विरार में रहती हूँ। जब मैं घर से बाहर जाती हूँ तो कुछ लोग गलत टॉन्टिंग करते हैं, लेकिन डर लगा रहता है कि कहीं कोई कुछ कर न दे। मैं शक्ति रूप हूँ, ऐसा अनुभव करती हूँ। लेकिन फिर भी जब घर आती हूँ तो बहुत डरावने विचार मन में आते हैं, क्या करूँ?
उत्तर : ये समस्या अभी बहुत बढ़ गई है। लेकिन अगर डरपोक बनेंगी तो, कुत्ते होते हैं ना उनसे डरके आप भागने लगो तो कुत्ते पीछा करते हैं। अगर खड़े हो जाओ जम के तो सारे कुत्ते भाग जायेंगे। तो थोड़ा निर्भय बनके भी रहना है ताकि उन लोगों को ये महसूस न हो जाये कि ये बहुत डरपोक है। घर से चलते हुए कुछ अभ्यास कर लें सात बार कि मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ। और सर्वशक्तिवान की सर के ऊपर छत्रछाया है। इस गुड फीलिंग में बैठें और इस नशे और स्वमान के साथ घर से बाहर निकलें कि मेरे साथ सर्वशक्तिवान है। वो मेरा बॉडीगार्ड है। तो बाबा के महावाक्य हैं, जहाँ तुम बाप से इस तरह कम्बाइंड रहोगे तो किसी का संकल्प भी नहीं उठेगा कि तुम्हें कुछ करें। तो लोग सब दूर चले जायेंगे, ऐसे बहुतों के अनुभव हैं। फिर उसके बाद कोई दिखाई नहीं दिया आस-पास। ये करके चलेंगी तो भय भी खत्म हो जायेगा और सबकुछ सुरक्षित होगा।
प्रश्न : मैं पिछले छह मास से आपका समाधान प्रोग्राम देख रहा हूँ। राजयोग से मुझे बहुत फायदा भी हुआ है। मैं आपके साथ अपनी एक प्रॉब्लम शेयर करना चाहता हूँ कि मुझे बचपन से ही लोगों से बात करने में डर लगता है, स्पेशियली लड़कियों से। अब मेरे पास बड़ी प्रॉब्लम ये है कि मेरे अन्दर बहुत डर का भाव है और मैं बहुत सेंसिटिव भी हूँ। मैं इससे मुक्त होना चाहता हूँ।
उत्तर : कई बच्चे बचपन से ही शर्मीले नेचर के होते हैं। किसी से बात करते हुए उन्हें बात करना ही ना आये। बल्कि डर जायें और बात क्या करनी थी वो भी भूल जायें। हमारे यहाँ पर बहुतों के एक्सपीरियंस हुए कि ऐसे जब उनकी मनोस्थिति थी तो उनको मैंने सजेस्ट किया कि जब हमारी एग्जीबिशन लगती है ना, स्पिरिचुअल एग्जीबिशन सबको परमात्म संदेश देने के लिए, तब वो समझाया करें सबको। भले छोटा ग्रुप हो, गाँव की माताओं को ही लेकर चलें और धीरे-धीरे आपकी प्रैक्टिस होगी और ये हिचक निकलती जायेगी। और जब सभी से ऐसे कम्युनिकेट करेंगे, उनसे बातचीत जब होगी तो जो भय बना रहता है, या शाई नेचर हो जाती है लड़कों की, कि इससे कैसे बात करूँ ये बड़ा आ गया। इससे बात करने का हौंसला बढ़ेगा। और दूसरा इनको बहुत ज्य़ादा अभ्यास करना चाहिए स्वमान का। मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ और सामने वो जिससे बात कर रहा है वो न स्त्री है, न पुरुष है, न लड़का है, न लड़की है वो तो एक चेतन आत्मा है। ये प्रैक्टिस पहले से ही बढ़ाएं। काल्पनिक रूप से बढ़ाएं घर बैठे भी, कि मैं इससे बात कर रहा हूँ, ये सब आत्माएं हैं। सब भगवान के बच्चे हैं और मैं हूँ मास्टर सर्वशक्तिवान। तो धीरे-धीरे आपका ये शाई नेचर समाप्त हो जायेगा। जो ज्ञान में हैं वो तो ऐसा अभ्यास कर लेंगे। लेकिन जिन्होंने ज्ञान नहीं लिया है तो उन्हें कहीं बगीचे में जाकर भाषण करना चाहिए, इब्राहिम लिंकन की तरह दस मिनट। सब मेरे सामने खड़े हैं और मैं उनको भाषण कर रहा हूँ। और स्वमान की प्रैक्टिस तो सभी कर ही सकते हैं। मैं सर्वशक्तिवान की संतान मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ। ये स्वमान जो है वो एक बहुत सुन्दर फीलिंग है, एक जागृति है। इसको फील करना है, इसको एक्सेप्ट करना है। मैं सर्वशक्तिवान की संतान होने के नाते मैं बहुत पॉवरफुल हूँ। मैं हूँ। मैं कमज़ोर नहीं हूँ। सर्वशक्तिवान के बच्चे कमज़ोर नहीं हो सकते हैं। ये अवेयरनेस, ये डीप फीलिंग हो। जब हम ये स्वमान का अभ्यास करते हैं तो जो पॉवर सुषुप्त अवस्था में है, वो जागृत हो जाएगी। लेकिन जिनसे ये सब नहीं होता तो उनको बैठकर लिख लेना चाहिए 108 बार। अगर 108 बार नहीं लिख सकते तो 21 बार लिख लेना चाहिए। मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ। अगर 21 बार लिखनेे में तीन-चार मिनट लगते हैं और उसमें मन एकाग्र हो जाता है तो शक्तियां वायब्रेट आउट होने लगेंगी और इससे बहुत फायदा होगा। बात अनुभूति की है। एक और चीज़ सब्कॉन्शियस माइंड का प्रयोग है। आँख खुलते ही सात बार याद कर लें मेरी शर्मीली नेचर समाप्त हो गई है। मैं बहुत ओपन हो गया हूँ। मैं सबके सामने अच्छे से बोल सकता हूँ। ये संकल्प तीन-चार-पाँच बार कर लें। तो ये सब सब्कॉन्शियस माइंड उस नेचर को समाप्त करने में बहुत मदद करेगा।
प्रश्न : मैं तीन साल से ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़ी हुई हूँ और मैं डांस के फील्ड में काम करती हूँ। मुझे रोज़ ही लाइव शो देना होता है। जब मैंने शुरुआत की थी तो बहुत अच्छा परफॉर्मेंस करती थी लेकिन धीरे-धीरे मेरी परफॉर्मेंस विक होती जा रही है। इसको मैं कैसे सुधारूं?
उत्तर : बहुत अच्छी एक बात सामने आई है क्योंकि कोई भी डांसर हो या सिंगर हो तो ज़रूर वो चाहेंगे कि ऐसा हो कि दिन-प्रतिदिन निखरती जाये उनकी ये कला। पर अगर किसी के साथ ऐसा होता है कि वो कला थोड़ी डाउन होती जा रही है, लोग लाइक नहीं कर रहे हैं तो अपनी कला को सुधारना चाहिए, और ज्य़ादा प्रैक्टिस करनी चाहिए। वो डांस करना है तो ये ऐसे मग्न होकर डांस करने लगें, अपने घर में प्रैक्टिस करें कि मैं अपना डांस भगवान के प्यार में कर रही हूँ। उसके सामने कर रही हूँ। ये सामने जो गीत चल रहा है वो भी उसकी महिमा का हो। उसको प्रसन्न करने के लिए मैं डांस कर रही हूँ। इससे इनके डांस में और रिफाइननेस आ जाएगी। चमक आ जाएगी। प्रैक्टिस भी बहुत अच्छी है और जब ये स्टेज पर जायें तो तीन बार याद कर लें कि मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ। सफलता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और ये मेरा प्रोग्राम शिव बाबा आपको समर्पित है। अब आप भी मेरे डांस का आनंद लें। इस फीलिंग से, उसको भी साक्षी बनाकर ये डांस करेंगे लेकिन पहले प्रैक्टिस भी अच्छी कर लें और सुधार कर लें। तो निश्चित रूप से सफल होंगी।



