आनंद सरोवर में आध्यात्मिक विमर्श एवं राजयोग मेडिटेशन का आयोजन; कामधेनु विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.आर.बी. सिंह ने की ब्रह्माकुमारी संस्था के प्रयासों की सराहना
दुर्ग,(छत्तीसगढ़): शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के बघेरा स्थित आनंद सरोवर में नवरात्रि के आध्यात्मिक रहस्यों पर केंद्रित विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कामधेनु विश्वविद्यालय, अंजोरा के कुलपति डॉ. आर.आर.बी. सिंह, कुलसचिव श्री राठिया सहित वेटरनरी कॉलेज के प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं पटका पहनाकर स्वागत किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से नवदुर्गा की चैतन्य झांकी के आध्यात्मिक रहस्यों से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने नवरात्रि को केवल देवी-पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न मानते हुए इसे आत्मजागरण, आत्मपरिष्कार और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने का पर्व बताया। उन्होंने कहा कि देवी के स्वरूपों में निहित आध्यात्मिक संदेश मनुष्य को अपने भीतर की बुराइयों पर विजय प्राप्त कर श्रेष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
देवी के अस्त्र-शस्त्र हमारी आंतरिक शक्तियों के प्रतीक : चैतन्य प्रभा दीदी
प्रारंभिक उद्बोधन में ब्रह्माकुमारी चैतन्य प्रभा दीदी ने कहा कि नवरात्रि का वास्तविक संदेश अपने जीवन को दिव्य गुणों से संपन्न बनाना है। देवी के अष्टभुजाधारी स्वरूप को उन्होंने मनुष्य के भीतर निहित विभिन्न शक्तियों का प्रतीक बताया। सहन करने, परिस्थितियों का सामना करने, समाहित करने और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की शक्ति जीवन की वे आवश्यक क्षमताएं हैं, जिनके अभाव में व्यक्ति तनाव, चिंता और अशांति से घिर जाता है।
देवी को सर्वगुण संपन्न, सोलह कला संपूर्ण, संपूर्ण निर्विकारी और अहिंसा के आदर्श स्वरूप में पूजे जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देवी के चरणों में दिखाए गए असुरों का आध्यात्मिक अर्थ समझना आवश्यक है। वास्तव में क्रोध, लोभ, ईर्ष्या, द्वेष और घृणा जैसी आसुरी प्रवृत्तियां ही मनुष्य की आंतरिक शत्रु हैं। जब व्यक्ति अपने भीतर शांति, प्रेम, पवित्रता और सहनशीलता जैसे दिव्य गुणों को जागृत करता है, तब इन विकारों पर विजय प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त होता है।
नवरात्रि में जागरण की परंपरा का आध्यात्मिक रहस्य समझाते हुए उन्होंने कहा कि जागरण का अर्थ केवल रातभर जागना नहीं, बल्कि अज्ञान के अंधकार से निकलकर ज्ञान के प्रकाश में जागृत होना है। आत्मा और परमात्मा के यथार्थ परिचय से जीवन में स्थायी जागृति आती है। नवरात्रि की साधना तभी सार्थक है, जब नौ दिनों की आराधना हमारे जीवन में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन का आधार बने।
इसके पश्चात चैतन्य प्रभा दीदी ने राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से उपस्थित अतिथियों एवं श्रोताओं को आत्मानुभूति तथा परमात्मानुभूति का अभ्यास कराया।
राजयोग से आत्मबल और मन पर विजय का मार्ग प्रशस्त होता है : रीटा दीदी
ब्रह्माकुमारी रीटा दीदी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि राजयोग मेडिटेशन आत्मा और परमात्मा के बीच संबंध स्थापित करने की सहज आध्यात्मिक विधि है। इसके अभ्यास से व्यक्ति परमात्मा के शांति, प्रेम, आनंद और सुख जैसे गुणों का अनुभव अपने जीवन में कर सकता है।
उन्होंने कहा कि राजयोग केवल मानसिक शांति प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वयं के विचारों, भावनाओं और व्यवहार को सकारात्मक दिशा देने की कला भी है। इसके लिए सर्वप्रथम स्वयं आत्मा के स्वरूप तथा परमात्मा के सत्य परिचय को समझना आवश्यक है। परमात्मा के प्रति प्रेम और आत्मीय संबंध का अनुभव आत्मिक शक्ति को बढ़ाता है तथा जीवन में श्रेष्ठ परिवर्तन की प्रेरणा देता है।
वर्तमान समय में बढ़ती मानसिक व्यग्रता और जीवन की चुनौतियों के संदर्भ में उन्होंने नियमित मेडिटेशन की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन सुबह-शाम कुछ समय राजयोग का अभ्यास करने से मन के अनावश्यक विचारों को शांत करने और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायता मिलती है। ‘मन जीते जगत जीत’ की उक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्वयं पर विजय प्राप्त करना ही जीवन की वास्तविक सफलता है। राजयोग व्यक्ति को पहले स्वयं का स्वामी बनना और फिर अपने आचरण से परिवार तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना सिखाता है।
उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान, नियमित साधना और दृढ़ संकल्प को जीवन में संतुलन, धैर्य एवं आत्मविश्वास विकसित करने का आधार बताया। उनके अनुसार, जब व्यक्ति परमात्मा से अपना संबंध जोड़कर आत्मिक शक्तियों को जागृत करता है, तब विपरीत परिस्थितियों में भी शांत और सकारात्मक बने रहने की क्षमता विकसित होती है।
आध्यात्मिक चिंतन व्यक्ति को बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है : डॉ. सिंह
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कामधेनु विश्वविद्यालय, अंजोरा के कुलपति डॉ. आर.आर.बी. सिंह ने संस्था के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहां प्रस्तुत विचार व्यक्ति को अपने भीतर के अंधकार और नकारात्मकता को दूर करने की दिशा दिखाते हैं। स्वयं को बेहतर इंसान बनाने, जीवन में सकारात्मकता विकसित करने और विश्व शांति के प्रयासों में सहभागी बनने के लिए आध्यात्मिक चिंतन की महत्वपूर्ण भूमिका है।
डॉ. सिंह ने ब्रह्माकुमारी संस्था से अपने पूर्व परिचय का उल्लेख करते हुए इसके कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा आत्मिक शांति और जीवन-मूल्यों पर दिया जाने वाला मार्गदर्शन समाज के लिए उपयोगी है। यहां प्राप्त ज्ञान को जीवन में आत्मसात करना और उसके अनुरूप आचरण करना ही इस आध्यात्मिक संदेश की वास्तविक सार्थकता है।
कामधेनु विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री राठिया ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में भी उन्हें ब्रह्माकुमारी संस्था के संपर्क में आने का अवसर मिला था। आनंद सरोवर में पुनः आने का अनुभव सुखद रहा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यहां प्राप्त आध्यात्मिक ज्ञान को व्यवहार में अपनाकर सभी अपने जीवन को बेहतर और सकारात्मक बना सकेंगे।
प्रभु स्मृति के गीत से भावपूर्ण हुआ वातावरण
कार्यक्रम में शशिभूषण भाई ने प्रभु स्मृति का मधुर गीत प्रस्तुत किया, जिससे वातावरण आध्यात्मिक भावनाओं से ओतप्रोत हो गया।
समूचे आयोजन का केंद्रीय संदेश यही रहा कि नवरात्रि का वास्तविक उद्देश्य बाहरी उपासना के साथ-साथ अंतर्मन का परिष्कार करना है। जब मनुष्य अपने भीतर के विकारों पर विजय प्राप्त कर शांति, प्रेम, पवित्रता और सद्भावना को जीवन का आधार बनाता है, तभी देवी-शक्ति की आराधना वास्तविक अर्थों में सार्थक होती है।



