अहमदाबाद, गुजरात। वरिष्ठ अधिवक्ता कांतिभाई ठक्कर (कांतिभाई वकील) अपना साकार शरीर त्यागकर अनंत यात्रा की ओर प्रस्थान कर गए हैं। दिनांक 7 अक्टूबर 2026, बुधवार को प्रातः 8:00 बजे वे बापदादा के सान्निध्य में अव्यक्त वतन पहुँच गए।
कांतिभाई पिछले 52 वर्षों से ईश्वरीय ज्ञान और योग-साधना में समर्पित रहे। उन्होंने अत्यंत सादगीपूर्ण, संयमित और अनुशासित जीवन जीकर पूरे ब्राह्मण परिवार के लिए प्रेरणा का स्रोत बनने का महान कार्य किया। यज्ञ के आदि रत्न एवं ट्रस्टी, वरिष्ठ राजयोगी ब्रह्माकुमार रमेशभाई शाह के मार्गदर्शन में कांतिभाई ने गुजरात के सैकड़ों सेवा केंद्रों के भवनों और जमीनों की खरीद-बिक्री तथा अन्य कानूनी मामलों में यज्ञ के आधिकारिक कानूनी सलाहकार के रूप में 35 से अधिक वर्षों तक वरिष्ठ अधिवक्ता की सेवाएँ दीं। बाबा के भवनों और जमीनों के लिए वे सटीक एवं उचित कानूनी सलाह और सुझाव देते रहे। उनकी मूल्यवान सेवाओं के परिणामस्वरूप अनेक सेवा केंद्र कानूनी दृष्टि से सुरक्षित और निर्विघ्न बने। ज्यूरिस्ट विंग की स्थापना के समय से ही कांतिभाई ने अहमदाबाद और गुजरात में सिटी सिविल कोर्ट, फैमिली कोर्ट, हाई कोर्ट तथा समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं से संबंधित सेवाओं में अथक एवं निःस्वार्थ योगदान दिया। उन्होंने कुछ वर्षों तक कॉलेज में कानून के अध्यापक के रूप में भी सेवा की।
“एक बाबा, दूजा न कोई” का मंत्र उन्होंने सदा हृदय में दृढ़ रखा और निरंतर तीव्र पुरुषार्थ तथा आध्यात्मिक लगन में मग्न रहे। उनकी दोनों बेटियाँ बाबा की सेवा में समर्पित हैं। बड़ी बेटी ब्रह्माकुमारी हंसाबेन वर्ष 1976 से सेवा कर रही हैं और वर्तमान में अमेरिका के सैक्रामेंटो सेवा केंद्र की निमित्त संचालिका हैं। दूसरी बेटी ब्रह्माकुमारी मीनाबेन वर्ष 1992 से सेवा कर रही हैं और आबू स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल में चीफ अकाउंटेंट के रूप में सेवाएँ दे रही हैं। उनके लौकिक पुत्र यज्ञेशभाई और उनका परिवार अत्यंत स्नेही एवं सहयोगी होकर यज्ञ की सेवाओं में योगदान देता है। उनकी अन्य दो बेटियाँ भी यज्ञ-स्नेही हैं।
ऐसी वैराग्यवान, समर्पित और श्रेष्ठ आत्मा को हम हृदय से श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हैं। उनका सादगीपूर्ण जीवन, आध्यात्मिक समर्पण, अनुशासन और निःस्वार्थ सेवा पूरे ब्राह्मण परिवार को सदैव प्रेरणा देती रहेगी।

