एक सुन्दर छोटे गाँव में, जहाँ सभी ग्रामीण मिलजुल कर रहते थे, वहाँ एक जादुई पेड़ था। यह पेड़ अद्भुत था और हर दिन अलग-अलग प्रकार के फल देता था। एक दिन सेब, तो दूसरे दिन आम, इस तरह यह पेड़ गाँव वालों के लिए एक वरदान साबित हुआ।
गाँव के लोग इस पेड़ की पूजा करते और उसके फलों का उपयोग सावधानी से करते। लेकिन गाँव में एक लालची व्यक्ति भी था, जिसका नाम था गोपाल। गोपाल हमेशा उस जादुई पेड़ के फलों को देखकर ललचाता था। उसने सोचा कि अगर वह पेड़ के सारे फल एक साथ उठा लेगा, तो वह अमीर बन जाएगा।
एक रात, गोपाल ने योजना बनाई और पेड़ के सारे फलों को चुरा लिया। उसने सोचा नहीं कि इससे पेड़ पर क्या असर होगा। अगले दिन, जब गाँव वाले पेड़ के पास पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि पेड़ सूख चुका है और उस पर एक भी फल नहीं था। सभी गाँव वाले बहुत दु:खी हुए और उन्होंने गोपाल को उसके लालच के लिए फटकारा।
गोपाल ने तब महसूस किया कि उसके लालच ने न केवल उसे नुकसान पहुंचाया था, बल्कि पूरे गाँव को भी। वह पेड़, जो कभी उनके लिए आशीर्वाद था, अब एक सूखा तना बन चुका था। गोपाल ने अपनी गलती का एहसास करते हुए गाँव वालों से माफी मांगी और वादा किया कि वह फिर कभी लालच नहीं करेगा।
शिक्षा : यह कहानी हमें यह सिखाती है कि लालच से हमेशा नुकसान होता है और संतोष ही सच्चा धन है।
