मुख पृष्ठकेंद्र शासित प्रदेशदिल्लीदिल्ली-किंग्सवे कैंप:शिव काअवतरण दिवस – 89th त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ

दिल्ली-किंग्सवे कैंप:शिव काअवतरण दिवस – 89th त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ

दिल्ली-किंग्सवे कैंप: ब्रह्माकुमारीज़सेंटर में परमात्मा शिव काअवतरण दिवस – 89th त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ।
इस शुभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में तिमारपुर विधानसभा क्षेत्र के नवनिर्वाचित विधायक श्री सूर्य प्रकाश खत्री जी का आगमन हुआ। इसके अतिरिक्त आउट्रम लेंस, किंग्सवे कैंप, RWA फेडरेशन के अध्यक्ष श्री अजय बुद्धिराजा, श्री ओम प्रकाश अरोड़ा (Owner – UBON Company), श्री जगदीश सहगल (पूर्व कमिश्नर, एक्साइज एंड कस्टम्स), श्री गुलशन नारंग (प्रमुख समाजसेवी और व्यापारी), श्री विजय अग्रवाल (समाजसेवी) सहित कई गणमान्य अतिथियों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
आदरणीय राजयोगिनी बी.के. आशा दीदी जी, Director, Omshanti Retreat Centre, गुरूग्राम का विशेष संदेश :कार्यक्रम के दौरान फोन कॉल के माध्यम से आदरणीय राजयोगिनी बी.के. आशा दीदी जी ने किंग्सवे कैंप, मुख्य सेवाकेंद्रHoly House, मुखर्जी नगर, उप सेवाकेन्द्र और Light House, हडसन लेन उप सेवाकेन्द्र के सभी भाई-बहनों को त्रिमूर्ति शिव जयंती की शुभकामनाएँ दीं और इस दिवस के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा, “आज का दिन वाकई अद्भुत है, जिसे पूरे विश्व में ब्रह्मावत्स दिव्य प्रेम और श्रद्धा के साथ मना रहे हैं। यह सिर्फ शिव बाबा का ही नहीं, बल्कि हम सभी आत्माओं का भी जन्मदिवस है, क्योंकि जब परमात्मा शिव इस धरती पर अवतरित होते हैं, तब हमें हमारी सच्ची आत्मिक पहचान देते हैं।”
आगे उन्होंने कहा कि जब परमात्मा इस धरा पर आते हैं, तो हमें अंधकार से प्रकाश, असत्य से सत्य और मृत्यु से अमरत्व की ओर ले जाते हैं। वे हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं और यही उनका सबसे बड़ा उपहार है। इस अवसर पर हमें शिव बाबा को भी एक उपहार देना चाहिए – और वह है हमारा सदा खुशनुमा चेहरा। हमें अपने चेहरे को सदा आनंदित रखना है और सभी को खुशी बांटनी है।
मुख्य अतिथि – श्री सूर्य प्रकाश खत्री जी  ने कहा कि भगवान ने मुझे जीवन में बहुत कुछ दिया—अच्छी सुविधाएँ, अवसर और संसाधन। अब समय आ गया है कि मैं उसे लौटाऊँ। परमात्मा ने अपना कर्तव्य निभाया, अब मेरी आत्मा का धर्म है कि मैं सोचूं “भाई, तुझे इतना कुछ मिला, अब तूने समाज को क्या दिया? अब मेरा संकल्प है कि मैं अपना जीवन नर सेवा, समाज सेवा और मानव सेवा को समर्पित करूं।”साथ ही आपने संस्थान के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ जैसी संस्थाओं के प्रयासों के कारण ही समाज में नैतिकता और शांति बनी हुई है। उन्होंने कहा, “आज दुनिया में पाप, भ्रष्टाचार और मानसिक तनाव बढ़ रहा है, लेकिन ब्रह्माकुमारीज़ इस धरती पर आध्यात्मिक ज्योति जलाए हुए हैं। यह संस्था समाज और देश को बचाने का एक महान कार्य कर रही है। मैं शिव बाबा से प्रार्थना करता हूँ कि मैं हमेशा सत्य के मार्ग पर अडिग रहूं और समाज सेवा के कार्य में तत्पर रहूं।”

शिवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य – बी.के. साधना दीदी         बी.के. साधना दीदी ने शिवरात्रि के आध्यात्मिक रहस्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि हम शिवजी को अक्–धतूरा का फूल चढ़ाते हैं, जबकि अन्य देवी-देवताओं को सुंदर-सुंदर पुष्प अर्पित किए जाते हैं। इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ यह है कि हमें अपने भीतर की कड़वाहट और नकारात्मकता को समाप्त करना है। काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार रूपी अक् धतूरे को शिव को समर्पित करना ही सच्ची शिवरात्रि मनाना है।        उन्होंने आगे बताया कि सर्व आत्माओं के पिता केवल एक हैं – परमात्मा शिव। उनका स्वरूप ज्योतिर्बिंदु (अलोकिक प्रकाश) है। उन्हें त्रिदेव और त्रिमूर्ति भी कहा जाता है, क्योंकि वे ही ब्रह्मा, विष्णु और शंकर के रचयिता हैं। अंग्रेजी में G.O.D का तात्पर्य जनरेटर (Brahma), ऑपरेटर (Vishnu), और डिस्ट्रॉयर (Shankar) से लिया जाता है। उनका दिव्य नाम शिव है, जो कल्याणकारी है, और उनका स्वरूप ज्योतिर्बिंदु, उनका दिव्य धाम परमधाम है, जहां से वे इस कलियुगी रात्रि में प्रजापिता ब्रह्मा की तन में अवतरित हो हमें हमारी पहचान और इस कलयुग को सतयुग में परिवर्तन करने का श्रेष्ठ कार्य करते हैं।       शिवरात्रि पर व्रत रखने का भी गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ यही है कि हम काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, नफरत और ईर्ष्या जैसे विकारों का सच्चा व्रत लें। पवित्रता का व्रत सबसे श्रेष्ठ व्रत है, जिसमें हमारे हृदय में सभी के प्रति शुभ भावना और स्नेह बना रहे। प्रत्येक आत्मा विशेष और अमूल्य है, इसलिए हमें सभी को सम्मान और प्रेम देना चाहिए।ध्वजारोहण एवं शुभ संकल्प:
शिव बाबा के अवतरण दिवस पर परमात्म ध्वजारोहण बड़े उमंग-उत्साह के साथ किया गया। सभी श्रद्धालुओं ने ध्वज के नीचे खड़े होकर नारे लगाए और शुभ संकल्प लिए कि वे जीवन में सत्यता, निर्भयता और आध्यात्मिकता को अपनाएंगे। साथ ही, उन्होंने बुरी आदतों, नकारात्मक सोच और आसुरी प्रवृत्तियों से मुक्त रहने का संकल्प लिया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ :        कार्यक्रम में गीत-संगीत, नृत्य एवं लघु नाटिका का आयोजन किया गया, जिसमें कलाकारों ने परमात्मा शिव के धरा पर अवतरण, उनके दिव्य कार्य और सतयुग की स्थापना का भावपूर्ण चित्रण किया। बी.के. तारा बहन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को राजयोग मेडिटेशन का गहरा अनुभव कराते हुए आंतरिक शांति और दिव्य ऊर्जा का एहसास करवाया।
शिव जयंती के इस दिव्य आयोजन का समापन परमात्म भोग एवं वरदान प्राप्ति के साथ हुआ। सभी उपस्थित भाई-बहनों ने आध्यात्मिक अनुभव, ज्ञान और आनंद से परिपूर्ण इस अद्भुत दिवस का लाभ उठाया। ब्रह्माकुमारीज़ परिवार ने इस शुभ अवसर पर आए सभी गणमान्य अतिथियों, समाजसेवियों और श्रद्धालुओं का हृदय से आभार व्यक्त किया।

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