मुख पृष्ठअंतर्राष्ट्रीय योग दिवसकरेली: जीवन से नकारात्मकता दूर करता है राजयोग - ब्रह्माकुमारी सरोज दीदी

करेली: जीवन से नकारात्मकता दूर करता है राजयोग – ब्रह्माकुमारी सरोज दीदी

करेली,मध्यप्रदेश : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवाकेन्द्र प्रभु उपहार भवन में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पतंजलि के योग शिक्षक हरगोविंद शर्मा एवं रमाकांत स्थापक के मार्गदर्शन में सभी भाई बहनो ने योगाभ्यास किया l

प्रातः 6 बजे शुरू हुए योगाभ्यास का शुभारंभ ब्रह्माकुमारी सरोज दीदी (मुख्य संचालिका ब्रह्माकुमारीज करेली)एवं उपस्थित अतिथियो द्वारा परमात्मा की याद में दीप जलाकर किया गया l योगाभ्यास में योग शिक्षक द्वारा अलग अलग योग आसनों का महत्व बताते हुए योग करने की सही विधि भी बतायी गयी l

योग का जीवन मे कितना महत्व है बताते हुए ब्रह्माकुमारी सरोज दीदी ने कहा कि अत्यन्त प्राचीन वैदिक काल से ही भारतीय तत्वदर्शी ऋषियों और मनीषियों ने उद्घोष किया है कि

सुख, शान्ति और खुशी का स्रोत मनुष्य के मन में व्याप्त है। भौतिक वस्तुओं और साधनों में खुशी तथा शान्ति की खोज करना अपनी परछाई को पकड़ने जैसा है। संचार क्रान्ति ने मानवीय सम्बन्धों की मर्यादा और परिभाषा को बदल दिया है। सामाजिक, आर्थिक और मानसिक उथल-पुथल मच गई है और इससे मानवीय मूल्यों का सबसे अधिक हास होने से जीवन में समस्याएं, दुःख और नकारात्मक विचार तेजी से बढ़े हैं। यही कारण है कि मनुष्य के जीवन से सुख, शान्ति और चैन छिन-सा गया है। मनुष्य का मन ही उसके जीवन में चलने वाली सम्पूर्ण गतिविधियों जैसे सुख और दुःख, हार और जीत तथा आशा और निराशा इत्यादि का मुख्य कारण है। इसलिए मनुष्य के जीवन को सुखी और स्वस्थ बनाने के लिए वर्तमान समय में ऐसे योगाभ्यास की आवश्यकता है जो मन को स्वस्थ और निरोगी बना सके।

वर्तमान समय में प्रचलित योगाभ्यास केवल शारीरिक योगाभ्यास बन कर रह गए हैं परन्तु योग का वास्तविक अर्थ होता है- `दो अलग-अलग अस्तित्व वाली संख्या का योग। आज ऐसे योग की आवश्यकता है जो इस भौतिक शरीर को संचालित करने वाली चैतन्य सत्ता `आत्मा` को स्वस्थ और पवित्र बनाते हुए परमात्मा से मिलन कराकर सच्ची सुख, शान्ति और खुशी की अनुभूति करा सके।

ब्रह्माकुमारीज़ संस्था में सिखाया जाने वाला राजयोग भारत का सबसे प्राचीन और परमात्मा द्वारा सिखाया गया योग है। यह आत्मा में व्याप्त दुःख और पाप के पाँच मूल कारणों- काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार को दूर करने वाला एकमात्र योगाभ्यास है, जबकि कोई भी प्रचलित योगासन ऐसा नहीं है जो मन को मोह या अहंकार से मुक्त कर सके। वर्तमान समय में ऐसे ही योगाभ्यास की आवश्यकता है जो मनुष्य के मन को स्वस्थ और निरोग बना सके। क्योंकि श्रीमद् भगवद्गीता में एक बात बहुत ही स्पष्ट रूप से कही गई है- `मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु और सबसे बड़ा मित्र उसका मन ही होता है।`

जब मनुष्य की मनोदशा अर्थात् मन की दशा सकारात्मक होती है, तो मन परमात्म अनुभूति का माध्यम बनकर जीवन के महान लक्ष्य जीवनमुक्ति की अनुभूति कराने का साधन बन जाता है| परन्तु जब मनुष्य के मन की दशा नकारात्मक होती है तो मन जीवन में रोग, शोक और दुःख का कारण बन जाता है, इसलिए मन को स्वस्थ और प्रसन्न बनाने वाला योग ही यथार्थ योग है और इससे ही जीवन में सच्ची सुख, शान्ति और खुशी आती है।

हमारे जीवन में वर्तमान समस्याएं और सम्बन्धों में तनाव और टकराव का मूल कारण कोई व्यक्ति या परिस्थिति नहीं है, बल्कि सकारात्मक मनोदशा का अभाव है। राजयोग का जीवन में अभ्यास प्रारम्भ करते ही मन में व्याप्त नकारात्मक मनोवृत्तियों की पहचान होने लगती है। प्रत्येक मनुष्य में नकारात्मक कर्म और व्यर्थ चिन्तन के अनुसार उसके मन में नकारात्मक मनोवृत्तियों का निर्माण होता है। अतः राजयोग द्वारा आत्म- अनुभूति ही मन को नकारात्मक वृत्तियों से मुक्त करने का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है।

तो आइये, इस सृष्टि के महापरिवर्तन की पावन वेला में स्वयं को नकारात्मक वृत्तियों से परिवर्तन कर एक नए सुखमय समाज की पुनर्स्थापना के लिए कदम बढ़ायें। सर्व मनुष्यात्माओं को `अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस` के अवसर पर परमात्मा की ओर से यही ईश्वरीय संदेश है।

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस` के अवसर पर पुनः सर्व मनुष्यात्माओं को स्वयं परमात्मा द्वारा सिखाए गए राजयोग के माध्यम से, सकारात्मक मन की अनुभूति करने के लिए ब्रह्माकुमारी संस्थाओं में एक विशेष अनुभूति सत्र आयोजित किया गया है। इस  निःशुल्क राजयोग शिविर में समाज के सभी वर्ग के लोगों को सम्मिलित होने के लिए सादर ईश्वरीय निमंत्रण है। समापन पर आमंत्रित अतिथियों को ईश्वरीय सौगात एवं प्रभु प्रसाद भेट किया गया l 

इसी श्रृंखला में एक और कार्यक्रम के अंतर्गत नगर पालिका परिषद करेली के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें योग अभ्यास के लिए ब्रह्माकुमारी संस्थान को आमंत्रित किया गया ,कार्यक्रम में नगर पालिका के अधिकारियों सहित नगर के प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे। ब्रह्मकुमारी बहनों द्वारा योग अभ्यास के साथ राजयोग की अनुभूति भी कराई गई और मन के स्वास्थ्य के लिए राजयोग का महत्व भी बताया गया।

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