मथुरा, उत्तर प्रदेश: आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र रिफायनरी नगर में संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका जगदम्बा ( मम्मा) की पुण्य तिथि गहन योग साधना और पुष्पांजलि अपर्ण करके मनाई गई. इस मौके पर उनकी याद में ब्रह्ममुहूर्त से देर रात तक योग-तपस्या का दौर जारी रहा। सेवा केंद्र प्रभारी बी के कृष्णा दीदी नें मम्मा के जीवन के प्रेरणादायक प्रसंगों को साझा किया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1919 में अमृतसर के साधारण परिवार में मम्मा का जन्म हुआ था। उनके बचपन का नाम ओम राधे था। जब आप ओम की ध्वनि का उच्चारण करती थीं तो पूरे वातावरण में गहन शांति छा जाती थी, इसलिए भी आप ओम राधे के नाम से लोकप्रिय हुईं। आप बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि और प्रतिभावान थीं। ब्रह्मा बाबा ने कोई भी ज्ञान की बात आपको कभी दोबारा नहीं सिखाई। आप एक बार जो बात सुन लेती थीं उसी समय से अपने कर्म में शामिल कर लेती थीं। 24 जून 1965 को आपने अपने नश्वर देह का त्याग करके संपूर्णता को प्राप्त किया था।
1965 तक मुख्य प्रशासिका की निभाई जिम्मेदारी.–
मंच संचालक बीके मनोज भाई ने बताया कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की वर्ष 1937 में स्थापना के समय संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने जब माताओ-बहनों के नाम एक ट्रस्ट बनाया तो उसकी जिम्मेदारी सबसे पहले मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) को दी गई थी। तब से लेकर 24 जून 1965 तक आपने इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय की बागडोर बड़ी ही कुशलता के साथ निभाई। कम उम्र होने के बाद भी आपका गंभीर व्यक्तित्व और ज्ञान की गहराई से सभी अचंभित रह जाते थे।
आयोजन को सफल बनाने मे बी के पूजा, अंजलि, बी के मनोहर, बी के नीलम, सरिता, माया, दामोदर, बॉबी भाई, रिफाइनरी से बी के प्रमोद और बी के आलोक भाई का विशेष सहयोग रहा।










